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मास्क की अनुपलब्धता से वोट प्रतिशत संक्रमित

Wed, 23 Feb 2022 11:01 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 23 Feb 2022 11:01 PM IST
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Vote percentage infected due to non-availability of masks
हरदोई। सौ दिन चले अढ़ाई कोस...। तमाम जागरुकता अभियान और वोटिंग बढ़ाने की लंबी कवायद के बाद एक छोटी सी लापरवाही वोट प्रतिशत पर भारी पड़ गई।
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निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक, प्रत्येक मतदाता को मास्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था बूथों पर होनी थी, लेकिन जिले के किसी भी बूथ पर पर्याप्त मास्क उपलब्ध नहीं कराए गए।
कहीं 50 तो कहीं 30 मास्क देकर कोरम पूरा किया गया, लेकिन मतदान के लिए मास्क की अनिवार्यता सभी जगह रही। लिहाजा, झड़प और नाराजगी के बाद मतदाता बिना वोट डाले ही बूथों से लौटते रहे।
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छोटी सी लापरवाही से बड़े आयोजनों के प्रबंधन किस तरह धड़ाम हो जाते हैं, इसका उदाहरण विधानसभा निर्वाचन के दौरान जिले में देखने को मिला। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिहाज से चुनाव आयोग ने प्रत्येक मतदाता के लिए मास्क की अनिवार्यता निर्धारित की थी।
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जिले के सभी दो हजार 114 मतदान केंद्रों के तीन हजार 501 बूथों पर प्रत्येक मतदाता के लिए निर्वाचन विभाग की ओर से मास्क की व्यवस्था की जानी थी।
बूथ पर मतदाताओं का प्रवेश और मतदान बिना मास्क निषेध रहा। मास्क के साथ प्रवेश की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए बूथों के गेट पर हेल्प डेस्क बनाई गई, लेकिन हेल्प डेस्क पर वोटरों के लिए मास्क उपलब्ध नहीं थे।
जानकारी की गई तो पता चला कि किसी बूथ पर 50 मास्क ही उपलब्ध कराए गए थे, जो कुछ ही समय में खत्म हो गए। इसके बाद बिना मास्क आ रहे वोटरों को वोट डालने से रोका जाने लगा।
कुछ मतदाताओं ने समझदारी दिखाते हुए अपने रुमाल, पल्लू या मफलर से मुंह ढककर वोट कर लिया, लेकिन कई मतदाता मास्क के लिए कार्मिकों से भिड़ गए। झड़प और नाराजगी की वजह से उनका मन खराब हुआ तो बिना वोट डाले ही बूथ से लौट गए।
मास्क न मिलने से वोटरों ने जताई नाराजगी
बूथों पर मास्क न होने की खबरें पूरे मतदान के समय सुर्खियों में छाई रहीं। इन्हीं में से उनौती गांव में उच्च प्राथमिक विद्यालय के बूथ संख्या 375 व 376 पर वोटरों की नाराजगी भी सुर्खी बनीं।
दिलीप कुमार, पंकज, सुरेश समेत आधा दर्जन वोटरों ने बूथ पर मास्क न होने पर नाराजगी जताई। कहा कि न मास्क दे रहे और न ही बिना मास्क वोट डालने दे रहे। लिहाजा, वह सभी बिना वोट डाले ही लौट रहे हैं।
बूथ की हेल्प डेस्क पर मौजूद आशा बहू सुनीता सिंह ने बताया कि उन्हें केवल 50 मास्क मुहैया कराए गए थे, जो खत्म हो गए हैं। यही हालात बहोरवा गांव के बूथ संख्या 282 और 283 पर भी रहे। मास्क उपलब्ध न होने की वजह से कई मतदाता बिना वोट डाले लौट गए।
किसी ने छोड़ा मोबाइल, किसी ने मतदान
