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Hathras News: पेंशन न आने की टेंशन, दाैड़ लगा रहीं निराश्रित महिलाएं
Sat, 19 Sep 2026 02:40 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sat, 19 Sep 2026 02:40 AM IST
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तहसील सदर स्थित जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय। संवाद
- फोटो : Samvad
छह महीनों से पेंशन नहीं आई है। घर में कमाने वाला कोई नहीं है। एक बेटी है, वो भी दिव्यांग। उसे थोड़ी दिव्यांगता पेंशन मिल जाती है पर मेरी पेंशन बंद है। समझ नहीं आता घर का खर्चा कैसे चलाएं। ये दर्द है कांशीराम काॅलोनी निवासी सुमन शर्मा का।
सुमन बताती हैं कि बेटी बेटी जैसे-जैसे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर कुछ पैसे जोड़ती है। उसी पैसे से किसी तरह गुजर-बसर हो रही है। बहुत परेशानी में दिन कट रहे हैं। यह तकलीफ जिले में सुमन जैसी करीब 10 हजार पेंशन विधवाओं की है जिनकी पेंशन कई महीनों से अटकी हुई है। एक तरफ पति को खोने का गम और दूसरी तरफ प्रशासनिक ढुलमुल रवैये का सितम।
उत्तर प्रदेश सरकार की निराश्रित महिला (विधवा) पेंशन योजना का लाभ पाने के लिए बुजुर्ग और बीमार महिलाएं तहसील स्थित पेंशन कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जिम्मेदार अधिकारियों के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। लाभार्थियों का कहना है कि आधार सीडिंग, बैंक खाता री-वेरिफिकेशन और ई-केवाईसी की सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद उन्हें दफ्तरों से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
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मैं भोजपुर से आई हूं। यहां आने-जाने में ही 20 रुपये किराया लग जाता है। होली के बाद से मेरी पेंशन नहीं आई है। अब तक तीन बार चक्कर लगा चुकी हूं। मेरा कोई सहारा नहीं है। पहले छोटा-मोटा काम कर लेती थी लेकिन अब बीमार रहती हूं। कल भी तेज बुखार में तपती हुई आई थी। अधिकारियों ने कहा है कि 20 तारीख तक पेंशन आ जाएगी।
-शारदा देवी, भोजपुर।
मैं गोशाला रोड के पास अटल बगीचे से आई हूं। होली के बाद सिर्फ एक बार ही पेंशन आई थी, उसके बाद से लगातार पेंशन बंद है। साहब लोग भी स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रहे कि अभी और कितने दिन इंतजार करना होगा।
-नत्थू देवी, गोशाला रोड।
मेरी तो पिछले दो वर्ष से पेंशन ही नहीं आई है। जब बैंक जाती हूं तो किराये-भाड़े में ही पैसा चला जाता है। पिछली बार 700 रुपये लेकर गई थी। अब खाते में 450 रुपये ही बचे हैं। बैंक वाले कहते हैं कि सरकार की तरफ से ही पैसा नहीं आया। अब अधिकारियों के पास यही पूछने आई हूं कि दो वर्ष से पेंशन क्यों अटकी है।
-शांति देवी, भोजपुर।
34 हजार पेंशनार्थियों में से 10 हजार लोगों की अभी पेंशन नहीं आई है। शासन स्तर से ही पेंशन रुकी हुई है। इस मामले पत्राचार किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही सभी लाभार्थियों की पेंशन आ जाएगी।
-सीमा मौर्य, जिला प्रोबेशन अधिकारी।
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सुमन बताती हैं कि बेटी बेटी जैसे-जैसे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर कुछ पैसे जोड़ती है। उसी पैसे से किसी तरह गुजर-बसर हो रही है। बहुत परेशानी में दिन कट रहे हैं। यह तकलीफ जिले में सुमन जैसी करीब 10 हजार पेंशन विधवाओं की है जिनकी पेंशन कई महीनों से अटकी हुई है। एक तरफ पति को खोने का गम और दूसरी तरफ प्रशासनिक ढुलमुल रवैये का सितम।
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उत्तर प्रदेश सरकार की निराश्रित महिला (विधवा) पेंशन योजना का लाभ पाने के लिए बुजुर्ग और बीमार महिलाएं तहसील स्थित पेंशन कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जिम्मेदार अधिकारियों के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। लाभार्थियों का कहना है कि आधार सीडिंग, बैंक खाता री-वेरिफिकेशन और ई-केवाईसी की सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद उन्हें दफ्तरों से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
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मैं भोजपुर से आई हूं। यहां आने-जाने में ही 20 रुपये किराया लग जाता है। होली के बाद से मेरी पेंशन नहीं आई है। अब तक तीन बार चक्कर लगा चुकी हूं। मेरा कोई सहारा नहीं है। पहले छोटा-मोटा काम कर लेती थी लेकिन अब बीमार रहती हूं। कल भी तेज बुखार में तपती हुई आई थी। अधिकारियों ने कहा है कि 20 तारीख तक पेंशन आ जाएगी।
-शारदा देवी, भोजपुर।
मैं गोशाला रोड के पास अटल बगीचे से आई हूं। होली के बाद सिर्फ एक बार ही पेंशन आई थी, उसके बाद से लगातार पेंशन बंद है। साहब लोग भी स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रहे कि अभी और कितने दिन इंतजार करना होगा।
-नत्थू देवी, गोशाला रोड।
मेरी तो पिछले दो वर्ष से पेंशन ही नहीं आई है। जब बैंक जाती हूं तो किराये-भाड़े में ही पैसा चला जाता है। पिछली बार 700 रुपये लेकर गई थी। अब खाते में 450 रुपये ही बचे हैं। बैंक वाले कहते हैं कि सरकार की तरफ से ही पैसा नहीं आया। अब अधिकारियों के पास यही पूछने आई हूं कि दो वर्ष से पेंशन क्यों अटकी है।
-शांति देवी, भोजपुर।
34 हजार पेंशनार्थियों में से 10 हजार लोगों की अभी पेंशन नहीं आई है। शासन स्तर से ही पेंशन रुकी हुई है। इस मामले पत्राचार किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही सभी लाभार्थियों की पेंशन आ जाएगी।
-सीमा मौर्य, जिला प्रोबेशन अधिकारी।