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Hardoi News: पोर्टल हैक कर फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने में तीन गिरफ्तार
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पुलिस गिरफ्त में आरोपी धर्मेंद्र, रूपेश और अभिषेक।
हरदोई। सरकारी रिकॉर्ड की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सीआरएस पोर्टल हैक कर 742 फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार करने वाले एक बड़े गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
आरोपी युवक बिहार के सहरसा, यूपी के लखनऊ और कुशीनगर के रहने वाले हैं। पूछताछ में इन आरोपियों ने अब तक 30 से 35 फर्जी प्रमाणपत्र बनाए जाने की बात स्वीकार की है। हालांकि, पुलिस अभी इनके साथियों की तलाश में जुटी है। गिरफ्तारी बेनीगंज और टड़ियावां पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में हुई।
दरअसल, चार जुलाई को ग्राम विकास अधिकारी राजीव श्रीवास्तव ने टड़ियावां थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि किसी ने सीआरएस पोर्टल की आईडी हैक कर बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाणपत्र जारी कर दिए हैं। जांच में खुलासा हुआ कि टड़ियावां ब्लॉक की ग्राम पंचायत रावल और अलीशाबाद से दिसंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच ये प्रमाणपत्र जारी किए गए थे।
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एसपी नीरज कुमार जादौन ने सीओ हरियावां अजीत चौहान के नेतृत्व में एक टीम गठित की थी। शुक्रवार को उन्होंने बताया कि लखनऊ के सहादतगंज थाना क्षेत्र के नौबस्ता निवासी अभिषेक गुप्ता, कुशीनगर के सेवरही थाना क्षेत्र के धुरिया इमलिया निवासी धर्मेंद्र मद्धेशिया और बिहार के सहरसा जनपद के मोहल्ला डीबी रोड निवासी रूपेश कुमार को गिरफ्तार किया है।
इनके पास से चार फर्जी प्रमाणपत्र, चार मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और सीआरएस पोर्टल की यूजर आईडी-पासवर्ड की फोटो कॉपी बरामद हुई है। तीनों को जेल भेजा गया है। अभिषेक पर पहले से ही उन्नाव में आईटी एक्ट का एक केस दर्ज है।
ऐसे देते थे घटना को अंजाम
- सीआरएस वेबसाइड गूगल से खोलते थे।
- सीआरएस डेसबोर्ड में बर्थ और डेथ विंडो लॉगिन करते थे।
- फॉरगेट पॉसवर्ड पर क्लिक करते थे। पासवर्ड को फॉरगेट कर लिंकमेल आईडी दिखाई देती है।
- देखते थे लिंक मेल आईडी क्रिएट है या नहीं।
- आईडी पहले से क्रिएट नहीं है तो इस आईडी को जीमेल पर जाकर बना लिया जाता है।
- फिर मेल पर पासवर्ड बदलने का लिंक आता है। इससे पासवर्ड बदल लिया जाता है।
- अब दोबारा लॉगिन पेज पर जाकर आईडी और पासवर्ड डालकर लॉगिन कर लिया गया।
- इसके बाद ओटीपी ईमेल और माेबाइल फोन नंबर दोनों पर जाता है।
- ईमेल आईडी पर आए ओटीपी की मदद से पोर्टल पर लाॅगइन कर प्रमाण पत्र बना देते हैं।
व्हाट्सएप ग्रुप पर हुई दोस्ती, 10 हजार रुपये में बेची लॉगिन आईडी फिर 250 रुपये बनाए प्रमाणपत्र
जांच के दौरान संदिग्ध मिले युवकों ने दोस्त होने की जानकारी दी। इस पर पुलिस ने और सवाल पूछे। जवाब में पता चला कि धर्मेंद्र मद्धेशिया जनसुविधा केंद्र चलाता है। अभिषेक और रूपेश भी पहले जनसेवा केंद्र चलाते थे। इसी कारण एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये उनकी दोस्ती अभिषेक गुप्ता से हुई। अभिषेक ने धर्मेंद्र को जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने के लिए पोर्टल उपलब्ध कराने की बात कही। अभिषेक सीआएस पोर्टल पर लॉगिन आईडी हैक की। अभिषेक और रूपेश ने 10 हजार रुपये लेकर धर्मेंद्र को सीआरएस पोर्टल की लॉगिन उपलब्ध करा दी। धर्मेंद्र ने आईडी लॉगिन कर 200 से 250 रुपये में फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए।
जांच अभी खत्म नहीं हुई है। जो लोग गिरफ्तार हुए हैं इन लोगों ने 30-35 फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने की बात स्वीकारी है। जारी हुए फर्जी प्रमाणपत्राें की संख्या अधिक है। इस मामले में और लोगों की तलाश भी की जा रही है। यह भी पता किया जा रहा है कि जो जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी हुए हैं उनका इस्तेमाल कहां हो रहा है।
