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Hardoi News: तीन दिन बाद चालू हुई एक्सरे मशीन, कतारों में हलकान रहे मरीज
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हरदोई। जिला मेडिकल कॉलेज में बीते तीन दिनों से प्रभावित चल रही एक्सरे व्यवस्था मंगलवार को बहाल तो हुई, लेकिन मरीजों की मुसीबतें कम नहीं हो सकीं। शनिवार को सही ढंग से मशीन काम नहीं कर पाई थी, इससे एक्सरे नहीं हो पाए थे, वहीं रविवार को अवकाश और सोमवार बिजली न होने से मरीजों की संख्या बढ़ गई। लंबित जांच कराने के लिए मरीज और उनके तीमारदार की अपनी बारी के लिए लंबी कतार में इंतजार करते नजर आए।
मेडिकल कॉलेज में एक्सरे की व्यवस्था में फिलहाल सुधार होते नजर नहीं आ रहा है। मुख्य डिजिटल मशीन बीते एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी नहीं बन पाई है। वहीं, 100 एमए की अधिक क्षमता की मशीन को भी नहीं बनवाया जा रहा है। ऐसे में 50 एमए की मशीन से एक्सरे हो रहे हैं। जिसमें एक बार में सिर्फ 25 से 30 एक्सरे हो पाते हैं और इसके बाद मशीन इरर बताकर बंद हो जाती है।
करीब आधा से पौन घंटे के बाद ही मशीन काम कर पाती है। बता दें, कि शनिवार तक मशीन से इमरजेंसी और आईपीडी में भर्ती मरीजों को प्राथमिकता दी जा रही थी और मरीजों को लौटाया जा रहा था। रविवार को अवकाश हो गया और सोमवार को बिजली नहीं आई। ऐसे में जांच प्रभावित होने के बाद मंगलवार को बड़ी संख्या में मरीज लंबित एक्सरे कराने पहुंच गए। कक्ष के बाहर सुबह से ही मरीजों और तीमारदारों की कतार लगी रही। गंभीर मरीजों के साथ बुजुर्ग और दूरदराज से आए लोग भी अपनी बारी के इंतजार में परेशान नजर आए।
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पहले सवा दस फिर 12 बजे पौन घंटा बंद रही मशीन
एक्सरे की 50 एमए की पोर्टेबल मशीन में एक बार में सिर्फ 25 से 30 एक्सरे होते हैं। इसके बाद मशीन गर्म होकर बंद हो जाती है। वैसे तो एक्सरे 24 घंटे होते हैं लेकिन मंगलवार को आठ बजे से भीड़ बढ़नी शुरू हो गई। करीब 40 एक्सरे होने के बाद सवा 10 बजे मशीन बंद हो गई। इसके आधा घंटे बाद मशीन फिर चलाई गई और फिर वह 12:10 बजे बंद हो गई। मौसम भी गर्म हो गया तो इस दौरान मशीन एक बजे चली। दोपहर दो बजे तक 80 मरीजों के एक्सरे किए जा चुके थे।
कार्यदायी संस्था के अधिकारियों से बात हुई है। मशीन के कुछ पार्ट्स रह गए हैं। निर्देशित किया जा चुका है पार्ट्स और अभियंता आते ही मशीन को दुरुस्त करवा कर संचालित कर दिया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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मेडिकल कॉलेज में एक्सरे की व्यवस्था में फिलहाल सुधार होते नजर नहीं आ रहा है। मुख्य डिजिटल मशीन बीते एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी नहीं बन पाई है। वहीं, 100 एमए की अधिक क्षमता की मशीन को भी नहीं बनवाया जा रहा है। ऐसे में 50 एमए की मशीन से एक्सरे हो रहे हैं। जिसमें एक बार में सिर्फ 25 से 30 एक्सरे हो पाते हैं और इसके बाद मशीन इरर बताकर बंद हो जाती है।
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करीब आधा से पौन घंटे के बाद ही मशीन काम कर पाती है। बता दें, कि शनिवार तक मशीन से इमरजेंसी और आईपीडी में भर्ती मरीजों को प्राथमिकता दी जा रही थी और मरीजों को लौटाया जा रहा था। रविवार को अवकाश हो गया और सोमवार को बिजली नहीं आई। ऐसे में जांच प्रभावित होने के बाद मंगलवार को बड़ी संख्या में मरीज लंबित एक्सरे कराने पहुंच गए। कक्ष के बाहर सुबह से ही मरीजों और तीमारदारों की कतार लगी रही। गंभीर मरीजों के साथ बुजुर्ग और दूरदराज से आए लोग भी अपनी बारी के इंतजार में परेशान नजर आए।
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पहले सवा दस फिर 12 बजे पौन घंटा बंद रही मशीन
एक्सरे की 50 एमए की पोर्टेबल मशीन में एक बार में सिर्फ 25 से 30 एक्सरे होते हैं। इसके बाद मशीन गर्म होकर बंद हो जाती है। वैसे तो एक्सरे 24 घंटे होते हैं लेकिन मंगलवार को आठ बजे से भीड़ बढ़नी शुरू हो गई। करीब 40 एक्सरे होने के बाद सवा 10 बजे मशीन बंद हो गई। इसके आधा घंटे बाद मशीन फिर चलाई गई और फिर वह 12:10 बजे बंद हो गई। मौसम भी गर्म हो गया तो इस दौरान मशीन एक बजे चली। दोपहर दो बजे तक 80 मरीजों के एक्सरे किए जा चुके थे।
कार्यदायी संस्था के अधिकारियों से बात हुई है। मशीन के कुछ पार्ट्स रह गए हैं। निर्देशित किया जा चुका है पार्ट्स और अभियंता आते ही मशीन को दुरुस्त करवा कर संचालित कर दिया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य