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Hardoi News: मेडिकल कॉलेज की नई अल्ट्रासाउंड मशीन ताले में, पुरानी खराब
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फोटो-05- मेडिकल कॉलेज में बंद अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर खड़ी महिला। संवाद
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और त्वरित जांच के दावे धरातल पर दम तोड़ रहे हैं। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है। करीब तीन महीने पहले आई नई अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन अभी तक चालू नहीं हो सकी। वहीं मरीजों की जांच का सहारा बनी पुरानी मशीन भी मंगलवार दोपहर बाद अचानक खराब हो गई। इस वजह से दूर-दराज से आने वाले मरीजों को बिना जांच के लौटना पड़ा।
मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड जांच व्यवस्था पूरी तरह से मनमाने ढंग से चल रही है। एक ओर एक्सरे और सीटी स्कैन जांच 24 घंटे होती है। वहीं अल्ट्रासाउंड जांच सिर्फ एक से दो बजे तक ही होती हैं। सुबह नौ से दोपहर दो बजे तक रोजाना 70 से 80 मरीजों की जांच की जाती है जबकि मरीज इससे कहीं अधिक आते हैं इनमें महिला अस्पताल से गर्भवतियां भी पहुंचती हैं। ऐसे में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण मरीजों को दो से तीन दिन बाद का नंबर दिया जा रहा है।
इसको लेकर मरीज वैसे भी बार-बार दौड़ लगाने को मजबूर हैं। वहीं मंगलवार को दोपहर बाद पुरानी मशीन खराब होने से बुधवार को जांच कराने पहुंचे मरीजों की उम्मीदों पर भी पानी फिर गया। इनमें वह मरीज शामिल थे जिनको शनिवार को नंबर देकर जांच के लिए बुलाया गया था। निर्धारित दिन अस्पताल पहुंचने के बाद भी उन्हें बिना जांच लौटना पड़ा।
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खराब हुआ मशीन का प्रोब
मेडिकल कॉलेज की अल्ट्रासाउंड मशीन का प्रोब खराब हो गया है। प्रोब हाथ में पकड़ने वाला ट्रांसड्यूसर होता है इससे ही मरीज के शरीर पर लगाकर अल्ट्रासाउंड वेव्स की मदद से स्क्रीन पर इमेज बनती है। जानकारों के मुताबिक यह प्रोब काफी पुराना हो गया है और घिस गया है। इस वजह से इसमें पायजोक्लिनिक क्रिस्टल्स मौजूद नहीं हैं जिससे यह उच्च-आवृत्ति वाली ध्वनि तरंग न भेज पा रहा है न ही लौटती हुई ध्वनि तरंगों को प्राप्त कर पा रहा है।
तीन महीने बाद भी नई मशीन चालू नहीं
हैरानी की बात यह है कि पुरानी मशीन के खराब होने की स्थिति में मरीजों को राहत देने के लिए लाई गई नई मशीन भी अब तक चालू नहीं हो सकी है। बताया जा रहा है कि मशीन का इंस्टॉलेशन पूरा नहीं हुआ है। इसके अलावा जांच रिपोर्ट के लिए जरूरी प्रिंटर भी उपलब्ध नहीं है। इंजीनियर को इसकी जानकारी दिए जाने की बात कही जा रही है लेकिन मरीजों को राहत मिलने का इंतजार है।
परेशान हो रहे मरीज
सांडी के औलादगंज निवासी राम प्रकाश ने बताया कि उन्हें शनिवार को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए बुधवार का दिन दिया गया था। वह सुबह मेडिकल कॉलेज पहुंच गए लेकिन मशीन खराब होने की जानकारी देकर वापस कर दिया गया।
