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अब तीसरे अशरे की तैयारियां शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Wed, 08 Jul 2015 12:05 AM IST
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रमजान शरीफ का दूसरा अशरा भी मुकम्मल होने को है।
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इसके साथ ही इफ्तार पार्टियों का भी आगाज हो गया। ज्यादातार मसजिदों में
तरावीह के दौरान होने वाला कुरान पाठ भी पूरा हो गया है। मगफिरत के इस
दूसरे अशरे में रोजेदार मसजिदों में इबादतोें के बाद अल्लाह से अपने
गुनाहों पर माफी मांग रहे हैं।
खासी फजीलतों वाले आखिरी अशरे में रोजेदार विशेष इबादतों की तैयारी में हैं। रमजान के तीन अशरे की अलग-अलग विशेषताएं हासिल हैं। अब तक रमजान का पहला अशरा पूरा हो गया और दूसरा अशरा पूरे होने के करीब है। दूसरे अशरे को मगफिरत का अशरा कहा गया है, जिसका मतलब यही है कि अल्लाह इस अशरे में गुनाहोें पर शर्मिंदा होने और माफी मांगने वाले अपने बंदों को के गुनाह माफ करता है।
बुधवार को मगरिब नमाज की अदायगी के साथ ही रमजान का दूसरा अशरा भी पूरा हो जाएगा। साथ ही तीसरे अशरे की शुरुआत होगी। इस अंतिम अशरे को जहन्नुम से छुटकारे का अशरा कहा गया। इस अशरे में कई खास इबादतें होती हैं, जो पहले और दूसरे अशरे में नहीं होती। एतकाफ, लैलतुल कद्र इस अशरे की खास इबादतें हैं।
एतकाफ की इबादत बीसवें रोजे का इफ्तार होने के बाद से शुरू होती है। ईद का चांद नजर आने तक जारी रहता है। एतकाफ में 21 रमजान से चांद नजर आने तक यानी 29 या 30 रमजान तक लगातार मसजिद में ठहर कर खुदा की इबादत की जाती है।
पूरी बस्ती पर यह इबादत जरूरी है, पर किसी एक शख्स से अदायगी पूरी बस्ती की तरफ से भी हो जाएगी, लेकिन यदि कोई भी यह इबादत न करे तो पूरी बस्ती गुनाहगार होती। इसके लिए मसजिदों में तैयारियां जारी हैं। दूसरी बड़ी फजीलत इसी रात में लैलतुल कद्र का होना है।
लैलतुल कद्र एक विशेष रात है, जिसमें की गई इबादत हजार महीनों की इबादत से भी ज्यादा अफजल है। आखिरी अशरे में इसे तलाश करने का हुक्म है। कोई निश्चित तारीख तय नहीं है, पर धार्मिक किताबों और उलमा-ए-कराम के अनुसार रमजान के आखिरी अशरे की ताक रातों और 29वीं रात को इस रात की तलाश की जानी चाहिए।
सारी रात जाग कर इबादतें करने का हुक्म दिया गया। अब जबकि दूसरे अशरा भी अंतिम दिनों में पहुंच गया है, इफ्तार पार्टियों का भी आगाज हो गया। इस क्रम में मौलाना डा. अब्दुर्रशीद कासमी की ओर से नागर में आयोजित इफ्तार पार्टी में भीड़ उमड़ी।
चेयरमैन डा. सईद खां, शिफायतुल्लाह खां, डा. मोहम्मद सईद, मुफ्ती नजीब कासमी, मोबीन मंसूरी आदि मौजूद थे। उधर, मुरीदखानी स्थित शोजब जैदी के आवास पर भी इफ्तार पार्टी का आयोजन हुआ, जिसमें बसपा नेता और कार्यकर्ताओं समेत बड़ी तादाद में मुसलिम शामिल हुए।
खासी फजीलतों वाले आखिरी अशरे में रोजेदार विशेष इबादतों की तैयारी में हैं। रमजान के तीन अशरे की अलग-अलग विशेषताएं हासिल हैं। अब तक रमजान का पहला अशरा पूरा हो गया और दूसरा अशरा पूरे होने के करीब है। दूसरे अशरे को मगफिरत का अशरा कहा गया है, जिसका मतलब यही है कि अल्लाह इस अशरे में गुनाहोें पर शर्मिंदा होने और माफी मांगने वाले अपने बंदों को के गुनाह माफ करता है।
बुधवार को मगरिब नमाज की अदायगी के साथ ही रमजान का दूसरा अशरा भी पूरा हो जाएगा। साथ ही तीसरे अशरे की शुरुआत होगी। इस अंतिम अशरे को जहन्नुम से छुटकारे का अशरा कहा गया। इस अशरे में कई खास इबादतें होती हैं, जो पहले और दूसरे अशरे में नहीं होती। एतकाफ, लैलतुल कद्र इस अशरे की खास इबादतें हैं।
एतकाफ की इबादत बीसवें रोजे का इफ्तार होने के बाद से शुरू होती है। ईद का चांद नजर आने तक जारी रहता है। एतकाफ में 21 रमजान से चांद नजर आने तक यानी 29 या 30 रमजान तक लगातार मसजिद में ठहर कर खुदा की इबादत की जाती है।
पूरी बस्ती पर यह इबादत जरूरी है, पर किसी एक शख्स से अदायगी पूरी बस्ती की तरफ से भी हो जाएगी, लेकिन यदि कोई भी यह इबादत न करे तो पूरी बस्ती गुनाहगार होती। इसके लिए मसजिदों में तैयारियां जारी हैं। दूसरी बड़ी फजीलत इसी रात में लैलतुल कद्र का होना है।
लैलतुल कद्र एक विशेष रात है, जिसमें की गई इबादत हजार महीनों की इबादत से भी ज्यादा अफजल है। आखिरी अशरे में इसे तलाश करने का हुक्म है। कोई निश्चित तारीख तय नहीं है, पर धार्मिक किताबों और उलमा-ए-कराम के अनुसार रमजान के आखिरी अशरे की ताक रातों और 29वीं रात को इस रात की तलाश की जानी चाहिए।
सारी रात जाग कर इबादतें करने का हुक्म दिया गया। अब जबकि दूसरे अशरा भी अंतिम दिनों में पहुंच गया है, इफ्तार पार्टियों का भी आगाज हो गया। इस क्रम में मौलाना डा. अब्दुर्रशीद कासमी की ओर से नागर में आयोजित इफ्तार पार्टी में भीड़ उमड़ी।
चेयरमैन डा. सईद खां, शिफायतुल्लाह खां, डा. मोहम्मद सईद, मुफ्ती नजीब कासमी, मोबीन मंसूरी आदि मौजूद थे। उधर, मुरीदखानी स्थित शोजब जैदी के आवास पर भी इफ्तार पार्टी का आयोजन हुआ, जिसमें बसपा नेता और कार्यकर्ताओं समेत बड़ी तादाद में मुसलिम शामिल हुए।