नीरज कुमार जाादौन, पुलिस अधीक्षक
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आरोपी युवक बिहार के सहरसा, यूपी के लखनऊ और कुशीनगर के रहने वाले हैं। पूछताछ में इन आरोपियों ने अब तक 30 से 35 फर्जी प्रमाणपत्र बनाए जाने की बात स्वीकार की है। हालांकि, पुलिस अभी इनके साथियों की तलाश में जुटी है। गिरफ्तारी बेनीगंज और टड़ियावां पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में हुई।
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दरअसल, चार जुलाई को ग्राम विकास अधिकारी राजीव श्रीवास्तव ने टड़ियावां थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि किसी ने सीआरएस पोर्टल की आईडी हैक कर बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाणपत्र जारी कर दिए हैं। जांच में खुलासा हुआ कि टड़ियावां ब्लॉक की ग्राम पंचायत रावल और अलीशाबाद से दिसंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच ये प्रमाणपत्र जारी किए गए थे।
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एसपी नीरज कुमार जादौन ने सीओ हरियावां अजीत चौहान के नेतृत्व में एक टीम गठित की थी। शुक्रवार को उन्होंने बताया कि लखनऊ के सहादतगंज थाना क्षेत्र के नौबस्ता निवासी अभिषेक गुप्ता, कुशीनगर के सेवरही थाना क्षेत्र के धुरिया इमलिया निवासी धर्मेंद्र मद्धेशिया और बिहार के सहरसा जनपद के मोहल्ला डीबी रोड निवासी रूपेश कुमार को गिरफ्तार किया है।
इनके पास से चार फर्जी प्रमाणपत्र, चार मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और सीआरएस पोर्टल की यूजर आईडी-पासवर्ड की फोटो कॉपी बरामद हुई है। तीनों को जेल भेजा गया है। अभिषेक पर पहले से ही उन्नाव में आईटी एक्ट का एक केस दर्ज है।
ऐसे देते थे घटना को अंजाम
- सीआरएस वेबसाइड गूगल से खोलते थे।
- सीआरएस डेसबोर्ड में बर्थ और डेथ विंडो लॉगिन करते थे।
- फॉरगेट पॉसवर्ड पर क्लिक करते थे। पासवर्ड को फॉरगेट कर लिंकमेल आईडी दिखाई देती है।
- देखते थे लिंक मेल आईडी क्रिएट है या नहीं।
- आईडी पहले से क्रिएट नहीं है तो इस आईडी को जीमेल पर जाकर बना लिया जाता है।
- फिर मेल पर पासवर्ड बदलने का लिंक आता है। इससे पासवर्ड बदल लिया जाता है।
- अब दोबारा लॉगिन पेज पर जाकर आईडी और पासवर्ड डालकर लॉगिन कर लिया गया।
- इसके बाद ओटीपी ईमेल और माेबाइल फोन नंबर दोनों पर जाता है।
- ईमेल आईडी पर आए ओटीपी की मदद से पोर्टल पर लाॅगइन कर प्रमाण पत्र बना देते हैं।
व्हाट्सएप ग्रुप पर हुई दोस्ती, 10 हजार रुपये में बेची लॉगिन आईडी फिर 250 रुपये बनाए प्रमाणपत्र
जांच के दौरान संदिग्ध मिले युवकों ने दोस्त होने की जानकारी दी। इस पर पुलिस ने और सवाल पूछे। जवाब में पता चला कि धर्मेंद्र मद्धेशिया जनसुविधा केंद्र चलाता है। अभिषेक और रूपेश भी पहले जनसेवा केंद्र चलाते थे। इसी कारण एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये उनकी दोस्ती अभिषेक गुप्ता से हुई। अभिषेक ने धर्मेंद्र को जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने के लिए पोर्टल उपलब्ध कराने की बात कही। अभिषेक सीआएस पोर्टल पर लॉगिन आईडी हैक की। अभिषेक और रूपेश ने 10 हजार रुपये लेकर धर्मेंद्र को सीआरएस पोर्टल की लॉगिन उपलब्ध करा दी। धर्मेंद्र ने आईडी लॉगिन कर 200 से 250 रुपये में फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए।
जांच अभी खत्म नहीं हुई है। जो लोग गिरफ्तार हुए हैं इन लोगों ने 30-35 फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने की बात स्वीकारी है। जारी हुए फर्जी प्रमाणपत्राें की संख्या अधिक है। इस मामले में और लोगों की तलाश भी की जा रही है। यह भी पता किया जा रहा है कि जो जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी हुए हैं उनका इस्तेमाल कहां हो रहा है।
नीरज कुमार जाादौन, पुलिस अधीक्षक