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न्यायालय ने मेला रिसीवर को नोटिस देकर मांगा जवाब
Updated Thu, 31 Aug 2017 12:11 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हाथरस।
जिलाधिकारी को बृज क्षेत्र के लक्खी मेला श्रीदाऊजी महाराज का रिसीवर नियुक्ति करने के निर्णय के खिलाफ अपर जिला जज द्वितीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय में बुधवार को सुनवाई हुई। इसमें सीआरपीसी के चार अधिवक्ताओं ने इस मामले में विधिक स्थिति न्यायालय के सामने रखी। चारों अधिवक्ताओं ने साफ किया कि जिला मजिस्ट्रेट को मेला का एक वर्ष के लिए रिसीवर नियुक्ति किया गया था।
इसके बाद कोई आदेश जारी नहीं हुआ, जबकि जिला मजिस्ट्रेट को मेला का रिसीवर बनाए जाने के साथ ही मेला के ठेके से प्राप्त धनराशि का विधिवत रूप से मेला समापन के बाद न्यायालय को आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत करने के भी आदेश दिए गए थे, लेकिन किसी ने भी अब तक आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत नहीं किया है। क्यों न इन सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 409 के तहत आरोपी मानते हुए एफआईआर दर्ज कराई जाए।
मेला के वाद में सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने कई कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डाला, जिनके आधार पर साफ था कि मेला श्रीदाऊजी महाराज जनता का मेला है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि यह मेला जनता का नहीं होकर सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों का बन जाता है, जो विधि के अनुसार न्याय संगत नहीं है। मेला रिसीवर के रूप में किसी भी राजस्व अधिकारी जिला मजिस्ट्रेट सहित किसी भी अधिकारी को उसी स्थिति में नियुक्त किया जा सकता है, जिससे कोई राजस्व प्राप्त होता हो।
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अधिवक्ताओं ने दावा किया कि मेला में रिसीवर तो जिला मजिस्ट्रेट बनता है, लेकिन इसकी व्यवस्थाओं का सारा संचालन अधीनस्थ एसडीएम, तहसीलदार एवं राजस्व कर्मी करते हैं। जो विधि के अनुसार सही नहीं हैं। मेला के विकास के लिए किसी भी प्रकार का कोई कार्य नहीं हो सका, जबकि मेला से होने वाली आय से इस क्षेत्र का विकास भी नहीं हुआ है।
अधिवक्ताओं को सुनने के बाद एडीजे द्वितीय एसएन त्रिपाठी ने जिला मजिस्ट्रेट को इस बारे में नोटिस दिया है, जिसमें कहा गया है कि मेला की रीति-नीति एवं न्यायालय के आदेशों के विपरीत आपके द्वारा किए गए मेला संचालन को देखते हुए क्यों नहीं आपको रिसीवर पद से हटा दिया जाय। इस संबंध में डीएम से अपना पक्ष भी प्रस्तुत करने को कहा गया है।
इसे देखते हुए डीजीसी सिविल और एडीजीसी जिलाधिकारी का पक्ष रखने के लिए प्रस्तुत तो हुए, लेकिन उन्होंने इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए एक दिन का समय मांगा। न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई गुरुवार को फिर सुबह 11 बजे से करने का निर्णय लिया है।
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हाथरस।
जिलाधिकारी को बृज क्षेत्र के लक्खी मेला श्रीदाऊजी महाराज का रिसीवर नियुक्ति करने के निर्णय के खिलाफ अपर जिला जज द्वितीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय में बुधवार को सुनवाई हुई। इसमें सीआरपीसी के चार अधिवक्ताओं ने इस मामले में विधिक स्थिति न्यायालय के सामने रखी। चारों अधिवक्ताओं ने साफ किया कि जिला मजिस्ट्रेट को मेला का एक वर्ष के लिए रिसीवर नियुक्ति किया गया था।
इसके बाद कोई आदेश जारी नहीं हुआ, जबकि जिला मजिस्ट्रेट को मेला का रिसीवर बनाए जाने के साथ ही मेला के ठेके से प्राप्त धनराशि का विधिवत रूप से मेला समापन के बाद न्यायालय को आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत करने के भी आदेश दिए गए थे, लेकिन किसी ने भी अब तक आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत नहीं किया है। क्यों न इन सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 409 के तहत आरोपी मानते हुए एफआईआर दर्ज कराई जाए।
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मेला के वाद में सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने कई कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डाला, जिनके आधार पर साफ था कि मेला श्रीदाऊजी महाराज जनता का मेला है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि यह मेला जनता का नहीं होकर सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों का बन जाता है, जो विधि के अनुसार न्याय संगत नहीं है। मेला रिसीवर के रूप में किसी भी राजस्व अधिकारी जिला मजिस्ट्रेट सहित किसी भी अधिकारी को उसी स्थिति में नियुक्त किया जा सकता है, जिससे कोई राजस्व प्राप्त होता हो।
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अधिवक्ताओं ने दावा किया कि मेला में रिसीवर तो जिला मजिस्ट्रेट बनता है, लेकिन इसकी व्यवस्थाओं का सारा संचालन अधीनस्थ एसडीएम, तहसीलदार एवं राजस्व कर्मी करते हैं। जो विधि के अनुसार सही नहीं हैं। मेला के विकास के लिए किसी भी प्रकार का कोई कार्य नहीं हो सका, जबकि मेला से होने वाली आय से इस क्षेत्र का विकास भी नहीं हुआ है।
अधिवक्ताओं को सुनने के बाद एडीजे द्वितीय एसएन त्रिपाठी ने जिला मजिस्ट्रेट को इस बारे में नोटिस दिया है, जिसमें कहा गया है कि मेला की रीति-नीति एवं न्यायालय के आदेशों के विपरीत आपके द्वारा किए गए मेला संचालन को देखते हुए क्यों नहीं आपको रिसीवर पद से हटा दिया जाय। इस संबंध में डीएम से अपना पक्ष भी प्रस्तुत करने को कहा गया है।
इसे देखते हुए डीजीसी सिविल और एडीजीसी जिलाधिकारी का पक्ष रखने के लिए प्रस्तुत तो हुए, लेकिन उन्होंने इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए एक दिन का समय मांगा। न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई गुरुवार को फिर सुबह 11 बजे से करने का निर्णय लिया है।