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बेटे की खोज में जुटे पिता ने चलाई डेढ़ हजार किमी साइकिल

Sun, 03 Dec 2017 11:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस। Updated Sun, 03 Dec 2017 11:57 PM IST
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A man drive Cycle upto fifteen hundred Kilometers to Search his son
लापता बच्चे की तस्वीर दिखाते पिता सतीशचंद। - फोटो : amar ujala
जिले के सासनी थाना क्षेत्र के गांव द्वारिकापुर के रहने वाले 48 वर्षीय सतीश चंद्र अपने इकलौते दिव्यांग बेटे को खोजने के लिए शहर-शहर, गांव-गांव भटक रहे हैं। वह बेटे की खोज में अब तक डेढ़ हजार किलोमीटर का सफर साइकिल से तय कर चुके हैं। थाने की पुलिस ने उनकी रिपोर्ट तक नहीं लिखी पर रविवार को जब जिले के एसपी घुले सुशील को यह कहानी पता चली तो उनका दिल पसीज गया।
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एसपी ने एएसपी अरविंद कुमार को सतीश चंद्र के घर भेजा। उन्हें अपने आवास पर बुलाकर बेटे को खोजने का पूरा भरोसा दिलाया। एसपी ने कहा कि हाथरस पुलिस एनजीओ की मदद से देशभर में बच्चे की तलाश करेगी।
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सतीश ने बताया कि बीती 24 जून को उनका बेटा गोदना (11) स्कूल गया था लेकिन शाम तक घर नहीं लौटा। किसी ने बताया कि वह सासनी रेलवे स्टेशन गया है लेकिन वह वहां भी नहीं मिला। चार दिन खोजबीन करने के बाद 28 जून को वह सासनी पुलिस स्टेशन पहुंचे। पुलिस ने बच्चे की गुमशुदगी दर्ज नहीं की।
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सतीश चंद्र ने बताया कि उनकी आर्थिक हालत ठीक नहीं है इसलिए वह बेटे की खोजबीन में पैसा खर्च नहीं कर सकते थे, लिहाजा उन्होंने साइकिल से ही उसे इधर-उधर खोजना शुरू कर दिया और इस खोजबीन में वह एक शहर से दूसरे शहर चलते चले गए। रास्ते में मिले लोगों को बेटे की तस्वीर दिखाकर पूछताछ की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

सतीश चंद ने बताया कि वह दिल्ली से कानपुर और रेवाड़ी (हरियाणा) तक गए। इस बीच उन्होंने डेढ़ हजार किलोमीटर साइकिल चलाई। सतीश ने बताया कि गोदना उनकी एकलौती संतान है। सबसे बड़ी बेटी सरिता की मौत बीमारी से 12 साल पहले हो गई थी। उसकी मौत के बाद उनका नौ साल का बेटा भी छह साल पहले खत्म हो गया। पांच महीने की खोजबीन के बाद भी सतीश ने हिम्मत नहीं खोई है, उन्हें अपने बेटे के सकुशल मिलने की उम्मीद है। वे पुलिस टीम के साथ सोमवार को भरतपुर जाएंगे। 

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हम सभी जगह बच्चे का पता लगवाएंगे। इसके अलावा रेडियो और दूसरे साधनों का भी उपयोग किया जाएगा। ऐसी उम्मीद है कि दिव्यांग बच्चे के मिलने पर लोगों ने उसे किसी एनजीओ की मदद से किसी सेंटर में दाखिल कराया होगा। इसलिए देशभर के इस क्षेत्र में काम करने वाले एनजीओ से भी संपर्क किया जा रहा है। 
- घुले सुशील, एसपी

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