मोबाइल लेकर बूथों पर आए मतदाता वोट डालने से वंचित रह गए। यह हालात जिले के ज्यादातर बूथों पर देखने को मिले। मोबाइल की आदत की वजह से लगभग हर बूथ पर कुछ मतदाता घरों से मोबाइल लेकर आए।
आयोग की गाइडलाइन व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें बैरंग लौटा दिया गया। लिहाजा वोट की चोट करने या तो वह मोबाइल घर छोड़कर दोबारा बूथ पर लौटे या फिर बिना वोट दिए घर लौट गए।
दो पर त्रिकोणीय, छह पर सीधी टक्कर
हरदोई। विधानसभा चुनाव के चौथे चरण में शामिल जिले में बुधवार को सभी आठ सीटों पर सत्तादल भाजपा को कांटे के मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है। दो सीटों पर त्रिकोणीय, तो छह सीटों पर सपा और भाजपा के बीच मुकाबला है।
इन छह सीटों में एक सीट पर बड़े चेहरे का जादू चलता दिखाई दिया। नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों के साझा रुझानों मेें मुकाबले काफी करीब होने का अहसास कराने वाले रहेेेे।
जिले की आठों विधानसभा सीटों में हरदोई सदर, सवायजपुर, शाहाबाद, संडीला, मल्लावां-बिलग्राम समान्य सीटें हैं तो बालामऊ, गोपामऊ और सांडी सीटें सुरक्षित हैं।
गत विधान सभा चुनावों में भाजपा ने जिले में हरदोई सदर को छोड़कर सभी सीटों पर फतेह हासिल की थी।
जिले की सभी आठों सीटों पर चुनाव में जीत हासिल करने की लालसा में बीजेपी ने सदर सीट से विधायक नितिन अग्रवाल को पार्टी में शामिल कर चुनाव लड़ाया, जबकि जातीय समीकरणों के मद्देनजर संडीला से नए प्रत्याशी के रूप में अलका अंर्कवंशी को चुनाव लड़ाया।
शेष सभी सीटों पर सिटिंग विधायकों को चुनाव लड़ाया, जबकि सपा ने ज्यादातर सीटों पर पुराने एवं दिग्गज लोगों को चुनाव लड़ाया है।
बसपा ने दो सीटों पर पुराने दिग्गजों को चुनाव लड़ाया, जबकि शेष पर नए चेहरों पर भरोसा किया, जबकि कांग्रेस ने अधिकतर नए चेहरों को मैदान में उतारा है।
बुधवार को हुए मतदान से मिले रुझानों के अनुसार जिले की दो सीटों पर मुकाबला बसपा, भाजपा, सपा के बीच हुआ है, तो शेष छह सीटों पर भाजपा एवं सपा के बीच संग्राम हुआ है।
इनमें एक सीट पर भाजपा को प्रथम दृष्टया बढ़त के रुझान बताए गए। नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों के साझा रुझानों में लोगों ने महासंग्राम के होने का अहसास कराया।
चुनाव के इस संग्राम में किसका क्या हुआ अंजाम इसके परिणाम वोटराें ने ईवीएम में लॉक कर दिए हैं और मतगणना के बाद उनका निर्णय सामने आएा। फिलहाल सियासी पंडित अपने हिसाब से जीत हार के अनुमान लगाने शुरू कर दिए हैं।
लोगों ने हमेशा साथ निभाया है : नरेश
हरदोई। पूर्व सांसद और भाजपा नेता नरेश अग्रवाल ने अपने गृह जनपद में वोट डाला। सुबह करीब 11 बजे वोट डालने के बाद मीडिया से रूबरू नरेश ने एक सवाल के जवाब में कहा कि पांच दशकों की राजनीति में उनके रिश्तों की डोर की छोर बढ़ती जा रही है।
उनके साथ के लोगों के पौत्र एवं प्रपोत्र तक का राजनीतिक सफर बेहद शानदार एवं सुखदायी है। वह अति आत्मविश्वास में कभी नहीं रहते, लेकिन जो कहते हैं वो अपने जिले के लोगों से वर्षों पुराने रिश्तों के भरोसे कहते हैं।

कहा कि बेटा नितिन अग्रवाल चौथी बार बड़े मतों से चुनाव जीत दर्ज करने जा रहा है। जिले के लोगों ने हमेशा साथ निभाया है। इस बार भी लोग हमेशा की तरह हमारे साथ हैं।
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