{"_id":"75664a5720edc2b62b8a8871e3999b98","slug":"teachers-should-be-free-from-food-in-the-summer-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"टीचरों को ग्रीष्मावकाश में भोजन से मुक्त रखा जाए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टीचरों को ग्रीष्मावकाश में भोजन से मुक्त रखा जाए
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Tue, 26 May 2015 12:39 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ग्रीष्मावकाश में स्कूल खोलने के दिए आदेशों में
विज्ञापन
टीचरों को मुक्त रखने की मांग को लेकर जूनियर पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के
पदाधिकारियों ने सोमवार को कलक्ट्रेट में नारेबाजी की और मुख्यमंत्री को
संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपकर कार्यवाई कराने की मांग की।
कलक्ट्रेट में प्रदर्शन के दौरान शिक्षक संघ अध्यक्ष सुनीता त्यागी ने कहा कि टीचरों को बेसिक शिक्षा परिषद की नियमावली पर ग्रीष्मावकाश देय है। बेसिक टीचरों को राज्य कर्मियों की भांति अन्य अवकाशों की सुविधा देय नहीं है। विभाग में 50 प्रतिशत महिला टीचरें हैं।
लगभग 60 फीसदी महिलाएं अपने निवास स्थान से 40 से 50 किमी दूर नियुक्त हैं, जिन्हें मात्र दो घंटे को स्कूल जाना होगा, जो इस भीषण गर्मी में उचित नहीं है। कहा कि वर्तमान में छात्र स्कूल नहीं आ रहे हैं। जब छात्रों की यह स्थिति रही है, तो अवकाश में सपना मात्र होगी।
कहा कि यदि इतना ही जरूरी है, तो भोजन बनाने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत के प्रधान या स्कूल प्रबंध समिति के अध्यक्ष को दे दी जाए। इसके बाद पदाधिकारियों ने नारेबाजी की और सीएम को संबोधित ज्ञापन डीएम रमेश मिश्र को सौंप दोपहर भोजन बनवाने के कार्य से टीचरों को मुक्त रखने की मांग की।
कलक्ट्रेट में प्रदर्शन के दौरान शिक्षक संघ अध्यक्ष सुनीता त्यागी ने कहा कि टीचरों को बेसिक शिक्षा परिषद की नियमावली पर ग्रीष्मावकाश देय है। बेसिक टीचरों को राज्य कर्मियों की भांति अन्य अवकाशों की सुविधा देय नहीं है। विभाग में 50 प्रतिशत महिला टीचरें हैं।
लगभग 60 फीसदी महिलाएं अपने निवास स्थान से 40 से 50 किमी दूर नियुक्त हैं, जिन्हें मात्र दो घंटे को स्कूल जाना होगा, जो इस भीषण गर्मी में उचित नहीं है। कहा कि वर्तमान में छात्र स्कूल नहीं आ रहे हैं। जब छात्रों की यह स्थिति रही है, तो अवकाश में सपना मात्र होगी।
कहा कि यदि इतना ही जरूरी है, तो भोजन बनाने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत के प्रधान या स्कूल प्रबंध समिति के अध्यक्ष को दे दी जाए। इसके बाद पदाधिकारियों ने नारेबाजी की और सीएम को संबोधित ज्ञापन डीएम रमेश मिश्र को सौंप दोपहर भोजन बनवाने के कार्य से टीचरों को मुक्त रखने की मांग की।