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ये बोलते नहीं, विभाग समझता नहीं

Sun, 13 Mar 2022 10:34 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 13 Mar 2022 10:34 PM IST
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They do not speak, the department does not understand
हरदोई। बेजुबान अपनी तकलीफ बयां नहीं कर पाते और जिम्मेदार विभाग उनकी परेशानियों को समझना भी नहीं चाहते। यही वजह है कि छुट्टा और घरेलू मवेशियों की सेवा के काम में पशुपालन विभाग अकेला पड़ता जा रहा है।
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वहीं, आधा दर्जन से ज्यादा जिम्मेदार विभाग पशु कल्याण के काम से कन्नी काट चुके हैं। खास बात यह है कि जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी भी मवेशियों से संबंधित हर समस्या और सुविधा के लिए पशुपालन विभाग के ही कान खींच रहा है,
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जबकि शासन ने पशुपालन विभाग के जिम्मे सिर्फ मवेशियों की चिकित्सा सेवा का काम ही सौंपा है। इसके अलावा जिला पंचायती राज विभाग, समाज कल्याण विभाग, नगर विकास विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, कृषि विभाग, वन विभाग, सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग समेत अन्य कई विभाग जिम्मेदार होने के बावजूद सेवादारी करने से काफी दूर हैं।
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मवेशियों के पीने की पानी से लेकर घास और चारे की व्यवस्था तक हर काम के लिए अलग विभाग की सेवादारी तय है।
बताया जाता है कि पशु आश्रय स्थल पर पानी की व्यवस्था सिंचाई विभाग को करनी है, तो चारे के लिए घास रोपित करने की व्यवस्था मनरेगा के अंतर्गत कराई जानी है।
इसके अलावा नेडा, नगर विकास विभाग, ग्राम्य विकास विभाग और पंचायती राज विभाग के सहयोग से आश्रय स्थलों में प्रकाश की व्यवस्था कराई जानी है।
इन्हीं विभागों के कंधों पर मवेशियों की देखरेख सुरक्षा के लिए पशु रक्षक व श्रमिकों की व्यवस्था के अलावा गोबर एकत्र करने, हरा चारा कटान और सफाई व्यवस्था कराने की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, लेकिन इन विभागों से संबंधित ज्यादातर काम कराए ही नहीं जा रहे हैं।
कई बार निरीक्षण के दौरान आश्रय स्थलों पर अव्यवस्था व मवेशियों की दयनीय हालत के लिए फटकार अकेले पशुपालन विभाग को खानी पड़ जाती है। बड़े अफसरों के दबाव में पशुपालन विभाग अन्य विभागों के काम भी अपने सिर उठा रहा है।
अकेले मुश्किल है इतने पशुओं का पालन
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, लगभग साढ़े 12 लाख मवेशी जिले में हैं। इनमें से 24 हजार आश्रय स्थलों में हैं।
इनकी सेवा और देखरेख के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 109 अस्थायी आश्रय स्थल, चार वृहद गो संरक्षण केंद्र और शहरी क्षेत्र के 11 अस्थायी आश्रय स्थल बनाए गए हैं।
अकेले पशुपालन विभाग मवेशियों की इतनी बड़ी संख्या का पालन करने में सक्षम नहीं है। कम संसाधनों में सभी की देखरेख और चिकित्सा सेवा की जिम्मेदारी ही निभा पाना इस विभाग के बस से बाहर है।

पशुपालन विभाग का काम केवल मवेशियों की चिकित्सा तक सीमित है, जबकि अन्य विभागों के कामों को भी पशुपालन विभाग पर थोपा जा रहा है। यह विभाग अपनी क्षमता के अनुसार जो भी कर सकता है, कर रहा है।
-डॉ. जेएन पांडेय, मुख्य पशुु अधिकारी, हरदोई
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