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Hardoi News: स्वाइन फ्लू के लक्षणों के बढ़े मरीज
Mon, 31 Aug 2026 11:44 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
Updated Mon, 31 Aug 2026 11:44 PM IST
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फोटो- 19- टीबी व चेस्ट रोग विभाग में मरीज की जांच करते डॉ. शिवम गुप्ता। संवाद
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हरदोई। जिले में भी एच-1,एन-1 संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्वाइन फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीज बढ़े हैं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में बुखार, खांसी, गले में खराश, सीने में जकड़न और बदन दर्द की शिकायत लेकर मरीज पहुंच रहे हैं। अभी तक जिले में स्वाइन फ्लू के किसी मरीज की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, अब मरीजों की आरटी-पीसीआर जांच शुरू कराने की तैयारी की जा रही है।
स्वाइन फ्लू इन्फ्लुएंजा-ए वायरस से होने वाला एक संक्रमण है। इसका एक प्रमुख प्रकार एच-1, एन-1 है। यह मुख्य रूप से सांस की बीमारी है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस के जरिए निकलने वाले कणों से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। इन दिनों तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण वायरल संक्रमण का असर बढ़ा है।
ओपीडी में सर्दी-जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या लगातार बनी हुई है। टीबी व चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शिवम गुप्ता ने बताया कि सामान्य वायरल संक्रमण और स्वाइन फ्लू के लक्षण काफी हद तक एक जैसे हो सकते हैं। इन दिनों ऐसे तमाम मरीज आ रहे हैं, जिनमें सांस लेने में दिक्कत, गले में खराश और बुखार पाया जा रहा है। ओपीडी में रोजाना 150 से 200 मरीज वायरल संक्रमण के आ रहे हैं। हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए माइक्रोबायोलॉजी विभाग से जांच करानी होती है।
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जल्द शुरू होगी आरटी-पीसीआर जांच
स्वाइन फ्लू के लिए सबसे मुख्य और सटीक जांच आरटी-पीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेज चेन रिएक्शन) टेस्ट है। इसी जांच की मदद से शरीर में स्वाइन फ्लू के वायरस की मौजूदगी का पता लग सकता है। माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अदिती गर्ग ने बताया कि सभी तैयारियां हो चुकी हैं। मेडिकल कॉलेज में जल्द ही आरटी-पीसीआर जांच की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। संदिग्ध मरीजों के नाक व मुंह से स्वाब के नमूने लेकर जांचें जाएंगे। इससे स्वाइन फ्लू की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के साथ ही संक्रमित मरीजों की पहचान समय से हो सकेगी।
10 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार
स्वाइन फ्लू जैसे लक्षणों को देखते हुए मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए 10 बेड का आइसोलेशन वार्ड भी तैयार किया गया है। इसमें मरीजों के लिए ऑक्सीजन की उपलब्धता के साथ ही उन्हें क्वारंटाइन करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। डॉक्टरों के अनुसार अभी घबराने की जरूरत नहीं है। खांसी-बुखार होने पर भीड़भाड़ वाले स्थानों से बचने, मास्क लगाने और चिकित्सकीय सलाह लें। साथ ही लोगों के बीच जाने से बचें। घर पर भी तबीयत ठीक होने तक एकांत में रहें।
इसके सामान्य लक्षण
बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना, थकान और कमजोरी
स्वाइन फ्लू से कैसे बचें
साबुन से हाथ बार-बार धोएं। खांसते-छींकते समय मुंह ढकें। बीमार होने पर घर पर आराम करें। भीड़ में न जाएं और बच्चों से दूरी रखें। चेहरे को बार-बार न छुएं।
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स्वाइन फ्लू इन्फ्लुएंजा-ए वायरस से होने वाला एक संक्रमण है। इसका एक प्रमुख प्रकार एच-1, एन-1 है। यह मुख्य रूप से सांस की बीमारी है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस के जरिए निकलने वाले कणों से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। इन दिनों तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण वायरल संक्रमण का असर बढ़ा है।
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ओपीडी में सर्दी-जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या लगातार बनी हुई है। टीबी व चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शिवम गुप्ता ने बताया कि सामान्य वायरल संक्रमण और स्वाइन फ्लू के लक्षण काफी हद तक एक जैसे हो सकते हैं। इन दिनों ऐसे तमाम मरीज आ रहे हैं, जिनमें सांस लेने में दिक्कत, गले में खराश और बुखार पाया जा रहा है। ओपीडी में रोजाना 150 से 200 मरीज वायरल संक्रमण के आ रहे हैं। हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए माइक्रोबायोलॉजी विभाग से जांच करानी होती है।
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जल्द शुरू होगी आरटी-पीसीआर जांच
स्वाइन फ्लू के लिए सबसे मुख्य और सटीक जांच आरटी-पीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेज चेन रिएक्शन) टेस्ट है। इसी जांच की मदद से शरीर में स्वाइन फ्लू के वायरस की मौजूदगी का पता लग सकता है। माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अदिती गर्ग ने बताया कि सभी तैयारियां हो चुकी हैं। मेडिकल कॉलेज में जल्द ही आरटी-पीसीआर जांच की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। संदिग्ध मरीजों के नाक व मुंह से स्वाब के नमूने लेकर जांचें जाएंगे। इससे स्वाइन फ्लू की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के साथ ही संक्रमित मरीजों की पहचान समय से हो सकेगी।
10 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार
स्वाइन फ्लू जैसे लक्षणों को देखते हुए मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए 10 बेड का आइसोलेशन वार्ड भी तैयार किया गया है। इसमें मरीजों के लिए ऑक्सीजन की उपलब्धता के साथ ही उन्हें क्वारंटाइन करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। डॉक्टरों के अनुसार अभी घबराने की जरूरत नहीं है। खांसी-बुखार होने पर भीड़भाड़ वाले स्थानों से बचने, मास्क लगाने और चिकित्सकीय सलाह लें। साथ ही लोगों के बीच जाने से बचें। घर पर भी तबीयत ठीक होने तक एकांत में रहें।
इसके सामान्य लक्षण
बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना, थकान और कमजोरी
स्वाइन फ्लू से कैसे बचें
साबुन से हाथ बार-बार धोएं। खांसते-छींकते समय मुंह ढकें। बीमार होने पर घर पर आराम करें। भीड़ में न जाएं और बच्चों से दूरी रखें। चेहरे को बार-बार न छुएं।

फोटो- 19- टीबी व चेस्ट रोग विभाग में मरीज की जांच करते डॉ. शिवम गुप्ता। संवाद