{"_id":"6560f637c4416c6286019614","slug":"the-backbone-of-the-economy-did-not-get-the-support-of-the-budget-hardoi-news-c-213-1-hra1001-6984-2023-11-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hardoi News: अर्थव्यवस्था की रीढ़ को नहीं मिला बजट का सहारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hardoi News: अर्थव्यवस्था की रीढ़ को नहीं मिला बजट का सहारा
विज्ञापन
हरदोई। जनपद की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले औद्योगिक क्षेत्र नघेटा को मूलभूत सुविधाएं देने के लिए बजट का सहारा नहीं मिल सका। मूलभूत सुविधाएं न होने के कारण उद्यमियों ने भी मुंह मोड़ना शुरू कर दिया। हालात यह हुए कि 65 में 53 इकाइयां बंद हो गईं और 12 ही उम्मीदों को जिंदा रखे हैं।
शहर से सटे सरकुलर मार्ग पर नघेटा औद्योगिक क्षेत्र विकसित है। यहां पर उद्यमियों को उद्योगों की स्थापना के लिए प्लांटों का आवंटन हुआ। शुरुआत में पूरी क्षमता से जब 65 उद्योग गतिमान थे तब यहां से करोड़ों में राजस्व मिल रहा था लेकिन जैसे-जैसे सड़क, पुलिया जैसी मूलभूत सुविधाएं दम तोड़ने लगीं वैसे-वैसे औद्योगिक इकाइयां भी दम तोड़ती चली गईं। हालात यह हैं कि शायद ही किसी पुलिया पर सुरक्षा दीवार बची हो। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे होने से भारी वाहन तो छोड़ों छोटे वाहन भी नहीं चल पा रहे हैं। प्लांटों तक वाहनों का आवागमन बड़ी मुश्किल से हो रहा है। मार्गों की दशा दयनीय होने के साथ ही नालियों की भी स्थिति खराब है। बारिश में जलभराव के कारण यहां की सड़कों पर चलना मुश्किल हो जाता है। उद्यमी स्वयं के संसाधन से क्षतिग्रस्त नालियों की मरम्मत कराने के लिए मजबूर हैं।
यही कारण हैं कि वर्तमान में यहां सिर्फ 12 इकाइयां ही संचालित हैं। न्यू इंडिया फार्मास्युटिकल के संचालक रमेश चंद्र पाठक ने बताया कि मूलभूत सुविधाओं व सहूलियतों की ओर जिम्मेदार ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। यही कारण हैं कि काफी प्लांट बंद हो गए और बचे हैं वह भी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
विज्ञापन
अतिक्रमण भी बना उद्यमियों के लिए समस्या
नघेटा औद्योगिक क्षेत्र में अतिक्रमण भी बड़ी समस्या बना हुआ है। मार्गों के किनारे छोड़ी गई भूमि पर अतिक्रमण व अस्थायी निर्माण से उद्यमियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शुरूआत में ही अतिक्रमण होने से बड़े वाहनों के आवागमन और एक साथ दोनों ओर से वाहनों के आ जाने पर जाम जैसी स्थिति बन जाती है।
पार्क को कर्मचारियों ने बनाया पार्किंग स्थल
औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले धुएं व प्रदूषण को कम करने और हरियाली के साथ ही सुबह-शाम टहलने के लिए पार्क की भी व्यवस्था की गई है। यहां पर दो पार्क हैं। इसमें से एक में तो पौधरोपण कराया गया है और दूसरी को विकसित करने के लिए 34 लाख रुपये से चारदीवारी तो बनवा दी गई है लेकिन, अन्य काम नहीं कराए गए हैं। ऐसे में औद्योगिक इकाइयों के कर्मचारियों ने पार्क को ही अपने वाहनों के लिए पार्किंग स्थल बना लिया है।
विज्ञापन
शहर से सटे सरकुलर मार्ग पर नघेटा औद्योगिक क्षेत्र विकसित है। यहां पर उद्यमियों को उद्योगों की स्थापना के लिए प्लांटों का आवंटन हुआ। शुरुआत में पूरी क्षमता से जब 65 उद्योग गतिमान थे तब यहां से करोड़ों में राजस्व मिल रहा था लेकिन जैसे-जैसे सड़क, पुलिया जैसी मूलभूत सुविधाएं दम तोड़ने लगीं वैसे-वैसे औद्योगिक इकाइयां भी दम तोड़ती चली गईं। हालात यह हैं कि शायद ही किसी पुलिया पर सुरक्षा दीवार बची हो। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे होने से भारी वाहन तो छोड़ों छोटे वाहन भी नहीं चल पा रहे हैं। प्लांटों तक वाहनों का आवागमन बड़ी मुश्किल से हो रहा है। मार्गों की दशा दयनीय होने के साथ ही नालियों की भी स्थिति खराब है। बारिश में जलभराव के कारण यहां की सड़कों पर चलना मुश्किल हो जाता है। उद्यमी स्वयं के संसाधन से क्षतिग्रस्त नालियों की मरम्मत कराने के लिए मजबूर हैं।
विज्ञापन
यही कारण हैं कि वर्तमान में यहां सिर्फ 12 इकाइयां ही संचालित हैं। न्यू इंडिया फार्मास्युटिकल के संचालक रमेश चंद्र पाठक ने बताया कि मूलभूत सुविधाओं व सहूलियतों की ओर जिम्मेदार ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। यही कारण हैं कि काफी प्लांट बंद हो गए और बचे हैं वह भी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
विज्ञापन
अतिक्रमण भी बना उद्यमियों के लिए समस्या
नघेटा औद्योगिक क्षेत्र में अतिक्रमण भी बड़ी समस्या बना हुआ है। मार्गों के किनारे छोड़ी गई भूमि पर अतिक्रमण व अस्थायी निर्माण से उद्यमियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शुरूआत में ही अतिक्रमण होने से बड़े वाहनों के आवागमन और एक साथ दोनों ओर से वाहनों के आ जाने पर जाम जैसी स्थिति बन जाती है।
पार्क को कर्मचारियों ने बनाया पार्किंग स्थल
औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले धुएं व प्रदूषण को कम करने और हरियाली के साथ ही सुबह-शाम टहलने के लिए पार्क की भी व्यवस्था की गई है। यहां पर दो पार्क हैं। इसमें से एक में तो पौधरोपण कराया गया है और दूसरी को विकसित करने के लिए 34 लाख रुपये से चारदीवारी तो बनवा दी गई है लेकिन, अन्य काम नहीं कराए गए हैं। ऐसे में औद्योगिक इकाइयों के कर्मचारियों ने पार्क को ही अपने वाहनों के लिए पार्किंग स्थल बना लिया है।