{"_id":"a966cf3ba4276145004f2fd25e9124f3","slug":"then-came-infectious-diseases-winds-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फिर आई संक्रामक रोगों की ‘बयार’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फिर आई संक्रामक रोगों की ‘बयार’
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Tue, 19 May 2015 12:15 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मौसम बदलते ही जिले में संक्रामक रोग फैलने लगे हैं,
विज्ञापन
जिसके चलते जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी व पीएचसी मेें मरीजों की संख्या
बढ़ने लगी है, पर बीमारियों से निपटने के लिए दवाओं की किल्लत शुरू हो गई।
जिला अस्पताल में जहां 200 से 250 मरीज प्रतिदिन जुखाम, बुखार, उल्टी-दस्त
के आ रहे हैं, वहीं सीएचसी व पीएचसी पर इनकी संख्या 75 से 100 मरीज
प्रतिदिन पहुंच गई है।
ग्रामीण क्षेत्र में स्थित सीएचसी व पीएचसी पर दवाएं न होने पर डॉक्टर मरीजोें को बाहर से दवाएं लेन को पर्चा भी लिख रहे हैं। हैरत की बात है कि जानकारी के बावजूद जिम्मेदार बेखबर है। इधर, मच्छरों की संख्या में भी लगातार वृद्धि होने से मलेरिया बुखार के दस्तक देने के आसार नजर आ रहे हैं।
जिला अस्पताल के सीएमएस डा. आरके मिश्र ने बताया कि उनके अस्पताल में जो भी संक्रामक रोगी भर्ती हो रहे, उनकी प्रतिदिन सूचना कंट्रोल रूम को दे दी जाती है। वहीं से आगे की कार्रवाई होती है। उधर, जिला अस्पताल में स्वास्थ्य महकमे की ओर से बनाया गया कंट्रोल रूम सिर्फ नाम मात्र का है।
वहां पर सिर्फ सूचनाएं दर्ज हो जाती है। उसके बाद कुछ नहीं होता। वहां पर मौजूद कर्मचारी ने बताया कि संबंधित चिकित्साधिकारी को इस संबंध में जानकारी दे दी जाती है और कोई विशेष बात होने पर टीम भेज कर परीक्षण कराया जाता है, वहीं जब मलेरिया आदि का प्रकोप बढ़ता है, तो क्षेत्र में फागिंग कराई जाती है।
उधर, संडीला स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्वास्थ्य राज्यमंत्री नितिन अग्रवाल के छापे में अस्पताल की व्यवस्था के दावों की पोल खुल गई। अस्पताल में ऐसे भी मरीज मिले, जिन्हें बाहर से दवाएं लिखी गई थीं, पर जब मंत्री ने पूछताछ की तो मरीज को देखने से ही मुकर गए। इससे साबित होता है कि स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को दवाएं बाहर से लेनी पड़ रही है।
ग्रामीण क्षेत्र में स्थित सीएचसी व पीएचसी पर दवाएं न होने पर डॉक्टर मरीजोें को बाहर से दवाएं लेन को पर्चा भी लिख रहे हैं। हैरत की बात है कि जानकारी के बावजूद जिम्मेदार बेखबर है। इधर, मच्छरों की संख्या में भी लगातार वृद्धि होने से मलेरिया बुखार के दस्तक देने के आसार नजर आ रहे हैं।
जिला अस्पताल के सीएमएस डा. आरके मिश्र ने बताया कि उनके अस्पताल में जो भी संक्रामक रोगी भर्ती हो रहे, उनकी प्रतिदिन सूचना कंट्रोल रूम को दे दी जाती है। वहीं से आगे की कार्रवाई होती है। उधर, जिला अस्पताल में स्वास्थ्य महकमे की ओर से बनाया गया कंट्रोल रूम सिर्फ नाम मात्र का है।
वहां पर सिर्फ सूचनाएं दर्ज हो जाती है। उसके बाद कुछ नहीं होता। वहां पर मौजूद कर्मचारी ने बताया कि संबंधित चिकित्साधिकारी को इस संबंध में जानकारी दे दी जाती है और कोई विशेष बात होने पर टीम भेज कर परीक्षण कराया जाता है, वहीं जब मलेरिया आदि का प्रकोप बढ़ता है, तो क्षेत्र में फागिंग कराई जाती है।
उधर, संडीला स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्वास्थ्य राज्यमंत्री नितिन अग्रवाल के छापे में अस्पताल की व्यवस्था के दावों की पोल खुल गई। अस्पताल में ऐसे भी मरीज मिले, जिन्हें बाहर से दवाएं लिखी गई थीं, पर जब मंत्री ने पूछताछ की तो मरीज को देखने से ही मुकर गए। इससे साबित होता है कि स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को दवाएं बाहर से लेनी पड़ रही है।