टड़ियावां के जनसरी निवासी अनुराधा ने बताया कि गांव से किराया खर्च कर जांच कराने आए थे। पहले ही तीन दिन बाद नंबर मिला था और अब मशीन खराब बता दी गई। नई मशीन उपलब्ध होने के बावजूद जांच नहीं हो पा रही है।
पुरानी मशीन में आई तकनीकी खराबी को ठीक करने के लिए इंजीनियर बुला लिए गए हैं। नई मशीन के इंस्टॉलेशन के निर्देश भी दे दिए गए हैं। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड जांच व्यवस्था पूरी तरह से मनमाने ढंग से चल रही है। एक ओर एक्सरे और सीटी स्कैन जांच 24 घंटे होती है। वहीं अल्ट्रासाउंड जांच सिर्फ एक से दो बजे तक ही होती हैं। सुबह नौ से दोपहर दो बजे तक रोजाना 70 से 80 मरीजों की जांच की जाती है जबकि मरीज इससे कहीं अधिक आते हैं इनमें महिला अस्पताल से गर्भवतियां भी पहुंचती हैं। ऐसे में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण मरीजों को दो से तीन दिन बाद का नंबर दिया जा रहा है।
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इसको लेकर मरीज वैसे भी बार-बार दौड़ लगाने को मजबूर हैं। वहीं मंगलवार को दोपहर बाद पुरानी मशीन खराब होने से बुधवार को जांच कराने पहुंचे मरीजों की उम्मीदों पर भी पानी फिर गया। इनमें वह मरीज शामिल थे जिनको शनिवार को नंबर देकर जांच के लिए बुलाया गया था। निर्धारित दिन अस्पताल पहुंचने के बाद भी उन्हें बिना जांच लौटना पड़ा।
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खराब हुआ मशीन का प्रोब
मेडिकल कॉलेज की अल्ट्रासाउंड मशीन का प्रोब खराब हो गया है। प्रोब हाथ में पकड़ने वाला ट्रांसड्यूसर होता है इससे ही मरीज के शरीर पर लगाकर अल्ट्रासाउंड वेव्स की मदद से स्क्रीन पर इमेज बनती है। जानकारों के मुताबिक यह प्रोब काफी पुराना हो गया है और घिस गया है। इस वजह से इसमें पायजोक्लिनिक क्रिस्टल्स मौजूद नहीं हैं जिससे यह उच्च-आवृत्ति वाली ध्वनि तरंग न भेज पा रहा है न ही लौटती हुई ध्वनि तरंगों को प्राप्त कर पा रहा है।
तीन महीने बाद भी नई मशीन चालू नहीं
हैरानी की बात यह है कि पुरानी मशीन के खराब होने की स्थिति में मरीजों को राहत देने के लिए लाई गई नई मशीन भी अब तक चालू नहीं हो सकी है। बताया जा रहा है कि मशीन का इंस्टॉलेशन पूरा नहीं हुआ है। इसके अलावा जांच रिपोर्ट के लिए जरूरी प्रिंटर भी उपलब्ध नहीं है। इंजीनियर को इसकी जानकारी दिए जाने की बात कही जा रही है लेकिन मरीजों को राहत मिलने का इंतजार है।
परेशान हो रहे मरीज
सांडी के औलादगंज निवासी राम प्रकाश ने बताया कि उन्हें शनिवार को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए बुधवार का दिन दिया गया था। वह सुबह मेडिकल कॉलेज पहुंच गए लेकिन मशीन खराब होने की जानकारी देकर वापस कर दिया गया।
टड़ियावां के जनसरी निवासी अनुराधा ने बताया कि गांव से किराया खर्च कर जांच कराने आए थे। पहले ही तीन दिन बाद नंबर मिला था और अब मशीन खराब बता दी गई। नई मशीन उपलब्ध होने के बावजूद जांच नहीं हो पा रही है।
पुरानी मशीन में आई तकनीकी खराबी को ठीक करने के लिए इंजीनियर बुला लिए गए हैं। नई मशीन के इंस्टॉलेशन के निर्देश भी दे दिए गए हैं। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य

फोटो-05- मेडिकल कॉलेज में बंद अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर खड़ी महिला। संवाद