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Hathras News: बड़े हादसों के बाद भी नहीं टूटी जिम्मेदारों की नींद
Sat, 19 Sep 2026 02:39 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sat, 19 Sep 2026 02:39 AM IST
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शहर में घूमते बंदर। संवाद
- फोटो : Samvad
खूंखार बंदरों के उत्पात से लगातार लोगों की जान जा रही है, लेकिन सिस्टम आंखें मूंदकर बैठा है। बंदरों पर नियंत्रण के लिए शासन को अंतरिम कार्ययोजना जारी किए हुए पांच महीने हो चुके हैं, लेकिन नगर निकायों से लेकर ग्राम पंचायतों तक बंदरों को पकड़ने व उनकी जनसंख्या को नियंत्रण करने के कोई इंतजाम नहीं हैं।
कूड़े के ढेर से लेकर घरों की छतों तक बंदरों का आतंक है। इस कारण इस साल अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, 16 लोग छत से गिरकर घायल हुए हैं, जबकि अब तक 5400 से अधिक लोगों को काटा है, जिन्हें एआरवी लगाई गई है।
दो अप्रैल 2026 को ही राज्य में मानव-बंदर संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए शासन ने एक अंतरिम कार्ययोजना लागू करते हुए सभी नगर निकायों को एक महीने के भीतर अपने क्षेत्रों में बंदरों के हॉटस्पॉट चिह्नित करने, हेल्पलाइन नंबर जारी करने और बंदरों को पकड़वाने की योजना बनाने का कड़ा निर्देश दिया गया था, लेकिन यह आदेश अभी तक फाइलों में दबा है।
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ये है निगरानी कमेटी
अभियान की निगरानी के लिए हर जिले में एक हाई-पावर कमेटी का गठन किया गया है। इसके अध्यक्ष डीएम हैं। इनके अलावा सदस्य-सचिव नगर पालिका परिषद के ईओ, सदस्यों में पुलिस आयुक्त द्वारा नामित प्रतिनिधि, प्रभागीय वनाधिकारी, मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी, जिला पंचायतराज अधिकारी, खंड विकास अधिकारी और डीएम द्वारा नामित वन्यजीव विशेषज्ञ एनजीओ हैं।
केस-1
फरवरी 2026 को हाथरस के सासनी क्षेत्र के गांव बांधनू में बंदरों के हमले में गुड्डी देवी (50) की मौत हो गई थी। छत पर बंदरों के एक झुंड ने उन पर अचानक हमला कर दिया। बंदरों को अपनी ओर आता देख गुड्डी देवी घबरा गईं और खुद को बचाने की कोशिश में उनका संतुलन बिगड़ गया। वह सीधे मुंह के बल नीचे पक्की सड़क पर जा गिरीं।
केस-2
सात अप्रैल 2026 को जलेसर रोड स्थित अक्रूर कॉलोनी में 18 वर्षीय युवती शिवानी को छत पर बंदरों के झुंड ने घुड़की दी। बंदरों के डर से भागते समय शिवानी का संतुलन बिगड़ गया और वह छत से सीधे नीचे जा गिरीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर का प्रस्ताव नव युग पालिका के अंतर्गत शासन को भेजा गया है। मंजूर होते ही इस पर काम शुरू होगा। बंदरों को पकड़ने के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है। टेंडर निकालकर बंदर पकड़ने वाली संस्था को जिम्मेदारी दी जाएगी। सीवेज फार्म की भूमि पर कपिवन भी प्रस्तावित है।
-रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका, हाथरस
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कूड़े के ढेर से लेकर घरों की छतों तक बंदरों का आतंक है। इस कारण इस साल अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, 16 लोग छत से गिरकर घायल हुए हैं, जबकि अब तक 5400 से अधिक लोगों को काटा है, जिन्हें एआरवी लगाई गई है।
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दो अप्रैल 2026 को ही राज्य में मानव-बंदर संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए शासन ने एक अंतरिम कार्ययोजना लागू करते हुए सभी नगर निकायों को एक महीने के भीतर अपने क्षेत्रों में बंदरों के हॉटस्पॉट चिह्नित करने, हेल्पलाइन नंबर जारी करने और बंदरों को पकड़वाने की योजना बनाने का कड़ा निर्देश दिया गया था, लेकिन यह आदेश अभी तक फाइलों में दबा है।
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ये है निगरानी कमेटी
अभियान की निगरानी के लिए हर जिले में एक हाई-पावर कमेटी का गठन किया गया है। इसके अध्यक्ष डीएम हैं। इनके अलावा सदस्य-सचिव नगर पालिका परिषद के ईओ, सदस्यों में पुलिस आयुक्त द्वारा नामित प्रतिनिधि, प्रभागीय वनाधिकारी, मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी, जिला पंचायतराज अधिकारी, खंड विकास अधिकारी और डीएम द्वारा नामित वन्यजीव विशेषज्ञ एनजीओ हैं।
केस-1
फरवरी 2026 को हाथरस के सासनी क्षेत्र के गांव बांधनू में बंदरों के हमले में गुड्डी देवी (50) की मौत हो गई थी। छत पर बंदरों के एक झुंड ने उन पर अचानक हमला कर दिया। बंदरों को अपनी ओर आता देख गुड्डी देवी घबरा गईं और खुद को बचाने की कोशिश में उनका संतुलन बिगड़ गया। वह सीधे मुंह के बल नीचे पक्की सड़क पर जा गिरीं।
केस-2
सात अप्रैल 2026 को जलेसर रोड स्थित अक्रूर कॉलोनी में 18 वर्षीय युवती शिवानी को छत पर बंदरों के झुंड ने घुड़की दी। बंदरों के डर से भागते समय शिवानी का संतुलन बिगड़ गया और वह छत से सीधे नीचे जा गिरीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर का प्रस्ताव नव युग पालिका के अंतर्गत शासन को भेजा गया है। मंजूर होते ही इस पर काम शुरू होगा। बंदरों को पकड़ने के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है। टेंडर निकालकर बंदर पकड़ने वाली संस्था को जिम्मेदारी दी जाएगी। सीवेज फार्म की भूमि पर कपिवन भी प्रस्तावित है।
-रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका, हाथरस