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गद्दे फटे, चादरें गायब और टपकती छत
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संडीला। 32 वर्ष से चल रहा 25 बेड का राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय बेहाल है। इसकी स्थापना किराये के भवन में 1989 में हुई थी। छह कमरों के भवन में दो में डॉक्टर बैठते हैं।
एक में दवा वितरण और एक में स्टाफ नर्स बैठती हैं। बाकी कमरे बंद पड़े हैं। बेड के गद्दे फ़टे और चादरें गायब हैं। भवन अत्यंत जर्जर हो चुका है। जगह-जगह पर प्लास्टर टूटा है। बरसात में छतें टपकती हैं, जिसके नीचे बैठना मुश्किल है।
भवन की न तो आज तक मरम्मत हुई और न ही पुताई। वायरिंग पूरी तरह से ध्वस्त है। शौचालय जर्जर और दरवाजे तक गायब हैं। दवाओं के डिब्बे तितर-बितर पड़े हैं।
हलीम अहमद जो वार्ड ब्वाय है, पूरा दिन सन्नाटे में बैठा रहते हैं। स्टाफ नर्स पूनम शर्मा, कविता व उर्मिला द्विवेदी हैं। एक डॉक्टर तो 10 वर्षों से नियुक्त हैं, लेकिन वह गायब ही रहते हैं।
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लोगों का कहना है कि डॉक्टर हफ्ते में केवल दो बार आते हैं। एक बोर्ड लगा हुआ है, जिस पर नियुक्त स्टाफ के नाम लिखे हुए हैं। इनमें डॉ. हरिशंकर, सतीश चंद्र चीफ फार्मेसिस्ट, शिवकुमार मौर्य फार्मेसिस्ट, राकेश चौकीदार और हलीम अहमद वार्ड ब्वाय के नाम लिखे हैं।
बताया गया कि सतीश चंद्र काफी समय से नहीं हैं। फार्मेसिस्ट शिवकुमार मौर्य करीब छह माह पूर्व से गोनी आयुर्वेदिक अस्पताल में अटैच है। इस अस्पताल का आज तक जिला स्तरीय अथवा स्थानीय प्रशासनिक स्तर का अधिकारी निरीक्षण करने नहीं पहुंचे।
अस्पताल का समय सुबह 10:00 से शाम चार बजे तक है, लेकिन कर्मचारी दो बजे ही अस्पताल बंद करके चले जाते हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के दम पर ही अस्पताल चल रहा है।
पिछले दिनों तहसील दिवस पर नगर के कई लोगों ने डीएम और एसडीएम से इस अस्पताल का निरीक्षण करने के लिए आग्रह किया तो डीएम अविनाश कुमार ने एसडीएम से निरीक्षण करने के लिए कहा था।
एसडीएम डीपी सिंह का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया खत्म होने के बाद निरीक्षण करेंगे।
उधर, डॉ. हरिशंकर ने बताया कि अस्पताल को दूसरे भवन में शिफ्ट करने की कार्रवाई चल रही है। शौचालय के खराब स्थिति के संबंध में कहा कि सफाई कर्मचारी को सफाई करने के लिए कहा जाएगा। दवाएं सभी मौजूद हैं। अस्पताल सही तरह से चल रहा है।
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एक में दवा वितरण और एक में स्टाफ नर्स बैठती हैं। बाकी कमरे बंद पड़े हैं। बेड के गद्दे फ़टे और चादरें गायब हैं। भवन अत्यंत जर्जर हो चुका है। जगह-जगह पर प्लास्टर टूटा है। बरसात में छतें टपकती हैं, जिसके नीचे बैठना मुश्किल है।
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भवन की न तो आज तक मरम्मत हुई और न ही पुताई। वायरिंग पूरी तरह से ध्वस्त है। शौचालय जर्जर और दरवाजे तक गायब हैं। दवाओं के डिब्बे तितर-बितर पड़े हैं।
हलीम अहमद जो वार्ड ब्वाय है, पूरा दिन सन्नाटे में बैठा रहते हैं। स्टाफ नर्स पूनम शर्मा, कविता व उर्मिला द्विवेदी हैं। एक डॉक्टर तो 10 वर्षों से नियुक्त हैं, लेकिन वह गायब ही रहते हैं।
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लोगों का कहना है कि डॉक्टर हफ्ते में केवल दो बार आते हैं। एक बोर्ड लगा हुआ है, जिस पर नियुक्त स्टाफ के नाम लिखे हुए हैं। इनमें डॉ. हरिशंकर, सतीश चंद्र चीफ फार्मेसिस्ट, शिवकुमार मौर्य फार्मेसिस्ट, राकेश चौकीदार और हलीम अहमद वार्ड ब्वाय के नाम लिखे हैं।
बताया गया कि सतीश चंद्र काफी समय से नहीं हैं। फार्मेसिस्ट शिवकुमार मौर्य करीब छह माह पूर्व से गोनी आयुर्वेदिक अस्पताल में अटैच है। इस अस्पताल का आज तक जिला स्तरीय अथवा स्थानीय प्रशासनिक स्तर का अधिकारी निरीक्षण करने नहीं पहुंचे।
अस्पताल का समय सुबह 10:00 से शाम चार बजे तक है, लेकिन कर्मचारी दो बजे ही अस्पताल बंद करके चले जाते हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के दम पर ही अस्पताल चल रहा है।
पिछले दिनों तहसील दिवस पर नगर के कई लोगों ने डीएम और एसडीएम से इस अस्पताल का निरीक्षण करने के लिए आग्रह किया तो डीएम अविनाश कुमार ने एसडीएम से निरीक्षण करने के लिए कहा था।
एसडीएम डीपी सिंह का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया खत्म होने के बाद निरीक्षण करेंगे।
उधर, डॉ. हरिशंकर ने बताया कि अस्पताल को दूसरे भवन में शिफ्ट करने की कार्रवाई चल रही है। शौचालय के खराब स्थिति के संबंध में कहा कि सफाई कर्मचारी को सफाई करने के लिए कहा जाएगा। दवाएं सभी मौजूद हैं। अस्पताल सही तरह से चल रहा है।