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Hardoi News: फोटो और वीडियो में शक्ल सूरत देख तय की जाती थी बच्चे की कीमत, भीड़ से ही होती थी चोरी

Wed, 19 Mar 2025 11:04 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 19 Mar 2025 11:04 PM IST
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The price of the child was decided by looking at the face in the photo and video, the child was stolen from the crowd
मानव तस्करी का मामला
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हरदोई। मानव तस्करी गिरोह बेहद शातिराना ढंग से घटनाओं को अंजाम देता है। आमतौर पर यह लोग भीड़-भाड़ वाली जगहों में अलग थलग पड़े बच्चों के साथ घुल मिल जाते हैं। इसके बाद उन्हें नशीला सिरप पिलाकर बेहोश कर देते हैं और फिर बाइक में बैठाकर ले जाते हैं। बहुती कला में शादी समारोह से, सीतापुर के अटरिया थाना क्षेत्र के शादी समारोह से और बिसवां थाना क्षेत्र से मेले से बच्चे को चोरी किया गया था। खास बात यह है कि बच्चों की कीमत उसकी शक्ल-सूरत और सेहत के हिसाब से तय होती है।
बच्चा चोरी करने बाद चोर बच्चे को नहलाकर अच्छे कपड़े पहनाते हैं। इसके बाद उसकी फोटो और वीडियो दिल्ली में रहने वाली मुख्य बिचौलिया को भेजी जाती है। वह इस फोटो और वीडियो को मानव तस्करी गिरोह की सरगना को तेलंगाना भेजती है। वहां से बच्चे की कीमत तय होती है। अतरौली के गाैरीकला से चोरी किए गए रितिक के साथ भी चोरों ने कुछ ऐसा ही किया था। जब तेलंगाना से बच्चे को खरीदने की सहमति मिल गई तो अभय और उमाशंकर बच्चे को लेकर दिल्ली सोनिया के पास चले गए।
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सोनिया को बच्चा सौंपने के बाद फिर तेलंगाना से आए लोगों ने बच्चे को सुपुर्दगी में ले लिया। हर किसी को उसके काम के हिसाब से रुपये मिलते हैं। सबसे ज्यादा रुपये बच्चा चोरी करने वाले लोगों के हिस्से में आते हैं। पुलिस अधीक्षक नीरज जादौन का कहना है कि अभी तक की जांच में यही पता चला है कि निसंतान दंपतियों को बच्चे बेचे जाते हैं। इन्हें नौकर की तरह रखने जैसी कोई बात फिलहाल सामने नहीं आई है।
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मोबाइल दिखाया, चॉकलेट खिलाई फिर बाइक पर बैठाकर ले गए
अतरौली थाना क्षेत्र के गौरीकला गांव में आयोजित वैवाहिक समारोह के आसपास ही उमाशंकर और अभय वर्मा बाइक से पहुंचे थे। समारोह में रितिक कुछ अलग थलग पड़ा नजर आया तो उसे बहलाकर कुछ दूर एक कुर्सी पर बैठा दिया। अभय ने अपना मोबाइल रितिक को चलाने के लिए दिया। कुछ देर बाद जब रितिक घुल मिल गया तो उसे चॉकलेट खिला दी। इसके बाद उसे नशीला सिरप पिला दिया। उमाशंकर और अभय उसे बाइक से लखनऊ ले गए। लखनऊ के बाद इटौंजा गए। इटौंजा से एक कैब बुक कर दिल्ली गए ओर वहां बच्चा सोनिया के सुपुर्द कर दिया।


ऐसे पकड़ में आए बच्चा चुराने वाले फिर जुड़ती गई कड़ी से कड़ी
रितिक की गुमशुदगी के बाद पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश कर रही थीं। इसी दौरान सर्विलांस ने घटना के दिन गांव में सक्रिय सभी मोबाइल नंबरों का ब्योरा खंगाला। लगभग 2300 मोबाइल नंबर खंगालने के दौरान दो मोबाइल नंबरों पर पुलिस को संदेह हुआ। अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी नृपेंद्र बताते हैं कि रितिक की तलाश के दौरान पता चला कि सीतापुर जनपद के अटरिया थाना क्षेत्र से भी एक बच्चा दस फरवरी 2025 को और बिसवां थाना क्षेत्र से 27 दिसंबर 2024 को लापता हो गए थे। वहां की पुलिस से संपर्क किया गया और संदिग्ध मिले मोबाइल नंबरों की लोकेशन देखी गई तो उक्त दोनों दिनों में घटनास्थल पर यह दोनों मोबाइल नंबर भी सक्रिय मिले। इसी आधार पर पूछताछ के लिए उमाशंकर और अभय को बुलाया गया। पहले तो इन लोगों ने कुछ नहीं बताया, लेकिन दोबारा पूछताछ के लिए बताने पर इन लोगों ने हकीकत बता दी। सीतापुर के बिसवां और अटरिया से भी बच्चे गायब किए जाने की बात दोनों ने स्वीकार की है।


खरीदारों को बताया था रितिक की मां को है कैंसर, नहीं पाल पा रहे
मानव तस्करी गिरोह के सदस्य किसी न किसी अस्पताल से किसी न किसी रूप में जुड़े हैं। गिरफ्तार की गई सोनिया दिल्ली में एक प्राइवेट अस्पताल में काम करती है। उमाशंकर इटौंजा में संचालित एक अस्पताल में प्रबंधक है, जबकि अभय इसी अस्पताल में कंपाउंडर हैं। इन लोगों के संपर्क में तेलंगाना के अस्पतालों में काम करने वाले लोग रहते हैं। वहां निसंतान दंपती इन लोगों से संपर्क करते हैं। जब कोई बच्चा चोरी कर लेते हैं तो उसे बेच दिया जाता है। अपर पुलिस अधीक्षक नृपेंद्र ने बताया कि खरीदारों को बताया गया था कि रितिक की मां को कैंसर हुआ है। परिवार की स्थिति अच्छी नहीं है। दो बच्चे हैं और एक को पाल नहीं पा रहे हैं। पांच लाख रुपये से बच्चे की मां का इलाज कराने की बात भी कही थी।



आधुनिक तकनीक, संपर्क संबंधों का इस्तेमाल और गोद में आ गया लाल
गौरीकला से लापता हुए तीन साल के रितिक को सुरक्षित वापस लाना आसान नहीं था। पुलिस ने आधुनिक तकनीकों का इस्तेमल करने के साथ ही निजी संपर्काें संबंधों का भी इस्तेमाल किया। अपर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व वाली टीम ने काफी कुछ पता लगा लिया था, लेकिन विजयवाड़ा पहुंचकर भाषा की समस्या आड़े आ गई। एसपी नीरज कुमार जादौन ने तेलंगाना में तैनात अपने बैच के आईपीएस अफसरों से सहयोग मांगा तो सभी ने साथ दिया। पुलिस टीम को एक द्विभाषिया भी दिलाया गया। मुलगू में पहुंचकर पुलिस को लोकेशन के लिए आधुनिक सॉफ्टवेयर का सहारा लेना पड़ा और अंतत: अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी की गोद में गुड़िया और मनीष का लाल रितिक आ गया।
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