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दो ब्लाक हुए सेमी क्रिटिकल
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Mon, 29 Jun 2015 12:14 AM IST
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जिसका सभी को भय था। भूगर्भ जल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पूरे जिले में
चार से छह फिट नीचे पानी खिसका है और तो और सूखे की आशंका ही कहेंगे कि
जिले के दो ब्लाकों को सेमी क्रिटिकल भी घोषित कर दिया गया है।
विभागीय जिम्मेदारों का कहना है कि यह बहुत अच्छे संकेत जिले के नहीं हैं, यदि बहुत अच्छी बारिश अब भी न हुई तो जिले की 40 लाख आबादी को इस साल सूखे का भी दंश झेलना पड़ सकता है। भूगर्भ जल विभाग का मानना है कि जिले की संपूर्ण आबादी के पास सिर्फ 25 हजार 286 हेक्टोमीटर पानी शेष बचा है।
अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता कि शेष बचा जल कितने दिन तक 40 लाख प्यासे कंठ की प्यास बुझाएगा। भूगर्भ जल विभाग के आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो पता चलता है कि लगातार गिरते जा रहे भूगर्भ जल स्तर को देखने के बाद जिले के दो ब्लाकाें को अबकी सेमी क्रिटकल क ी श्रेणी में डाल दिया गया है।
इनमें अहिरोरी व हरपालपुर ब्लाकों को शामिल किया गया है, जबकि इन ब्लाकों को सुरक्षित श्रेणी में लाने को करोड़ों की योजना का प्रस्ताव भी बनाकर भेजा गया है। भूगर्भ जल विभाग के एई एके सारस्वत का कहना है कि हाइड्रोग्राफ स्टेशन से जो जल स्तर के परिणाम आए हैं जिले के लिए फिलहाल बेहतर संकेत नहीं हैं।
बताया कि इस वर्ष मई माह का मापन है। उसके बाद बारिश हुई ही नहीं, जिसके बाद जल स्तर और भी अधिक नीचे आ चुका होगा, जिससे पिछले साल की अपेक्षा इस बार की स्थितियां दयनीय हैं। बारिश होना अत्यंत जरूरी है। कहा कि यदि भूमि की जरूरत के हिसाब से बारिश न हुई तब भी विकराल स्थिति जिले के सामने उत्पन्न हो सकती है।
फिलहाल सब कुछ अभी भी मानसून और बारिश की स्थितियाें पर टिका हुआ है। उधर, शाहाबाद में भी पानी की स्थिति काफी गंभीर है। यहां भी पानी काफी नीचे खिसक गया है और हैंडपंपों व तालाब आदि से काफी दूरी बना ली है। जल स्तर पिछले साल की अपेक्षा अधिकतम सवा तीन फिट से कहीं ज्यादा नीचे गिर गया है।
महुआ टोला में जल स्तर 7.75, हरई तिगावां में 8.60, मियापुर 5.24, कल्लू नगला 5.85, किलकिली में 5.25 मीटर जल स्तर रह गया है। इसी तरह जिले में टोडरपुर का हाल भी कुछ ऐसा ही है। यहां भी जल स्तर काफी नीचे खिसक चुका है। टोडरपुर ब्लाक के टोडरपुर में 2.73, कोठिला में 3.02, शिरोमन नगर में 3.96, आलमनगर में 3.70 एवं कुम्हरूआ में 3.95 मीटर रह गया है। यहां भी लोगों को पानी को जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
विभागीय जिम्मेदारों का कहना है कि यह बहुत अच्छे संकेत जिले के नहीं हैं, यदि बहुत अच्छी बारिश अब भी न हुई तो जिले की 40 लाख आबादी को इस साल सूखे का भी दंश झेलना पड़ सकता है। भूगर्भ जल विभाग का मानना है कि जिले की संपूर्ण आबादी के पास सिर्फ 25 हजार 286 हेक्टोमीटर पानी शेष बचा है।
अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता कि शेष बचा जल कितने दिन तक 40 लाख प्यासे कंठ की प्यास बुझाएगा। भूगर्भ जल विभाग के आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो पता चलता है कि लगातार गिरते जा रहे भूगर्भ जल स्तर को देखने के बाद जिले के दो ब्लाकाें को अबकी सेमी क्रिटकल क ी श्रेणी में डाल दिया गया है।
इनमें अहिरोरी व हरपालपुर ब्लाकों को शामिल किया गया है, जबकि इन ब्लाकों को सुरक्षित श्रेणी में लाने को करोड़ों की योजना का प्रस्ताव भी बनाकर भेजा गया है। भूगर्भ जल विभाग के एई एके सारस्वत का कहना है कि हाइड्रोग्राफ स्टेशन से जो जल स्तर के परिणाम आए हैं जिले के लिए फिलहाल बेहतर संकेत नहीं हैं।
बताया कि इस वर्ष मई माह का मापन है। उसके बाद बारिश हुई ही नहीं, जिसके बाद जल स्तर और भी अधिक नीचे आ चुका होगा, जिससे पिछले साल की अपेक्षा इस बार की स्थितियां दयनीय हैं। बारिश होना अत्यंत जरूरी है। कहा कि यदि भूमि की जरूरत के हिसाब से बारिश न हुई तब भी विकराल स्थिति जिले के सामने उत्पन्न हो सकती है।
फिलहाल सब कुछ अभी भी मानसून और बारिश की स्थितियाें पर टिका हुआ है। उधर, शाहाबाद में भी पानी की स्थिति काफी गंभीर है। यहां भी पानी काफी नीचे खिसक गया है और हैंडपंपों व तालाब आदि से काफी दूरी बना ली है। जल स्तर पिछले साल की अपेक्षा अधिकतम सवा तीन फिट से कहीं ज्यादा नीचे गिर गया है।
महुआ टोला में जल स्तर 7.75, हरई तिगावां में 8.60, मियापुर 5.24, कल्लू नगला 5.85, किलकिली में 5.25 मीटर जल स्तर रह गया है। इसी तरह जिले में टोडरपुर का हाल भी कुछ ऐसा ही है। यहां भी जल स्तर काफी नीचे खिसक चुका है। टोडरपुर ब्लाक के टोडरपुर में 2.73, कोठिला में 3.02, शिरोमन नगर में 3.96, आलमनगर में 3.70 एवं कुम्हरूआ में 3.95 मीटर रह गया है। यहां भी लोगों को पानी को जद्दोजहद करनी पड़ रही है।