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फ्लाईओवर से रफ्तार, रिंग रोड से विस्तार, पर कब
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हरदोई। शहर में रोजाना लगने वाले जाम से छुटकारे के लिए फ्लाई ओवर की दरकार है, जिससे यातायात को रफ्तार मिल सके, जबकि रिंग रोड बनने से शहर का विस्तार होगा, लेकिन ये दोनों ही जरूरी आवश्यकताएं केवल कागजों में सिमटकर रह गईं हैं।
एक दशक बाद शहर के आसपास आबादी बढ़ी है। बढ़ती आवासीय जरूरतों के लिए बस रहीं नई कॉलोनियों के अनुरूप सुविधाएं भी नहीं हैं। शहर की बड़ी समस्या में जाम अब आम हो चुका है।
शहर से सटी हुई आबादी को शहरी सुविधाएं न मिलने से शहरी मानचित्र भी गड़बड़ा रहा है। जानकारों का मानना है कि शहर में ट्रैफिक हमेशा रहा है और नियमों के मापदंडों में शहर का विकास ठहरा हुआ है।
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लोगों का कहना है कि शहर के विस्तार के लिए जहां रिंग रोड बनाने की जरूरत है, तो जाम की समस्या को कम करने के लिए फ्लाईओवर की जरूरत महसूस की जा रही है।
नगरपालिका की सीमाओं में बसे शहर की परिधि लगभग दो किमी है, जबकि शहर से सटे करीब एक दर्जन गांव तक नई कॉलोनियां बसने के साथ ही आबादी लगातार बढ़ रही है।
पालिका के आंकड़ों पर गौर करें, तो शहर के कुल 26 वार्डों में लगभग 27,000 आवासीय घर हैं।
जिनकी आबादी लगभग सवा लाख है, जबकि शहर के सीमा क्षेत्रों में बस चुकी कॉलोनी और लगातार बस रही कॉलोनियों से संबंधित गांवों की आबादी को जोड़ दिया जाए, तो आबादी लगभग तीन लाख के करीब होने का अनुमान है।
इनके मकानों की संख्या 50,000 से अधिक होने का अनुमान है।
विनियमित क्षेत्र के नियम भी विकास में बाधक
शहर में सुव्यवस्थित एवं विनियमित क्षेत्र के नियमों के अनुसार शहर का विकास नहीं हो पा रहा है। अनियमित रूप से शहरी विकास लगातार हो रहा है, जिससे पालिका की सुविधाएं इन क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
यह एरिया शहरी क्षेत्र में न आने से नगरीय क्षेत्र को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। पालिका सूत्रों के मुताबिक, पिछले एक दशक से नगर की सीमाओं का विस्तार नहीं हुआ है। सीमाओं के विस्तार के लिए कई बार प्रस्ताव बनाकर भेजे गए, जो शासन में लंबित हैं।
जाम की समस्या हो चुकी है आम
सड़कों के चौड़ीकरण में फुटपाथों के अस्तित्व को लगभग समाप्त ही कर दिया है। जिन सड़कों पर फुटपाथ बचे भी हैं, उन पर टेंपो-टैक्सी, ऑटो, रिक्शा इत्यादि का कब्जा रहता है, जिससे शहर में पैदल चलना मुश्किल हो गया है।
लोगों की माने तो शहर की प्रमुख सड़कों और प्रमुख चौराहों पर 10 साल पहले तक एक मिनट में आवाजाही भरने वाले वाहनों की संख्या दो से तीन हुआ करती थी, जो बढ़कर अब 20 से 30 तक पहुंच चुकी है।
सुबह से देर रात तक वाहनों की आवाजाही बड़े पैमाने पर होने लगी है, जिससे सड़कें और चौराहे व्यस्त हो गए हैं। रही सही कसर शहर से होकर गुजरने वाले बड़े वाहन पूरी कर देते हैं।
बढ़ रहा शहर में यातायात का भार
पिछले एक दशक में जिस तरह से वाहनों की बिक्री बढ़ी है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता कि यातायात पर भार बढ़ गया है। हर साल वाहन बिक्री में दो से पांच फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है।
सिर्फ शहर में ही हर वर्ष दो हजार वाहन बढ़ जाते हैं। एक दशक पहले तक आटो, ई-रिक्शा वाहनों की संख्या शहरी क्षेत्र में शून्य थी। अब लगभग 5,000 ई-रिक्शा आदि शहर की सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं।
एक दशक में बाइक, कार आदि वाहनों की संख्या भी दोगुनी से अधिक हो चुकी है। शहर की सड़कों का दायरा नहीं बढ़ा और ट्रैफिक 10 गुना से अधिक हो चुका है।
