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पुरदिलनगर में एक महीने तक कराया था आचरेकर ने इलाज
Fri, 04 Jan 2019 12:08 AM IST
Mohd Rafeek
राकेश वार्ष्णेय
राकेश वार्ष्णेय
Published by: Mohd Rafeek
Updated Fri, 04 Jan 2019 12:08 AM IST
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पुरदिलनगर प्रवास के दौरान बच्चों के साथ 2013 में रमाकांत आचरेकर।
- फोटो : अमर उजाला
सिकंदराराऊ (हाथरस)। सचिन तेंदुलकर को तराशकर महान क्रिकेटर बनाने वाले क्रिकेट गुरु रमाकांत आचरेकर का सिकंदराराऊ तहसील के कस्बा पुरदिलनगर से भी पुराना नाता रहा है। लकवा की बीमारी के बाद वर्ष 2013 में वह इलाज के लिए पुरदिलनगर आए थे और करीब एक महीने तक यहां रहकर स्थानीय वैद्य भजनलाल से उन्होंने उपचार कराया था। इलाज के बाद उनकी बीमारी 80 फीसदी तक दूर हो गई थी। सिकंदराराऊ की डॉक्टर मिथलेश वार्ष्णेय ने समय-समय पर जाकर उनका चेक अप किया था।
कस्बा पुरदिलनगर निवासी रमनलाल गुप्ता के पुत्र पवन गुप्ता उफ पप्पू मुंबई आते-जाते रहते थे। वहां पर किसी तरह आचरेकर उनके संपर्क में आ गए। लकवे की बीमारी से परेशान अचरेकर को पप्पू ने पुरदिलगनर आकर वैद्य से आयुर्वेदिक तरीके इलाज कराने की सलाह दी। पहले 2013 में वह एक दिन के लिए पुरदिलगनर आए और वैद्य जी से अपना चेकअप कराया। वैद्य ने उन्हें यहां आकर रहने और लगातार इलाज कराने की सलाह दी। मई 2013 मे आचरेकर पुरदिलनगर आकर पप्पू के यहां रहकर अपना इलाज कराने लगे।
कस्बे के लोगों ने देखा कि आचरेकर बच्चों को बहुत प्यार करते थे। बीमारी की हालत में भी वे गली में क्रिकेट खेल रहे बच्चों के साथ घुल-मिल जाते थे और क्रिकेट खेलना सिखाते थे। इस दौरान उनका आयुर्वेदिक तरीके से इलाज तो चला, साथ ही मालिश भी होती थी। अमर उजाला से बातचीत में उस समय आचरेकर ने बताया था सचिन तेंदुलकर के अंदर प्रतिभा तो बहुत थी, लेकिन वह स्वभाव से काफी संकोची थे। वे उनका बहुत आदर करते थे। जब सचिन को उनकी बीमारी की पता लगी तो वे अपने व्यस्त समय में से समय निकालकर उनको देखने आते थे और कई बार एक एक लाख रुपया देकर उनकी आर्थिक मदद भी करते थे।
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कस्बा पुरदिलनगर निवासी रमनलाल गुप्ता के पुत्र पवन गुप्ता उफ पप्पू मुंबई आते-जाते रहते थे। वहां पर किसी तरह आचरेकर उनके संपर्क में आ गए। लकवे की बीमारी से परेशान अचरेकर को पप्पू ने पुरदिलगनर आकर वैद्य से आयुर्वेदिक तरीके इलाज कराने की सलाह दी। पहले 2013 में वह एक दिन के लिए पुरदिलगनर आए और वैद्य जी से अपना चेकअप कराया। वैद्य ने उन्हें यहां आकर रहने और लगातार इलाज कराने की सलाह दी। मई 2013 मे आचरेकर पुरदिलनगर आकर पप्पू के यहां रहकर अपना इलाज कराने लगे।
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कस्बे के लोगों ने देखा कि आचरेकर बच्चों को बहुत प्यार करते थे। बीमारी की हालत में भी वे गली में क्रिकेट खेल रहे बच्चों के साथ घुल-मिल जाते थे और क्रिकेट खेलना सिखाते थे। इस दौरान उनका आयुर्वेदिक तरीके से इलाज तो चला, साथ ही मालिश भी होती थी। अमर उजाला से बातचीत में उस समय आचरेकर ने बताया था सचिन तेंदुलकर के अंदर प्रतिभा तो बहुत थी, लेकिन वह स्वभाव से काफी संकोची थे। वे उनका बहुत आदर करते थे। जब सचिन को उनकी बीमारी की पता लगी तो वे अपने व्यस्त समय में से समय निकालकर उनको देखने आते थे और कई बार एक एक लाख रुपया देकर उनकी आर्थिक मदद भी करते थे।
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