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दो अफसरों को सौंपी गई जांच
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Fri, 01 May 2015 11:57 PM IST
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जिले के मल्लावां क्षेत्र के बीकापुर गांव में चीनी
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मिल स्थापना को 24 साल पहले किसानों से 300 बीघा जमीन अधिग्रहीत की गई भूमि
का मामला अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद डीएम रमेश मिश्रा के तेवर
मामले को लेकर कड़क हो गए हैं। उन्होंने शुक्रवार को जिला गन्ना अधिकारी
एवं एसडीएम बिलग्राम को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
डीएम ने कहा कि जांच के बाद अधिग्रहीत भूमि को वापस लेने की कार्रवाई की दिशा में भी आवश्यक जांच की जाए, ताकि किसानों के हित प्रभावित न हो पाएं। ज्ञात हो कि 22 अप्रैल के अंक में अमर उजाला द्वारा इस मामले में खबर ‘न नौकरी मिली न ही मुआवजा’ शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी।
छपी इस खबर के संज्ञान में आने के बाद शुक्रवार को डीएम ने तेवर कड़क कर दिए। उन्होंने इस ओर कार्रवाई के लिए हर स्तर पर जांच कराने की बात कही है। डीएम ने कंपनी से भूमि वापस लेने की कार्रवाई हेतु सभी तथ्यों पर गौर कर जांच करने के निर्देश दिए हैं।
ज्ञात हो कि मल्लावां विकास खंड में वर्ष 1991 में एक कंपनी की ओर से बीकापुर गांव पहुंचे कंपनी के कारिंदों ने ग्रामीणोें को चीनी मिल का सपना दिखाते हुए कहा कि उन्हें जमीन मुहैया कराने पर वह भूमि देने वाले किसान के परिवार को नौकरी भी देंगे।
इस पर आस पास के गांव बरौना, बारापुर, बीकापुर, राघौरामपुर और नेवादा गांव के किसानों ने अपने खेतों से थोड़ी-थोेड़ी जमीन चीनी मिल के लिए देने पर सहमति जताई। करीब 284 किसानों की 300 बीघा जमीन अधिग्रहीत करने के बाद कंपनी के अफसरों ने इस जमीन पर बाउंड्रीवाल बनाकर अपना बोर्ड भी लगा दिया था।
इसके बावजूद मिल का निर्माण नहीं किया। बीते विधानसभा चुनाव के दौरान जब यह मुद्दा फिर गूंजा जो कंपनी की ओर से कुछ पुरानी मशीनेें ग्राउंड पर डलवा दी गईं। इसकी देखभाल के लिए सुरक्षा गार्ड भी तैनात किए गए, इससे किसानों को मिल खुलने को लेकर कुछ उम्मीदें फिर बंधी, पर बीते माह रातों रात यह पुरानी मशीनें व गार्ड भी यहां से लापता हो गए। इससे किसान अपने को अब ठगा महसूस कर रहे हैं।
इस बाबत जिलाधिकारी रमेश मिश्रा ने कहा कि मामले की जांच के निर्देश दिए गए है। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन से आवश्यक दिशा निर्देश प्राप्त करने के बाद भूमि वापसी की कार्रवाई की जा सकती है।
डीएम ने कहा कि जांच के बाद अधिग्रहीत भूमि को वापस लेने की कार्रवाई की दिशा में भी आवश्यक जांच की जाए, ताकि किसानों के हित प्रभावित न हो पाएं। ज्ञात हो कि 22 अप्रैल के अंक में अमर उजाला द्वारा इस मामले में खबर ‘न नौकरी मिली न ही मुआवजा’ शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी।
छपी इस खबर के संज्ञान में आने के बाद शुक्रवार को डीएम ने तेवर कड़क कर दिए। उन्होंने इस ओर कार्रवाई के लिए हर स्तर पर जांच कराने की बात कही है। डीएम ने कंपनी से भूमि वापस लेने की कार्रवाई हेतु सभी तथ्यों पर गौर कर जांच करने के निर्देश दिए हैं।
ज्ञात हो कि मल्लावां विकास खंड में वर्ष 1991 में एक कंपनी की ओर से बीकापुर गांव पहुंचे कंपनी के कारिंदों ने ग्रामीणोें को चीनी मिल का सपना दिखाते हुए कहा कि उन्हें जमीन मुहैया कराने पर वह भूमि देने वाले किसान के परिवार को नौकरी भी देंगे।
इस पर आस पास के गांव बरौना, बारापुर, बीकापुर, राघौरामपुर और नेवादा गांव के किसानों ने अपने खेतों से थोड़ी-थोेड़ी जमीन चीनी मिल के लिए देने पर सहमति जताई। करीब 284 किसानों की 300 बीघा जमीन अधिग्रहीत करने के बाद कंपनी के अफसरों ने इस जमीन पर बाउंड्रीवाल बनाकर अपना बोर्ड भी लगा दिया था।
इसके बावजूद मिल का निर्माण नहीं किया। बीते विधानसभा चुनाव के दौरान जब यह मुद्दा फिर गूंजा जो कंपनी की ओर से कुछ पुरानी मशीनेें ग्राउंड पर डलवा दी गईं। इसकी देखभाल के लिए सुरक्षा गार्ड भी तैनात किए गए, इससे किसानों को मिल खुलने को लेकर कुछ उम्मीदें फिर बंधी, पर बीते माह रातों रात यह पुरानी मशीनें व गार्ड भी यहां से लापता हो गए। इससे किसान अपने को अब ठगा महसूस कर रहे हैं।
इस बाबत जिलाधिकारी रमेश मिश्रा ने कहा कि मामले की जांच के निर्देश दिए गए है। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन से आवश्यक दिशा निर्देश प्राप्त करने के बाद भूमि वापसी की कार्रवाई की जा सकती है।