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सियासी जंग, रिश्ते तंग, चाचा भाजपा तो भतीजा सपा संग
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हरदोई। सियासत के भी खेल निराले हो चले हैं। इस बार के विधान सभा चुनाव में एक बार फिर रिश्ते तंग हो रहे हैं। जिले के सियासी जंग में विधायक चाचा के खिलाफ उनके भतीजे पूर्व सांसद अंशुल वर्मा चुनाव प्रचार में जुट गए हैं।
ऐसा ही नजारा लोक सभा चुनाव 2014 में देखने को मिला था, तब अंशुल वर्मा भाजपा से लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे और चाचा श्याम प्रकाश सपा से विधायक थे।
उस वक्त चाचा श्यामप्रकाश सपा के लिए प्रचार कर रहे थे, तो भतीजे अंशुल वर्मा चाचा की बात पर सिर्फ मुस्कुरा देते थे। इस बार भी कुछ ऐसा ही हाल चाचा का है।
विधायक श्याम प्रकाश इस चुनाव में गोपामऊ सीट से भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं, तो वहीं लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा से टिकट न मिलने से नाराज अंशुल वर्मा ने सपा ज्वाइन कर ली थी।
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तब से वह सपा के लिए कार्य कर रहे हैं। मूल रूप से भड़ायल पुष्पताली के निवासी भाजपा विधायक श्याम प्रकाश के बड़े भाई श्याम लाल आईएएस अफसर थे।
उनके पुत्र अंशुल वर्मा जो चंडीगढ़ में वकालत करते हैं, ने अपने पिता की जन्मभूमि की ओर रुख करते हुए लोकसभा चुनाव 2014 से पहले हरदोई जिले को अपनी कर्मभूमि बनाया।
उनके चाचा श्याम प्रकाश जिले में कई सीटों से विधायक रह चुके हैं। उस समय वह सपा से गोपामऊ सीट से विधायक थे।
भाई के पुत्र को जिले में सियासी पारी खेलने के लिए आता देख रिश्ते के लिहाज से उनके चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन सियासी और दलीय पाला खिंचे होने के नाते रिश्तों की मिठास खुलकर सामने न आ सकी थी।
दलीय बंधन और सियासत के इस खेल में चाचा सपा के प्रचार में थे, तो भतीजे अंशुल वर्मा भाजपा से सांसद बनने के बाद उनका आशीर्वाद लेने गए थे। निजी स्तर पर चाचा ने आशीर्वाद दिया था, लेकिन खुलकर एक साथ न आ सके।
बाद में चाचा भाजपा में शामिल होकर 2017 के चुनाव में गोपामऊ से भाजपा विधायक बने, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव आते-आते एक बार फिर सियासी खेल में चाचा-भतीजे अलग हो गए।
टिकट कटने से नाराज अंशुल ने भाजपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिया, हालांकि लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन सपा के लिए कार्य कर रहे हैं।
विधानसभा चुनाव में सपा नेता के रूप में पूर्व सांसद अंशुल जिले में सक्रिय होकर पार्टी के लिए प्रचार कर रहे हैं, तो उनके चाचा गोपामऊ सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं।
चाचा-भतीजे के बीच सियासी खेल एवं दलीय बंधन का संयोग देखकर उनके गांव से लेकर जिले भर में चर्चाएं होती रहती हैं। इस बात को लेकर पूर्व सांसद अंशुल वर्मा कहते हैं कि रिश्ते अपनी जगह हैं और पार्टी अपनी जगह।
इस समय चुनावी जंग है, सो सपा में होने के नाते पूरी ताकत के साथ जिले भर में पार्टी के लिए प्रचार कर रहे है। भाजपा प्रत्याशी श्याम प्रकाश इस बात को लेकर मुस्कुरा देते हैं।
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ऐसा ही नजारा लोक सभा चुनाव 2014 में देखने को मिला था, तब अंशुल वर्मा भाजपा से लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे और चाचा श्याम प्रकाश सपा से विधायक थे।
उस वक्त चाचा श्यामप्रकाश सपा के लिए प्रचार कर रहे थे, तो भतीजे अंशुल वर्मा चाचा की बात पर सिर्फ मुस्कुरा देते थे। इस बार भी कुछ ऐसा ही हाल चाचा का है।
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विधायक श्याम प्रकाश इस चुनाव में गोपामऊ सीट से भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं, तो वहीं लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा से टिकट न मिलने से नाराज अंशुल वर्मा ने सपा ज्वाइन कर ली थी।
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तब से वह सपा के लिए कार्य कर रहे हैं। मूल रूप से भड़ायल पुष्पताली के निवासी भाजपा विधायक श्याम प्रकाश के बड़े भाई श्याम लाल आईएएस अफसर थे।
उनके पुत्र अंशुल वर्मा जो चंडीगढ़ में वकालत करते हैं, ने अपने पिता की जन्मभूमि की ओर रुख करते हुए लोकसभा चुनाव 2014 से पहले हरदोई जिले को अपनी कर्मभूमि बनाया।
उनके चाचा श्याम प्रकाश जिले में कई सीटों से विधायक रह चुके हैं। उस समय वह सपा से गोपामऊ सीट से विधायक थे।
भाई के पुत्र को जिले में सियासी पारी खेलने के लिए आता देख रिश्ते के लिहाज से उनके चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन सियासी और दलीय पाला खिंचे होने के नाते रिश्तों की मिठास खुलकर सामने न आ सकी थी।
दलीय बंधन और सियासत के इस खेल में चाचा सपा के प्रचार में थे, तो भतीजे अंशुल वर्मा भाजपा से सांसद बनने के बाद उनका आशीर्वाद लेने गए थे। निजी स्तर पर चाचा ने आशीर्वाद दिया था, लेकिन खुलकर एक साथ न आ सके।
बाद में चाचा भाजपा में शामिल होकर 2017 के चुनाव में गोपामऊ से भाजपा विधायक बने, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव आते-आते एक बार फिर सियासी खेल में चाचा-भतीजे अलग हो गए।
टिकट कटने से नाराज अंशुल ने भाजपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिया, हालांकि लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन सपा के लिए कार्य कर रहे हैं।
विधानसभा चुनाव में सपा नेता के रूप में पूर्व सांसद अंशुल जिले में सक्रिय होकर पार्टी के लिए प्रचार कर रहे हैं, तो उनके चाचा गोपामऊ सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं।
चाचा-भतीजे के बीच सियासी खेल एवं दलीय बंधन का संयोग देखकर उनके गांव से लेकर जिले भर में चर्चाएं होती रहती हैं। इस बात को लेकर पूर्व सांसद अंशुल वर्मा कहते हैं कि रिश्ते अपनी जगह हैं और पार्टी अपनी जगह।
इस समय चुनावी जंग है, सो सपा में होने के नाते पूरी ताकत के साथ जिले भर में पार्टी के लिए प्रचार कर रहे है। भाजपा प्रत्याशी श्याम प्रकाश इस बात को लेकर मुस्कुरा देते हैं।