नगर सीमा विस्तार का प्रस्ताव शासन में लंबित है। पिछले वर्ष सीमा विस्तार की मंजूरी मिलने के समय ही पंचायत चुनाव होने से मामला स्थगित हो गया था। जल्द ही प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। शहर की सीमाओं को पांच किमी तक विस्तार करने का प्रस्ताव भेजा गया था।
- सुखसागर मिश्र मधुर, पालिका चेयरमैन
शहर के आसपास एरिया में ग्राम पंचायत व्यवस्था लागू है। ऐसे में पालिका सिर्फ अपनी सीमा क्षेत्रों में ही नियमानुसार सेवाएं मुहैया करा सकती है। शहर की अधिकांश सड़कें पीडब्ल्यूडी की हैं।
ऐसे में इन सड़कों पर डिवाइडर बनाने, ओवरहेड क्रासिंग बनाने का कार्य पालिका द्वारा नहीं कराया जा सकता है।
- रविशंकर शुक्ला, ईओ, नगर पालिका
विभागीय अफसरों से जानकारी करेंगे
इस संबंध में नगर पालिका एवं पीडब्ल्यूडी के अफसरों से जानकारी की जाएगी। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था एवं नागरिकों की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए बात की जाएगी।
- वंदना त्रिवेदी, एडीएम
बोले नागरिक
रिंग रोड बनने से शहर के विस्तार को नई दिशा मिल सकेगी। प्रमुख चौराहों पर फ्लाई ओवर बनाने की जरूरत है। पैदल चलने वालों के लिए प्रमुख चौराहों पर ओवरहेड क्रासिंग बनाई जानी चाहिए।
- श्याम किशोर दीक्षित, वरिष्ठ नागरिक
बढ़ते ट्रैफिक के बीच शहर की सड़कों पर पैदल चलना मुश्किल हो गया है। फुटपाथों पर वाहन खड़े रहते हैं। जाम की समस्या बढ़ रही है। ऐसे में शहर में फ्लाई ओवर आदि का निर्माण होना चाहिए।
- करुणा शंकर द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता
शहर में जाम की समस्या बढ़ गई है। इसके लिए जरूरी व्यवस्थाएं की जानी चाहिए, ताकि जाम न लगे।
- सरफराज, रेलवेगंज
शहर में रोजाना लगने वाले जाम से हर कोई परेशान होता है। ऐसे में इस ओर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
- बाबूलाल, नई बस्ती
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एक दशक बाद शहर के आसपास आबादी बढ़ी है। बढ़ती आवासीय जरूरतों के लिए बस रहीं नई कॉलोनियों के अनुरूप सुविधाएं भी नहीं हैं। शहर की बड़ी समस्या में जाम अब आम हो चुका है।
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शहर से सटी हुई आबादी को शहरी सुविधाएं न मिलने से शहरी मानचित्र भी गड़बड़ा रहा है। जानकारों का मानना है कि शहर में ट्रैफिक हमेशा रहा है और नियमों के मापदंडों में शहर का विकास ठहरा हुआ है।
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लोगों का कहना है कि शहर के विस्तार के लिए जहां रिंग रोड बनाने की जरूरत है, तो जाम की समस्या को कम करने के लिए फ्लाईओवर की जरूरत महसूस की जा रही है।
नगरपालिका की सीमाओं में बसे शहर की परिधि लगभग दो किमी है, जबकि शहर से सटे करीब एक दर्जन गांव तक नई कॉलोनियां बसने के साथ ही आबादी लगातार बढ़ रही है।
पालिका के आंकड़ों पर गौर करें, तो शहर के कुल 26 वार्डों में लगभग 27,000 आवासीय घर हैं।
जिनकी आबादी लगभग सवा लाख है, जबकि शहर के सीमा क्षेत्रों में बस चुकी कॉलोनी और लगातार बस रही कॉलोनियों से संबंधित गांवों की आबादी को जोड़ दिया जाए, तो आबादी लगभग तीन लाख के करीब होने का अनुमान है।
इनके मकानों की संख्या 50,000 से अधिक होने का अनुमान है।
विनियमित क्षेत्र के नियम भी विकास में बाधक
शहर में सुव्यवस्थित एवं विनियमित क्षेत्र के नियमों के अनुसार शहर का विकास नहीं हो पा रहा है। अनियमित रूप से शहरी विकास लगातार हो रहा है, जिससे पालिका की सुविधाएं इन क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
