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वैराग्य से परिपूर्ण जीवन संतों का आभूषण
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई
Updated Sat, 09 Apr 2016 11:55 PM IST
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कथा सुनाते महाराज।
- फोटो : अमर उजाला
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हरदोई। श्री राम जानकी मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में शनिवार को आचार्य ने भक्ति और ज्ञान के सामंजस्य को बताया। उन्होंने कहा कि वैराग्य और ज्ञान ही संतों के जीवन में आभूषण होते हैं। ईश्वर में पूर्ण आस्था रखने से ही मोक्ष प्राप्त की प्राप्ति होती है।
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श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य संतोष भाई ने कहा कि धर्म वही है जो प्राणी मात्र को सुख देकर प्रसन्नता का अनुभव कराए। संसार में मनुष्य का शरीर तो प्रभु की कृपा से प्राप्त हो जाता है लेकिन शरीर में मानवता की स्थापना पूर्व जन्म के संस्कार एवं संतों की कृपा से ही संभव है। भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से परिपूर्ण जीवन ही संतों का आभूषण है। नारद जी ने गृहस्थ जीवन में क्लेश को देखा और वृंदावन की यात्रा की।
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श्रोताओं को बताया कि भगवत भक्ति करने से आनंद की अनुभूति होती है। आनंद हमारे अपने भीतर है लेकिन वह आत्ममंथन करके ही प्राप्त हो सकता है। जैसे दूध में मक्खन है लेकिन वह दिखाई नहीं देता वैसे मक्खन को प्राप्त करने के लिए दूध से दही, दही का मंथन करके माखन प्राप्त होता है।
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आचार्य ने कहा कि शास्त्रों में श्रीमद्भागवत कथा को सत्कर्म कहा गया है। भागवत ही सभी ग्रंथों का सार है। क्योंकि भगवान जब भक्त के जीवन में आते हैं तो भक्त के सभी दुख दूर हो जाते हैं। आरती में राकेश अग्रवाल, गिरीश डिडवानिया, दिलीप गुप्ता गुड्डू, अपूर्व महेश्वरी, भगवान सरन, सत्येंद्र गुप्ता, अमित पांडेय, हरिओम गुप्ता, रेखा श्रीवास्तव, सपना पटेल, अनीता अग्रवाल, प्रभा गोयल, उर्मिला गुप्ता, विनीता पांडेय, चेतना महेश्वरी, राजबाला अग्रवाल आदि मौजूद रहे।