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हाथरस : विधानसभा चुनाव में हाशिए पर ही रही आधी आबादी
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
सभी राजनीतिक दल आधी आबादी को पूरे अधिकार देने की वकालत करते हैं। चुनाव में तो नारी सशक्तीकरण की जोर-शोर से बात कही जाती है, लेकिन बात यदि विधानसभा चुनाव की करें तो स्थिति इसके विपरीत नजर आती है। इससे बड़ी बिड़ंबना क्या होगी कि जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर हुए चुनावों में अभी तक एक महिला ही विधायक के रूप में चुनी गई है। राजनीतिक दलों से जुड़ी महिलाएं हर चुनाव में अपनी दावेदारी जोर-शोर से पेश करती हैं लेकिन प्रत्याशी बनाते समय राजनीतिक दल भी उन्हें वरीयता नहीं देते। इसकी वजह से यहां विधानसभा चुनाव में राजनीति में महिलाएं हाशिए पर ही रहीं।
जिले के चुनावी इतिहास पर यदि प्रकाश डालें तो हाथरस विधानसभा सीट के लिए अब तक 16 बार चुनाव हो चुके हैं। किसी भी बड़े राजनीतिक दल ने कभी भी इस सीट से महिला उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा और इसी वजह से कोई भी महिला आज तक इस सीट से विधानसभा में नहीं पहुंच सकी। सादाबाद सीट से भी यही स्थिति रही। वहां से भी कभी बड़े राजनीतिक दल ने महिला उम्मीदवार पर विश्वास नहीं किया। ऐसे में वहां कभी कोई महिला विधायक नहीं बन सकी। सिकंदराराऊ सीट जरूर इसकी अपवाद है।
वहां वर्ष 1980 में जरूर कांग्रेस से पुष्पा चौहान ने जीत हासिल की। उन्हें इस चुनाव में 21517 वोट मिले। उन्होंने एलकेडी के सुरेश प्रताप को पराजित किया। वर्ष 2007 में भी सपा ने मधु बघेल को सिकंदराराऊ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया। उनके सामने भाजपा के यशपाल सिंह चौहान मैदान में थे। कड़े मुकाबले में चौहान ने मधु बघेल को 2,143 वोटों से हराया था। ऐसे में आजादी के बाद इस जिले की तीनों सीटों पर अब तक एक महिला ही विधायक बन सकी है। संवाद
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सभी राजनीतिक दल आधी आबादी को पूरे अधिकार देने की वकालत करते हैं। चुनाव में तो नारी सशक्तीकरण की जोर-शोर से बात कही जाती है, लेकिन बात यदि विधानसभा चुनाव की करें तो स्थिति इसके विपरीत नजर आती है। इससे बड़ी बिड़ंबना क्या होगी कि जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर हुए चुनावों में अभी तक एक महिला ही विधायक के रूप में चुनी गई है। राजनीतिक दलों से जुड़ी महिलाएं हर चुनाव में अपनी दावेदारी जोर-शोर से पेश करती हैं लेकिन प्रत्याशी बनाते समय राजनीतिक दल भी उन्हें वरीयता नहीं देते। इसकी वजह से यहां विधानसभा चुनाव में राजनीति में महिलाएं हाशिए पर ही रहीं।
जिले के चुनावी इतिहास पर यदि प्रकाश डालें तो हाथरस विधानसभा सीट के लिए अब तक 16 बार चुनाव हो चुके हैं। किसी भी बड़े राजनीतिक दल ने कभी भी इस सीट से महिला उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा और इसी वजह से कोई भी महिला आज तक इस सीट से विधानसभा में नहीं पहुंच सकी। सादाबाद सीट से भी यही स्थिति रही। वहां से भी कभी बड़े राजनीतिक दल ने महिला उम्मीदवार पर विश्वास नहीं किया। ऐसे में वहां कभी कोई महिला विधायक नहीं बन सकी। सिकंदराराऊ सीट जरूर इसकी अपवाद है।
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वहां वर्ष 1980 में जरूर कांग्रेस से पुष्पा चौहान ने जीत हासिल की। उन्हें इस चुनाव में 21517 वोट मिले। उन्होंने एलकेडी के सुरेश प्रताप को पराजित किया। वर्ष 2007 में भी सपा ने मधु बघेल को सिकंदराराऊ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया। उनके सामने भाजपा के यशपाल सिंह चौहान मैदान में थे। कड़े मुकाबले में चौहान ने मधु बघेल को 2,143 वोटों से हराया था। ऐसे में आजादी के बाद इस जिले की तीनों सीटों पर अब तक एक महिला ही विधायक बन सकी है। संवाद
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