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Hardoi News: पांच साल से भर्ती नहीं, हरदोई में घट गए 268 पीआरडी जवान
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हरदोई। सरकारी विभागों में ड्यूटी की मांग बढ़ रही है लेकिन पीआरडी स्वयंसेवकों की संख्या लगातार घटती जा रही है। जिले में करीब पांच साल से पीआरडी स्वयंसेवकों की नई भर्ती नहीं हुई है।
वर्ष 2021 में हुई भर्ती के बाद से सेवानिवृत्ति समेत अन्य कारणों से इनकी संख्या करीब 890 से घटकर अब 622 रह गई है। ऐसे में विभिन्न विभागों से मांग आने के बावजूद पर्याप्त संख्या में पीआरडी जवान उपलब्ध कराना चुनौती बन रहा है। बता दें कि पीआरडी स्वयंसेवकों की ड्यूटी शिक्षा विभाग के विद्यालयों, पॉलिटेक्निक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, पीएमश्री विद्यालयों समेत कई अन्य सरकारी संस्थानों में लगाई जाती है। जरूरत के हिसाब से प्रशासन और अन्य विभाग भी इनकी सेवाएं लेते हैं।
ड्यूटी के एवज में स्वयंसेवकों को प्रतिदिन करीब 500 रुपये मानदेय दिया जाता है। विभाग के अनुसार पांच साल पहले जिले में 890 पीआरडी स्वयंसेवक थे। इसके बाद लगातार सेवानिवृत्ति और अन्य कारणों से संख्या कम होती गई लेकिन नई भर्ती न होने से रिक्तियां नहीं भर सकीं। अब इनमें 268 स्वयंसेवक कम हो चुके हैं। वहीं दूसरी ओर जिले में युवक मंगल दल और महिला मंगल दलों की संख्या पिछले साल करीब 1600 के आसपास थी जो अब बढ़कर करीब 2000 हो गई है।
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विभागों से आती है मांग, जवान कम
विभिन्न विभागों और संस्थानों से पीआरडी जवानों की ड्यूटी के लिए मांग आती रहती है। उपलब्ध संख्या के अनुसार ही स्वयंसेवकों को अलग-अलग स्थानों पर ड्यूटी दी जाती है। लंबे समय से भर्ती न होने के कारण आने वाले समय में स्वयंसेवकों की कमी और बढ़ने की आशंका है। -नितिन कुमार यादव, क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी
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वर्ष 2021 में हुई भर्ती के बाद से सेवानिवृत्ति समेत अन्य कारणों से इनकी संख्या करीब 890 से घटकर अब 622 रह गई है। ऐसे में विभिन्न विभागों से मांग आने के बावजूद पर्याप्त संख्या में पीआरडी जवान उपलब्ध कराना चुनौती बन रहा है। बता दें कि पीआरडी स्वयंसेवकों की ड्यूटी शिक्षा विभाग के विद्यालयों, पॉलिटेक्निक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, पीएमश्री विद्यालयों समेत कई अन्य सरकारी संस्थानों में लगाई जाती है। जरूरत के हिसाब से प्रशासन और अन्य विभाग भी इनकी सेवाएं लेते हैं।
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ड्यूटी के एवज में स्वयंसेवकों को प्रतिदिन करीब 500 रुपये मानदेय दिया जाता है। विभाग के अनुसार पांच साल पहले जिले में 890 पीआरडी स्वयंसेवक थे। इसके बाद लगातार सेवानिवृत्ति और अन्य कारणों से संख्या कम होती गई लेकिन नई भर्ती न होने से रिक्तियां नहीं भर सकीं। अब इनमें 268 स्वयंसेवक कम हो चुके हैं। वहीं दूसरी ओर जिले में युवक मंगल दल और महिला मंगल दलों की संख्या पिछले साल करीब 1600 के आसपास थी जो अब बढ़कर करीब 2000 हो गई है।
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विभागों से आती है मांग, जवान कम
विभिन्न विभागों और संस्थानों से पीआरडी जवानों की ड्यूटी के लिए मांग आती रहती है। उपलब्ध संख्या के अनुसार ही स्वयंसेवकों को अलग-अलग स्थानों पर ड्यूटी दी जाती है। लंबे समय से भर्ती न होने के कारण आने वाले समय में स्वयंसेवकों की कमी और बढ़ने की आशंका है। -नितिन कुमार यादव, क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी