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हेराफेरी में रिटायर्ड लेखपाल गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो सहपऊ। (हाथरस)।
Updated Sat, 09 Sep 2017 11:57 PM IST
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सादाबाद तहसील में जमीन के अभिलेखों में हेराफेरी करने के आरोपी एक सेवानिवृत्त लेखपाल को मेरठ पुलिस की एंटी करप्शन टीम ने गिरफ्तार किया है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने यह गिरफ्तारी आठ दिन पहले की थी। पुलिस अन्य आरोपियों की भी सरगर्मी से तलाश कर रही है।
बता दें कि मामला दिसंबर 2012 में सहपऊ कस्बे की जमींदारों की नॉन जेड ए की जमीन के फर्जी पट्टे का है। तत्कालीन तहसीलदार अखिल गुप्ता, सब रजिस्ट्रार कानूनगो सत्यवीर सिंह, लेखपाल/कानूनगो छत्रपाल सिंह पर आरोप है कि इन सभी ने कस्बा निवासी जमींदार गुलजारीलाल, राधाकृष्ण एवं सतीशचंद्र की नॉन जेड ए की जमीन सादा कागज पर फर्जी पट्टे बनाकर मृतक कस्बा निवासी मूलचंद्र वशिष्ठ एवं उनके पुत्र के नाम के कर दी। इसकी जानकारी जमींदार के वंशज ललित कुमार शाह को हुई तो उन्होंने एक शिकायती प्रार्थना पत्र एसडीएम सादाबाद को दिया।
जांच में शिकायत सही पाए जाने पर एसडीएम ने इनके पट्टे निरस्त कर दिए और तत्कालीन तहसीलदार वीरेंद्र कुमार शर्मा को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। इस मामले की विवेचना कई जगहों पर स्थानांतरित की गई। बाद में डीआईजी ने अलीगढ़ पुलिस के तत्कालीन सीओ तृतीय को विवेचना सौंपी। सीओ ने इन पांचों के खिलाफ कोतवाली सादाबाद पुलिस को चार्जशीट भेजी। चूंकि मामला राजकीय कार्य में भ्रष्टाचार से संबंधित है, इसलिए सादाबाद पुलिस ने इस मामले को करीब एक वर्ष बाद एंटी करप्शन कोर्ट मेरठ को यह चार्जशीट भेजी। बताते हैं कि न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए, जिसके आधार पर एंटी करप्शन की टीम ने रिटायर्ड लेखपाल को गिरफ्तार किया।
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एसडीएम सादाबाद जयप्रकाश का कहना है कि गैर जमानती वारंट जारी होने की जानकारी मुझे भी है, लेकिन गिरफ्तारी की जानकारी अभी मुझे नहीं है। मेरठ के शासकीय अधिवक्ता पराग सक्सेना ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि आरोपी रिटायर्ड लेखपाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि आरोपी ने कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया है।
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बता दें कि मामला दिसंबर 2012 में सहपऊ कस्बे की जमींदारों की नॉन जेड ए की जमीन के फर्जी पट्टे का है। तत्कालीन तहसीलदार अखिल गुप्ता, सब रजिस्ट्रार कानूनगो सत्यवीर सिंह, लेखपाल/कानूनगो छत्रपाल सिंह पर आरोप है कि इन सभी ने कस्बा निवासी जमींदार गुलजारीलाल, राधाकृष्ण एवं सतीशचंद्र की नॉन जेड ए की जमीन सादा कागज पर फर्जी पट्टे बनाकर मृतक कस्बा निवासी मूलचंद्र वशिष्ठ एवं उनके पुत्र के नाम के कर दी। इसकी जानकारी जमींदार के वंशज ललित कुमार शाह को हुई तो उन्होंने एक शिकायती प्रार्थना पत्र एसडीएम सादाबाद को दिया।
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जांच में शिकायत सही पाए जाने पर एसडीएम ने इनके पट्टे निरस्त कर दिए और तत्कालीन तहसीलदार वीरेंद्र कुमार शर्मा को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। इस मामले की विवेचना कई जगहों पर स्थानांतरित की गई। बाद में डीआईजी ने अलीगढ़ पुलिस के तत्कालीन सीओ तृतीय को विवेचना सौंपी। सीओ ने इन पांचों के खिलाफ कोतवाली सादाबाद पुलिस को चार्जशीट भेजी। चूंकि मामला राजकीय कार्य में भ्रष्टाचार से संबंधित है, इसलिए सादाबाद पुलिस ने इस मामले को करीब एक वर्ष बाद एंटी करप्शन कोर्ट मेरठ को यह चार्जशीट भेजी। बताते हैं कि न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए, जिसके आधार पर एंटी करप्शन की टीम ने रिटायर्ड लेखपाल को गिरफ्तार किया।
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एसडीएम सादाबाद जयप्रकाश का कहना है कि गैर जमानती वारंट जारी होने की जानकारी मुझे भी है, लेकिन गिरफ्तारी की जानकारी अभी मुझे नहीं है। मेरठ के शासकीय अधिवक्ता पराग सक्सेना ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि आरोपी रिटायर्ड लेखपाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि आरोपी ने कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया है।