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हाथरस : 75 साल बाद भी मीलों चलकर मिलता है पीने का पानी

Sat, 13 Aug 2022 11:40 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 13 Aug 2022 11:40 PM IST
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Hathras: Even after 75 years, drinking water is available by walking miles
हाथरस : सादाबाद के टिकैत रजवाहाके बाहर नल से बाइक पर पानी भरकर ले जाते ग्रामीण। संवाद - फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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आजादी के 75 साल बाद भी जिले के करीब 65 ग्रामों के ग्रामीणों को आज भी खारे पानी की समस्या से मुक्ति नहीं मिल पाई है। इन ग्रामीणों को मीलों चलकर पानी की प्यास बुझाने के लिए पानी अपने साधनों से पानी लेकर आना पड़ता है। कुछ ग्रामों में तो पानी को खरीदकर ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझानी पड़ती है। जिले की तहसील सादाबाद और ब्लॉक हसायन के करीब 65 ग्रामों में आज भी खारे पानी की समस्या बनी हुई है।
खारे पानी की समस्या से निजात के लिए समय समय पर जन प्रतिनिधियों, ग्रामीणों व समाजसेवी संगठनों ने आवाज उठाई है, लेकिन यह समस्या जस की तस बनी हुई है। हालांकि कुछ ग्रामों में इस समस्या के निजात के लिए पाइप लाइन बिछाकर पानी की आपूर्ति जरूर पहुंचाई गई है, लेकिन पानी की टंकी व पाइप लाइनों के रखरखाव न होने के काण पाइपलाइन व टंकियां क्षतिग्रस्त हो गईं। कुछ टंकियां तो बनने के बाद से ही सफेद हाथी बनी हुई हैं। इस कारण जिले के करीब 65 गांवों में आज भी खारे पानी की समस्या बनी हुई हैं।
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हालांकि कई बार प्रशासन की ओर से खारे पानी की समस्या से निजात के लिए तमाम परियोजनाओं को बनाकर शासन को भेजा गया है, लेकिन बजट के अभाव में परियोजनाएं फाइलों में दबकर रह गई हैं। अब जल निगम की ओर से फिर से 100 गांवों में पाइपलाइन योजना के तहत कार्ययोजना को बनाया गया है, जिससे खारे पानी की समस्या से निजात मिल सके। संवाद
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इन ग्राम पंचायत में है खारे पानी की समस्या
मंस्या, नौगांव, अरौठा, गुरसौटी, गीगला, जारऊ, कंजौली, वेदई, जैतई, नानऊ, नौपुरा, मई, अभयपुरा, मिढ़ावली, गहचौली, गुखरौली, गढ़ उमराव, सिथरापुर, जटोई ,सहित हसायन क्षेत्र के कई गांवों में आज भी खारे पानी की समस्या बनी हुई है।
अपने गांव से करीब तीन किमी दूर रजवाहे के किनारे के इस हैंडपंप पर रोज पीने के लिए पानी लेने आना पड़ता है। सुबह व शाम तो बहुत भीड़ रहती है। इस वजह से दोपहर में पानी लेने आता हूं।
-रवि कुमार, नगला खुशाल
गांव में पानी की बहुत समस्या है। दूर से पानी लेकर आना पड़ता है। नहाने धोने के लिए और पीने के लिए पानी मोल का खरीदना पड़ता है। कुछ लोग 400 महीने के हिसाब से भी पानी लाते हैं।
-ओमवती, मिढ़ावली
गांव से 2 किलोमीटर दूर लगे नल से पीने के लिए पानी लेने आना पड़ता है। गांव में खारा, नमकीन पानी है। इस हैंडपंप पर कई गांवों के लोग काफी दूर दूर से पीने के लिए पानी लेने आते हैं।
-नाथूराम, नगला कलू।
करीब 25 गांवों के लोग इस हैंडपंप से पीने के लिए पानी भरने आते हैं। इस बारे में कई बार जल निगम के अधिकारियों से भी शिकायत की है। अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।

-कन्हैयालाल, ग्राम प्रधान मंस्या
जिले के खारे पानी वाले गांवों का सर्वे कराया गया है। इन ग्रामों की परियोजना तैयार कर बजट स्वीकृति के लिए शासन को भेजी जा रही है। 28 ग्रामों में स्वीकृत परियोजनाओं के सापेक्ष कार्य किया जा रहा है।
-मोहम्मद इमरान, अधिशासी अभियंता जल निगम ग्रामीण।
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