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बढ़े तापमान में झुलस गये गेहूं किसानों के अरमान !
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फोटो- 6- खेतों में गेहूं की फसल ।
- फोटो : HARDOI
हरदोई। इस साल होली के पहले तक मौसम के तेवर गेहूं की फसल के अनुकूल थे। होली पर दिखीं बालियों से गेहूं की बंपर पैदावार होने का अनुमान लगाया जा रहा था।
किसानों को उम्मीद थी कि पिछले साल की अपेक्षा इस बार प्रति बीघा चार क्विंटल यानी प्रति हेक्टेयर करीब 45 क्विंटल तक उपज पहुंच सकती है। इस संभावना से किसानों के चेहरों पर चमक थी।
गेहूं की कटाई-मड़ाई के बाद अब मिल रही उपज ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। कहीं प्रति हेक्टेयर 30 तो कहीं 35 क्विंटल उपज का औसत आ रहा है। अनुमान से कम पैदावार देख किसान निराश हैं।
कृषि विभाग के अधिकारी एवं कृषि वैज्ञानिक भी इस बात को लेकर चिंतित हैं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अचानक बढ़े तापमान में गेेहूं का दाना कमजोर पड़ गया। उसका वजन कम होने से पैदावार घट रही है।
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पिछले वर्ष भी तापमान के उछाल ने गेेहूं की पैदावार को प्रभावित किया था। इस बार कुछ ज्यादा ही प्रभाव पड़ा है। जिला कृषि अधिकारी उमेश साहू ने बताया कि शुरुआती कटाई से मिले संकेत अच्छे नहीं हैं।
अलग-अलग स्थानों पर पैदावार का औसत निकाला जा रहा है। इस साल जिले में 3,08,168 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई की गई थी। खेतों में गेहूं की बालियों को देखकर 42 से 48 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार का अनुमान लगाया जा रहा था।
डीडी कृषि डा. नंद किशोर ने बताया कि अनुमान पर तापमान भारी पड़ा है। इस साल गेहूं की पैदावार बढ़ने की उम्मीद किसान एवं विभाग को थी। गेहूं के लिए होली के आसपास तक मौसम अनुकूल था। पूरे जिले से उपज का डाटा बनाया जा रहा है। बताया कि पिछले साल औसतन पैदावार 32 से 36 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के आसपास रही थी।
बोले कृषि वैज्ञानिक
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. पीपी पाल ने बताया कि गेहूं की बंपर पैदावार की उम्मीदों को तापमान ने झुलसा दिया है। अभी तक जो सूचनाएं किसानों से मिली हैं, उससे उम्मीदों के मुताबिक पैदावार नहीं हुई है। बढ़े तापमान के चलते गेहूं का दाना कमजोर पड़ गया, जिससे वजन कम होने के साथ ही कुछ स्थानों पर गेेहूं के दाने का रंग व आकार भी प्रभावित हुआ है।
दो वर्षों की तुलना में एक डिग्री अधिक तापमान
मौसम वेधशाला के प्रेक्षक रमेश चंद्र ने बताया कि पिछले दो सालों में तापमान का औसत स्तर मार्च के अंतिम सप्ताह से अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक 40 डिग्री के आसपास रहा। इस साल तो यह 41 डिग्री सेल्सियस के स्तर को छू गया था। इससे पहले के सालों में यह स्तर इस अवधि में 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा है ।
बोले किसान, मिट रहे अरमान
हरदोई। सांडी क्षेत्र के किसान राम विलास यादव, रामचंद्र प्रजापति, हरपालपुर क्षेत्र के छोटे मिश्रा, बावन क्षेत्र के अनिल, शाहाबाद क्षेत्र के गुड्डूू बाजपेई ने बताया कि पिछले साल गेहूं का दाना कमजोर रहने के साथ कुछ कालापन था, जिससे पैदावार कम हुई थी।
इस बार प्रति बीघा चार क्विंटल के हिसाब से प्रति हेक्टेयर 45 से 50 क्विंटल तक गेहूं होने का अनुमान लगाया था। गेहूं की बालियों को देखकर बहुत प्रसन्नता थी।
