फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   Passenger Bay - 'Bus', traveling in trouble

यात्री बे-‘बस’, मुश्किल में सफर

Sat, 05 Feb 2022 10:33 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 05 Feb 2022 10:33 PM IST
विज्ञापन
Passenger Bay - 'Bus', traveling in trouble
हरदोई। रोडवेज के बेड़े की करीब पांच दर्जन बसें विधानसभा चुनाव की ड्यूटी में चली गईं हैं। इन बसों पर 1200 से ज्यादा यात्री रोजाना सफर कर रहे थे।
विज्ञापन

परेशानी की बात यह है कि इस बार यात्रियों को रेल सुविधा का भी बेहतर लाभ नहीं मिल पा रहा है। बसों के चुनाव में लगने से यात्रियों का सफर काफी मुश्किल हो गया है।
कोविड प्रोटोकॉल के चलते आरक्षण सीमा से बाहर यात्रियों को ट्रेनों में प्रवेश नहीं मिल रहा, जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में रोडवेज बसों की व्यस्तता के बाद रेलवे ही इन यात्रियों के लिए विकल्प होता था, लेकिन अबकी रेलवे से भी यात्रियों को कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन

रोडवेज विभाग के मुताबिक, हरदोई डिपो की 59 बसों को विधानसभा चुनाव संपन्न कराने वाले कार्मिकों को लाने और ले जाने के लिए लगाया गया है। 35 रोडवेज बसें पहले ही भेजी जा चुकी थीं, अब 24 बसों की दूसरी खेप भी भेज दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसे में बसों का भारी टोटा हो गया है। छोटे रूट की एक बस औसतन चार से छह फेरे लगाती है। एक बस की क्षमता 52 यात्रियों की है। इस प्रकार हर बस प्रतिदिन 200 से ज्यादा यात्रियों को सेवा देती है।
ऐसे में 59 बसों के कम हो जाने से 1200 से ज्यादा यात्री प्रभावित हो रहे हैं। इन यात्रियों के पास विकल्प के तौर पर केवल डग्गामार वाहन शेष हैं। रोडवेज बसों की चुनावी व्यस्तता का सबसे ज्यादा फायदा इस बार डग्गामार वाहनों को हो रहा है।
कोविड प्रोटोकॉल की बंदिशों के कारण रेलवे का भी सहारा छूटने के बाद यात्रियों के पास आखिरी विकल्प डग्गामार वाहन बचे हैं। ऐसे में प्राइवेट टैक्सी और बसों के मालिकों ने मनमाना किराया वसूलना शुरू कर दिया है।
मुश्किल यह है कि अधिक किराया वहन करने के बाद भी यात्रियों को बेहतर सुविधा प्राप्त नहीं हो रही है। प्राइवेट वाहन चालक क्षमता से ज्यादा यात्रियों को ठूंस-ठूंसकर ले जा रहे हैं।
तीन गुना बढ़ा टैक्सी का किराया
शादी की सहालगों से ज्यादा चुनावी सहालग टैक्सी चालकों को मुनाफा दे रही है। प्राइवेट टैक्सी स्टैंड पर टैक्सियों का किराया तीन गुना तक बढ़ा दिया गया है। खास बात यह है कि अधिक किराए के बावजूद टैक्सियां उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
वाहनों की तंगी के कारण सबसे ज्यादा प्राइवेट टैक्सियों पर ही सवारियों का भार बढ़ा है। लोग कोरोना संक्रमण के चलते प्राइवेट बसों और डग्गामार वाहनों में ठूंसकर जाना पसंद नहीं कर रहे।
बसों के फेरे बढ़ाकर और दूसरे डिपो की बसों की मदद से यात्रियों को सेवा प्रदान की जाएगी। यात्रियों को कोई असुविधा न हो इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
-मनोज त्रिवेदी, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज।
हरदोई डिपो का डंका, कमाई में अव्वल
हरदोई। परिवहन विभाग की रोडवेज सेवा में हरदोई परिक्षेत्र ने प्रदेश में सबसे ज्यादा कमाई की है। लखनऊ, गाजियाबाद समेत प्रदेश के सभी 19 परिक्षेत्रों को पछाड़कर रोडवेज डिपो पहले नंबर पर रहा है।
जनवरी में हरदोई रोडवेज ने दो करोड़ 13 लाख 72 हजार रुपये का मुनाफा कमाया, जबकि बसों की संख्या और क्षेत्र के मामले में इससे बड़े परिक्षेत्र लखनऊ, गाजियाबाद और गोरखपुर घाटे में रहे।
अच्छी कमाई के साथ हाथ खींचकर खर्च करने की व्यवस्था से हरदोई परिक्षेत्र बेहतर लाभ कमा पाया है। कोरोना के दौर में जब ज्यादातर परिक्षेत्र घाटे में जा रहे, तब भी हरदोई ने विभाग को लाभ दिया है।
जनवरी में हरदोई परिक्षेत्र ने 22 करोड़ 30 लाख 73 हजार रुपये का व्यवसाय किया। खर्च 20 करोड़ 17 लाख एक हजार रुपये ही हुआ, जबकि लखनऊ परिक्षेत्र का व्यवसाय 28 करोड़ 62 हजार रुपये होने के बावजूद अधिक खर्च से घाटे में चला गया।
इस परिक्षेत्र ने 34 करोड़ एक लाख 89 हजार रुपये का खर्च जनवरी में किया। यही हाल गाजियाबाद परिक्षेत्र का है। यहां जनवरी में 28 करोड़ 70 लाख 33 हजार रुपये की आय के लिए 31 करोड़ 45 लाख 90 हजार रुपये खर्च कर दिए।

गोरखपुर परिक्षेत्र में 21 करोड़ 13 लाख 74 हजार रुपये का व्यवसाय हुआ, जबकि 23 करोड़ 53 लाख 59 हजार रुपये का खर्च हो गया।
पुरानी बसों के सहारे मुनाफे में हरदोई
हरदोई परिक्षेत्र ने पुरानी बसों के सहारे प्रदेश में नंबर एक की कमाई का तमगा हासिल किया है।
गाजियाबाद में 10 वर्ष से पुराने वाहन न चलने के नियम से वहां की पुरानी बसें यहां भेज दी जाती हैं, जबकि यहां की 10 वर्ष से कम आयु की बसों को गाजियाबाद परिक्षेत्र में लगाया जाता है। हाल ही में हरदोई परिक्षेत्र ने गाजियाबाद की 10 पुरानी बसें लेकर अपनी कम आयु की बसें दी हैं।
ये हैं हरदोई से बड़े परिक्षेत्र
लखनऊ परिक्षेत्र-1006 बसें
गाजियाबाद परिक्षेत्र-885 बसें
गोरखपुर परिक्षेत्र-757 बसें
हरदोई परिक्षेत्र-705 बसें
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed