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Hardoi News: बिलग्राम में नाव के सहारे आवागमन, झोपड़ियों में भरा पानी
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फोटो 29: ठकुरीखेड़ा मुख्य मार्ग पर पानी आने से आवागमन ठप। संवाद
हरदोई। गंगा में पानी की बढ़ोतरी थमी है, लेकिन रामगंगा नदी और गर्रा नदी के पानी में दो दिनों से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। रामगंगा और गर्रा नदी के पानी बढ़ोतरी से लोगों में परेशानी भी बढ़ी हैं। वहीं बिलग्राम क्षेत्र में गंगा नदी का पानी अब कम न होने से मंगलवार को भी लोगों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। खेतों में पानी भरा होने से फसलों के खराब होने की आशंका बढ़ती जा रही है। फसलों और नदियों में पानी बढ़ने से प्रभावित क्षेत्र के लोगों की चिंता भी बढ़ी है।
बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी और बरसात से जिले में प्रवाहित गंगा, रामगंगा और गर्रा नदियों के पानी में कमी और बढ़ोतरी का क्रम जारी है। दूसरे दिन मंगलवार को गर्रा नदी के पानी 20 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पानी शाहजहांपुर के मुमोक्ष आश्रम घाट पर 145.35 मीटर पर पहुंच गया है। वहीं नानकसागर बैराज से 4,088 और ड्यूनी बैराज से 7,821 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा नदी के पानी में 15 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और पानी 136.05 मीटर पर आ गया है। वहीं गंगा के पानी में राजघाट पर 10 सेंटीमीटर की कमी आई है। गंगा नदी में नरौरा बैराज से 77,819 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
बिलग्राम प्रतिनिधि के मुताबिक, गंगा नदी में बीते तीन दिनों से घट रहा पानी मंगलवार को कम न होने से लोगों की चिंता फिर बढ़ गई है। मदारी पुरवा, पुन्ना पुरवा और जरेला में आबादी से पानी तो निकल गया है, लेकिन गांव के आसपास पानी अभी बना हुआ है। बाढ़ ने ग्रामीणों को दुश्वारियों में धकेल दिया है। जरेला, पुन्ना पुरवा और बहरौली विद्यालय बंद हैं। बाढ़ से बीमारियों की आशंका बढ़ गई है। स्वास्थ्य टीमें जरेला और पुन्ना पुरवा में भेजी जा रही हैं। आवागमन के लिए बाढ़ प्रभावित गांवों में लोग आवागमन के लिए नावों का सहारा ले रहे हैं। चिरंजू पुरवा से लेकर बाण, जरेला, पुन्ना पुरवा क्षेत्र में पानी से भरा हुआ है। धान, मक्का और तिल्ली की फसलें प्रभावित हुई हैं। एसडीएम एन राम ने बताया कि पानी घटा है। मंगलवार को भी राहत सामग्री की किट जरेला में वितरित कराई गई हैं। पाली प्रतिनिधि के मुताबिक, गर्रा नदी के जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी देखी गई। बेगराजपुर, बैजूपुर, केवलपुर, धर्मपुर, लखमापुर, उमरिया, बाबरपुर, रणधीरपुर, गुजिदेई, पहाड़पुर आदि तटवर्ती गांवों के लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
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सई नदी के उफान से फसलें डूबीं और रास्ता ठप
बेहंदर। सई नदी में बढ़ते जलस्तर ने ब्लॉक क्षेत्र के ठकुरीखेड़ा, सुखन खेड़ा, धोकल खेड़ा आदि गांव के ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। नदी का पानी अब गांव के किनारे खेतों में आ गया है। जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो पानी जल्द ही आबादी के नजदीक पहुंच सकता है। ब्लॉक मुख्यालय जाने वाले मार्ग पर पानी आने से आवागमन बंद हो गया है। ठकुरीखेड़ा गांव पास से सई नदी निकली है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर गांव के चारों ओर पानी का दबाव बढ़ने लगा और खेतों में खड़ी फसलें डूबने लगी। फसलों के पानी में डूबने से किसानों को नुकसान हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक, ब्लॉक मुख्यालय और तहसील मुख्यालय जाने के लिए पांच किलोमीटर दूरी तय करके जाना पड़ रहा है। धान, मक्का और तिल की करीब 50 बीघा फसल बाढ़ के पानी में डूब गई है।
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बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी और बरसात से जिले में प्रवाहित गंगा, रामगंगा और गर्रा नदियों के पानी में कमी और बढ़ोतरी का क्रम जारी है। दूसरे दिन मंगलवार को गर्रा नदी के पानी 20 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पानी शाहजहांपुर के मुमोक्ष आश्रम घाट पर 145.35 मीटर पर पहुंच गया है। वहीं नानकसागर बैराज से 4,088 और ड्यूनी बैराज से 7,821 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा नदी के पानी में 15 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और पानी 136.05 मीटर पर आ गया है। वहीं गंगा के पानी में राजघाट पर 10 सेंटीमीटर की कमी आई है। गंगा नदी में नरौरा बैराज से 77,819 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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बिलग्राम प्रतिनिधि के मुताबिक, गंगा नदी में बीते तीन दिनों से घट रहा पानी मंगलवार को कम न होने से लोगों की चिंता फिर बढ़ गई है। मदारी पुरवा, पुन्ना पुरवा और जरेला में आबादी से पानी तो निकल गया है, लेकिन गांव के आसपास पानी अभी बना हुआ है। बाढ़ ने ग्रामीणों को दुश्वारियों में धकेल दिया है। जरेला, पुन्ना पुरवा और बहरौली विद्यालय बंद हैं। बाढ़ से बीमारियों की आशंका बढ़ गई है। स्वास्थ्य टीमें जरेला और पुन्ना पुरवा में भेजी जा रही हैं। आवागमन के लिए बाढ़ प्रभावित गांवों में लोग आवागमन के लिए नावों का सहारा ले रहे हैं। चिरंजू पुरवा से लेकर बाण, जरेला, पुन्ना पुरवा क्षेत्र में पानी से भरा हुआ है। धान, मक्का और तिल्ली की फसलें प्रभावित हुई हैं। एसडीएम एन राम ने बताया कि पानी घटा है। मंगलवार को भी राहत सामग्री की किट जरेला में वितरित कराई गई हैं। पाली प्रतिनिधि के मुताबिक, गर्रा नदी के जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी देखी गई। बेगराजपुर, बैजूपुर, केवलपुर, धर्मपुर, लखमापुर, उमरिया, बाबरपुर, रणधीरपुर, गुजिदेई, पहाड़पुर आदि तटवर्ती गांवों के लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
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सई नदी के उफान से फसलें डूबीं और रास्ता ठप
बेहंदर। सई नदी में बढ़ते जलस्तर ने ब्लॉक क्षेत्र के ठकुरीखेड़ा, सुखन खेड़ा, धोकल खेड़ा आदि गांव के ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। नदी का पानी अब गांव के किनारे खेतों में आ गया है। जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो पानी जल्द ही आबादी के नजदीक पहुंच सकता है। ब्लॉक मुख्यालय जाने वाले मार्ग पर पानी आने से आवागमन बंद हो गया है। ठकुरीखेड़ा गांव पास से सई नदी निकली है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर गांव के चारों ओर पानी का दबाव बढ़ने लगा और खेतों में खड़ी फसलें डूबने लगी। फसलों के पानी में डूबने से किसानों को नुकसान हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक, ब्लॉक मुख्यालय और तहसील मुख्यालय जाने के लिए पांच किलोमीटर दूरी तय करके जाना पड़ रहा है। धान, मक्का और तिल की करीब 50 बीघा फसल बाढ़ के पानी में डूब गई है।

फोटो 29: ठकुरीखेड़ा मुख्य मार्ग पर पानी आने से आवागमन ठप। संवाद