यह एरिया शहरी क्षेत्र में न आने से नगरीय क्षेत्र को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। पालिका सूत्रों के मुताबिक, पिछले एक दशक से नगर की सीमाओं का विस्तार नहीं हुआ है। सीमाओं के विस्तार के लिए कई बार प्रस्ताव बनाकर भेजे गए, जो शासन में लंबित हैं।
जाम की समस्या हो चुकी है आम
सड़कों के चौड़ीकरण में फुटपाथों के अस्तित्व को लगभग समाप्त ही कर दिया है। जिन सड़कों पर फुटपाथ बचे भी हैं, उन पर टेंपो-टैक्सी, ऑटो, रिक्शा इत्यादि का कब्जा रहता है, जिससे शहर में पैदल चलना मुश्किल हो गया है।
लोगों की माने तो शहर की प्रमुख सड़कों और प्रमुख चौराहों पर 10 साल पहले तक एक मिनट में आवाजाही भरने वाले वाहनों की संख्या दो से तीन हुआ करती थी, जो बढ़कर अब 20 से 30 तक पहुंच चुकी है।
सुबह से देर रात तक वाहनों की आवाजाही बड़े पैमाने पर होने लगी है, जिससे सड़कें और चौराहे व्यस्त हो गए हैं। रही सही कसर शहर से होकर गुजरने वाले बड़े वाहन पूरी कर देते हैं।
बढ़ रहा शहर में यातायात का भार
पिछले एक दशक में जिस तरह से वाहनों की बिक्री बढ़ी है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता कि यातायात पर भार बढ़ गया है। हर साल वाहन बिक्री में दो से पांच फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है।
सिर्फ शहर में ही हर वर्ष दो हजार वाहन बढ़ जाते हैं। एक दशक पहले तक आटो, ई-रिक्शा वाहनों की संख्या शहरी क्षेत्र में शून्य थी। अब लगभग 5,000 ई-रिक्शा आदि शहर की सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं।
एक दशक में बाइक, कार आदि वाहनों की संख्या भी दोगुनी से अधिक हो चुकी है। शहर की सड़कों का दायरा नहीं बढ़ा और ट्रैफिक 10 गुना से अधिक हो चुका है।
नगर सीमा विस्तार का प्रस्ताव शासन में लंबित है। पिछले वर्ष सीमा विस्तार की मंजूरी मिलने के समय ही पंचायत चुनाव होने से मामला स्थगित हो गया था। जल्द ही प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। शहर की सीमाओं को पांच किमी तक विस्तार करने का प्रस्ताव भेजा गया था।
- सुखसागर मिश्र मधुर, पालिका चेयरमैन
शहर के आसपास एरिया में ग्राम पंचायत व्यवस्था लागू है। ऐसे में पालिका सिर्फ अपनी सीमा क्षेत्रों में ही नियमानुसार सेवाएं मुहैया करा सकती है। शहर की अधिकांश सड़कें पीडब्ल्यूडी की हैं।
ऐसे में इन सड़कों पर डिवाइडर बनाने, ओवरहेड क्रासिंग बनाने का कार्य पालिका द्वारा नहीं कराया जा सकता है।
- रविशंकर शुक्ला, ईओ, नगर पालिका
विभागीय अफसरों से जानकारी करेंगे
इस संबंध में नगर पालिका एवं पीडब्ल्यूडी के अफसरों से जानकारी की जाएगी। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था एवं नागरिकों की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए बात की जाएगी।
- वंदना त्रिवेदी, एडीएम
बोले नागरिक
रिंग रोड बनने से शहर के विस्तार को नई दिशा मिल सकेगी। प्रमुख चौराहों पर फ्लाई ओवर बनाने की जरूरत है। पैदल चलने वालों के लिए प्रमुख चौराहों पर ओवरहेड क्रासिंग बनाई जानी चाहिए।
- श्याम किशोर दीक्षित, वरिष्ठ नागरिक
बढ़ते ट्रैफिक के बीच शहर की सड़कों पर पैदल चलना मुश्किल हो गया है। फुटपाथों पर वाहन खड़े रहते हैं। जाम की समस्या बढ़ रही है। ऐसे में शहर में फ्लाई ओवर आदि का निर्माण होना चाहिए।
- करुणा शंकर द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता
शहर में जाम की समस्या बढ़ गई है। इसके लिए जरूरी व्यवस्थाएं की जानी चाहिए, ताकि जाम न लगे।
- सरफराज, रेलवेगंज
शहर में रोजाना लगने वाले जाम से हर कोई परेशान होता है। ऐसे में इस ओर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
- बाबूलाल, नई बस्ती