दहेज हत्या में छह ससुरालियों को सजा
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हाथरस। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी राजकुमार बंसल के न्यायालय ने दहेज हत्या के मामले में मृतका के पति समेत पांच अन्य ससुरालियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आरोपी पति को 10 वर्ष का कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है, जबकि अन्य पांच ससुरालीजनों को सबूत मिटाने का दोषी मानते हुए तीन-तीन वर्ष के कारावास एवं पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक मृतका सीमा के पिता हुकुम सिंह का आरोप था कि दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर पति मान सिंह ने 27 मार्च, 2008 को साजिश के तहत खाद्य पदार्थ में कुछ जहरीला पदार्थ खिलाकर हत्या कर दी थी। इन लोगों ने पुलिस के साथ साठ-गांठ कर ली, जिससे उसके और उसके साथ गए लोगों के साथ मारपीट की गई तथा पुलिस के साथ सबूत नष्ट करने की नीयत से शव को जला दिया। पुलिस ने उसकी पत्नी और पुत्र को धमकाकर पंचनामा पर हस्ताक्षर करा लिए। पुलिस द्वारा रिपोर्ट दर्ज नहीं किए जाने के बाद पुलिस अधीक्षक को भी डाक से तहरीर भेजी गई। इसके बावजूद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इसके बाद न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया गया, जिससे न्यायालय के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज हुई। विवेचक ने जांच के बाद पति मान सिंह, गोपाली, बाबू उर्फ रामबाबू, महीपाल, हरिओम एवं किशनिया के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। न्यायालय ने पति मान सिंह को दहेज उत्पीड़न का दोषी माना और सभी में अलग-अलग सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा, जबकि अभियुक्त गोपाली, बाबू उर्फ रामबाबू, महीपाल, हरिओम एवं किशनिया को दोषी मानते हुए प्रत्येक को तीन-तीन साल का कारावास व पांच-पांच हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर इन्हें भी दो माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। वादी की ओर से पैरवी एडीजीसी साहब सिंह चौहान ने की।
न्यायालय ने पुलिस के खिलाफ की टिप्पणी हाथरस। एडीजे एफटीसी राजकुमार बंसल ने दहेज हत्या के इस मामले में पुलिस की लापरवाही पर तल्ख टिप्पणी की है। न्यायालय ने कहा है कि पुलिस द्वारा शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया जाना उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न चिह्न लगाता है। अभियुक्तों द्वारा अपराध किए जाने के साक्ष्य नष्ट किया जाना, जैसा कि साबित हुआ है, पुलिस की लापरवाही का द्योतक है।