कटाई-मड़ाई के बाद गेहूं को घर और बाजार लेकर चलने का समय आया तो प्रति हेक्टेयर 36 क्विंटल का भी औसत आना मुश्किल हो रहा है। जिस तरह से लागत बढ़ और पैदावार घट रही है, उससे खेती से कमाई कर पाना सपना रह जाएगा।
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किसानों को उम्मीद थी कि पिछले साल की अपेक्षा इस बार प्रति बीघा चार क्विंटल यानी प्रति हेक्टेयर करीब 45 क्विंटल तक उपज पहुंच सकती है। इस संभावना से किसानों के चेहरों पर चमक थी।
गेहूं की कटाई-मड़ाई के बाद अब मिल रही उपज ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। कहीं प्रति हेक्टेयर 30 तो कहीं 35 क्विंटल उपज का औसत आ रहा है। अनुमान से कम पैदावार देख किसान निराश हैं।
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कृषि विभाग के अधिकारी एवं कृषि वैज्ञानिक भी इस बात को लेकर चिंतित हैं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अचानक बढ़े तापमान में गेेहूं का दाना कमजोर पड़ गया। उसका वजन कम होने से पैदावार घट रही है।
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पिछले वर्ष भी तापमान के उछाल ने गेेहूं की पैदावार को प्रभावित किया था। इस बार कुछ ज्यादा ही प्रभाव पड़ा है। जिला कृषि अधिकारी उमेश साहू ने बताया कि शुरुआती कटाई से मिले संकेत अच्छे नहीं हैं।
अलग-अलग स्थानों पर पैदावार का औसत निकाला जा रहा है। इस साल जिले में 3,08,168 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई की गई थी। खेतों में गेहूं की बालियों को देखकर 42 से 48 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार का अनुमान लगाया जा रहा था।
डीडी कृषि डा. नंद किशोर ने बताया कि अनुमान पर तापमान भारी पड़ा है। इस साल गेहूं की पैदावार बढ़ने की उम्मीद किसान एवं विभाग को थी। गेहूं के लिए होली के आसपास तक मौसम अनुकूल था। पूरे जिले से उपज का डाटा बनाया जा रहा है। बताया कि पिछले साल औसतन पैदावार 32 से 36 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के आसपास रही थी।
बोले कृषि वैज्ञानिक
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. पीपी पाल ने बताया कि गेहूं की बंपर पैदावार की उम्मीदों को तापमान ने झुलसा दिया है। अभी तक जो सूचनाएं किसानों से मिली हैं, उससे उम्मीदों के मुताबिक पैदावार नहीं हुई है। बढ़े तापमान के चलते गेहूं का दाना कमजोर पड़ गया, जिससे वजन कम होने के साथ ही कुछ स्थानों पर गेेहूं के दाने का रंग व आकार भी प्रभावित हुआ है।
दो वर्षों की तुलना में एक डिग्री अधिक तापमान
मौसम वेधशाला के प्रेक्षक रमेश चंद्र ने बताया कि पिछले दो सालों में तापमान का औसत स्तर मार्च के अंतिम सप्ताह से अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक 40 डिग्री के आसपास रहा। इस साल तो यह 41 डिग्री सेल्सियस के स्तर को छू गया था। इससे पहले के सालों में यह स्तर इस अवधि में 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा है ।
बोले किसान, मिट रहे अरमान
हरदोई। सांडी क्षेत्र के किसान राम विलास यादव, रामचंद्र प्रजापति, हरपालपुर क्षेत्र के छोटे मिश्रा, बावन क्षेत्र के अनिल, शाहाबाद क्षेत्र के गुड्डूू बाजपेई ने बताया कि पिछले साल गेहूं का दाना कमजोर रहने के साथ कुछ कालापन था, जिससे पैदावार कम हुई थी।
इस बार प्रति बीघा चार क्विंटल के हिसाब से प्रति हेक्टेयर 45 से 50 क्विंटल तक गेहूं होने का अनुमान लगाया था। गेहूं की बालियों को देखकर बहुत प्रसन्नता थी।
कटाई-मड़ाई के बाद गेहूं को घर और बाजार लेकर चलने का समय आया तो प्रति हेक्टेयर 36 क्विंटल का भी औसत आना मुश्किल हो रहा है। जिस तरह से लागत बढ़ और पैदावार घट रही है, उससे खेती से कमाई कर पाना सपना रह जाएगा।