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Hardoi News: ऑनलाइन सिस्टम बीमार, मरीजों का इलाज और जांच दोनों बेहाल
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज की ऑनलाइन व्यवस्थाएं आए दिन बीमार रहती हैं। सर्वर में खराबी या तकनीकी समस्या के चलते मरीजों के ऑनलाइन पंजीकरण नहीं होते हैं। उन्हें मैन्युअल पर्चे थमा दिए जाते हैं लेकिन इन पर केंद्रीय रजिस्ट्रेशन नंबर (सीआरएन) दर्ज न होने से जांच कराने में दिक्कतें आती हैं। हालात यह हैं कि महीने में दो से तीन बार ऑनलाइन व्यवस्था प्रभावित होती है। इसके बाद भी स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था बाधित होने पर मरीजों की लंबी कतारें लग जाती हैं जबकि हर महीने दो से तीन बार ऑनलाइन सिस्टम प्रभावित होता रहता है। इसके बावजूद जिम्मेदार अफसर समस्या के स्थायी समाधान के प्रति बेफिक्र बने हुए हैं। जैसे ही ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था बाधित होती है, पर्चा काउंटर पर ऑनलाइन पंजीकरण नहीं हो पाता। भीड़ को निपटाने के लिए कर्मचारी मैन्युअल पर्चा बना देते हैं। जिन मरीजों को तत्काल ब्लड टेस्ट, एक्सरे या अन्य जांचों की जरूरत होती है उन्हें सीआरएन दर्ज न होने के अभाव में पैथोलॉजी विभाग के चक्कर काटने पड़ते हैं।
15 सितंबर को चार घंटे ठप रहा था सर्वर
बीते 15 सितंबर के दिन भी सुबह 08 बजे से दोपहर 12 बजे तक सर्वर पूरी तरह ठप रहा। इसके चलते पुरुष और महिला अस्पताल दोनों जगह मरीजों के ऑनलाइन पर्चे नहीं बन सके। करीब चार घंटे तक मरीज और उनके परिजन रजिस्ट्रेशन काउंटर पर परेशान होते रहे।
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चार अगस्त को भी मैन्युअल पर्चों के भरोसे बीता था दिन
इससे पहले चार अगस्त को भी दिनभर सर्वर की गड़बड़ी के कारण ऑनलाइन पंजीकरण ठप रहा था। तब भी कर्मचारियों को हाथ से पर्चे बनाकर स्थिति संभालने की कोशिश करनी पड़ी थी। बार-बार सर्वर ठप होने की यह समस्या साफ बताती है कि मेडिकल कॉलेज का डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर कितना लचर है।
तकनीकी खामी और अन्य कारणों की वजह से ऑनलाइन सिस्टम प्रभावित हो जाता है। वैसे कार्यदायी संस्था को तत्काल अवगत करा दिया जाता है और समस्या दूर हो जाती है लेकिन कोशिश की जा रही है कि कोई स्थाई व्यवस्था की जाए। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था बाधित होने पर मरीजों की लंबी कतारें लग जाती हैं जबकि हर महीने दो से तीन बार ऑनलाइन सिस्टम प्रभावित होता रहता है। इसके बावजूद जिम्मेदार अफसर समस्या के स्थायी समाधान के प्रति बेफिक्र बने हुए हैं। जैसे ही ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था बाधित होती है, पर्चा काउंटर पर ऑनलाइन पंजीकरण नहीं हो पाता। भीड़ को निपटाने के लिए कर्मचारी मैन्युअल पर्चा बना देते हैं। जिन मरीजों को तत्काल ब्लड टेस्ट, एक्सरे या अन्य जांचों की जरूरत होती है उन्हें सीआरएन दर्ज न होने के अभाव में पैथोलॉजी विभाग के चक्कर काटने पड़ते हैं।
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15 सितंबर को चार घंटे ठप रहा था सर्वर
बीते 15 सितंबर के दिन भी सुबह 08 बजे से दोपहर 12 बजे तक सर्वर पूरी तरह ठप रहा। इसके चलते पुरुष और महिला अस्पताल दोनों जगह मरीजों के ऑनलाइन पर्चे नहीं बन सके। करीब चार घंटे तक मरीज और उनके परिजन रजिस्ट्रेशन काउंटर पर परेशान होते रहे।
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चार अगस्त को भी मैन्युअल पर्चों के भरोसे बीता था दिन
इससे पहले चार अगस्त को भी दिनभर सर्वर की गड़बड़ी के कारण ऑनलाइन पंजीकरण ठप रहा था। तब भी कर्मचारियों को हाथ से पर्चे बनाकर स्थिति संभालने की कोशिश करनी पड़ी थी। बार-बार सर्वर ठप होने की यह समस्या साफ बताती है कि मेडिकल कॉलेज का डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर कितना लचर है।
तकनीकी खामी और अन्य कारणों की वजह से ऑनलाइन सिस्टम प्रभावित हो जाता है। वैसे कार्यदायी संस्था को तत्काल अवगत करा दिया जाता है और समस्या दूर हो जाती है लेकिन कोशिश की जा रही है कि कोई स्थाई व्यवस्था की जाए। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य