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Hardoi News: हत्या के सात साल पुराने मामले में एक को आजीवन कारावास
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हरदोई। हत्या के सात साल पुराने मामले में जिला जज रीता कौशिक ने एक शख्स को दोषी करार दिया। अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
मझिला थाना क्षेत्र के कुसमा गांव निवासी प्रेमकुमार ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसके घर में गांव के ही सोमपाल का बांस रखा था। 30 दिसंबर 2018 को गांव के ही प्रेमसागर उर्फ बैजू उसी बांस को मांगने आए थे। प्रेम कुमार का भाई दिनेश उर्फ दिनक्के घर में मौजूद था। उसने कहा कि सोमपाल का बांस है। इसलिए नहीं दे सकते। इसी से नाराज होकर प्रेम सागर ने दिनेश की पिटाई की थी। दिनेश इसकी शिकायत करने ग्राम प्रधान के पास गए थे। वहां से वापस आते समय प्रेमसागर ने अपने भाई आनंद और धर्मपाल के साथ मिलकर लाठी-डंडों और लात-घूसों से दिनेश की पिटाई कर दी थी।
घटना में घायल दिनेश घर आकर चारपाई पर लेट गया था। पिटाई के कारण कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने तीनों के खिलाफ गैरइरादतन हत्या की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। विवेचना में गैरइरादतन हत्या की धारा को हत्या में बदला गया था। विवेचना के बाद प्रेम सागर के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हुआ था।
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आनंद व धर्मपाल के खिलाफ साक्ष्य न मिलने पर पुलिस ने दोनों के नाम आरोप पत्र से हटा दिए थे। अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाहों को पेश किया गया। साथ ही 13 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर जिला जज ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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मझिला थाना क्षेत्र के कुसमा गांव निवासी प्रेमकुमार ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसके घर में गांव के ही सोमपाल का बांस रखा था। 30 दिसंबर 2018 को गांव के ही प्रेमसागर उर्फ बैजू उसी बांस को मांगने आए थे। प्रेम कुमार का भाई दिनेश उर्फ दिनक्के घर में मौजूद था। उसने कहा कि सोमपाल का बांस है। इसलिए नहीं दे सकते। इसी से नाराज होकर प्रेम सागर ने दिनेश की पिटाई की थी। दिनेश इसकी शिकायत करने ग्राम प्रधान के पास गए थे। वहां से वापस आते समय प्रेमसागर ने अपने भाई आनंद और धर्मपाल के साथ मिलकर लाठी-डंडों और लात-घूसों से दिनेश की पिटाई कर दी थी।
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घटना में घायल दिनेश घर आकर चारपाई पर लेट गया था। पिटाई के कारण कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने तीनों के खिलाफ गैरइरादतन हत्या की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। विवेचना में गैरइरादतन हत्या की धारा को हत्या में बदला गया था। विवेचना के बाद प्रेम सागर के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हुआ था।
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आनंद व धर्मपाल के खिलाफ साक्ष्य न मिलने पर पुलिस ने दोनों के नाम आरोप पत्र से हटा दिए थे। अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाहों को पेश किया गया। साथ ही 13 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर जिला जज ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।