फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   farmer worried to see thier fields

खेत देख किसान परेशान

Sun, 15 Mar 2020 11:00 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 Mar 2020 11:00 PM IST
विज्ञापन
farmer worried to see thier fields
मोहल्ला मीरसराय में बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद गेहूं का फसल। संवाद - फोटो : HARDOI
पिहानी। शुक्रवार को आंधी, बारिश और ओले गिरने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। छोटे किसानों की नींद बर्बाद फसलों को देखकर उड़ गई है। आलम ये है कि किसानों को समझ ही नहीं आ रहा कि अब भविष्य क्या होगा, क्योंकि फिलहाल तो बड़े काश्तकारों के खेतों में मजदूरी करने या फिर शहरी इलाकों में दुकानों पर काम कर रोजी की जुगाड़ करने का ही विकल्प दिख रहा है। कुदरती कहर के शिकार हुए किसानों को फिलहाल सरकारी मदद नहीं मिली है। अभी तक इन किसानों के खेतों तक कोई जिम्मेदार नहीं पहुंचा है, इसलिए इसकी उम्मीद भी न के बराबर है।
विज्ञापन

बेटी की शादी की चिंता में उड़ी नींद
पिहानी विकास खंड के ग्राम उमरसेढ़ा निवासी किसान रामकुमार पुत्र रामदयाल ने बताया कि उसके पास केवल पांच बीघा खेत है, जिसमें गेहूं की फसल बोई थी। फसल काटकर इस वर्ष 14 अप्रैल को पुत्री मीना देवी का विवाह करना है, लेकिन शादी से एक माह पहले ही कुदरती आफत ने सब अरमानों पर पानी फेर कर रख दिया। सारी फसल तबाह हो गई है और ऐसे में बेटी के हाथ पीले करने को लेकर उसकी चिंता इस हद तक बढ़ गई है कि रातों को नींद तक नहीं आ रही है।
विज्ञापन

खाने पीने का सामान जुटाना मुश्किल
पिहानी कस्बे के मोहल्ला नागर के ही लाल बहादुर के मुताबिक डेढ़ एकड़ खेत और बटाई की कुछ जमीन के सहारे परिवार का भरण पोषण होता है। सोचा था कि इस बार फसल अच्छी है तो भविष्य के लिए भी कुछ बचत हो जाएगी, लेकिन मौसम की मार ने खाने पीने का सामान जुटाने तक की फिक्र ला खड़ी की है। बारिश और तेज हवाओं से उनकी धनिया और गेहूं की फसलें पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

मुआवजे की उम्मीद न के बराबर
पिहानी के मोहल्ला नागर निवासी किसान शहजादे के पास चार बीघा खेत है। उसके मुताबिक बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने उनकी सारी मेहनत को धोकर रख दिया है। खेती के अलावा दूसरा जरिया घर-परिवार चलाने के लिए नहीं है। ऐसे में फसल की बर्बादी ने उनके सामने बड़ी समस्या ला खड़ी की है। सरकार का कोई अधिकारी-कर्मचारी नुकसान के आकलन के लिए अभी तक उनके खेत नहीं पहुंचा। लिहाजा सरकारी मुआवजा मिलने की उम्मीद न के बराबर है।

चिंता में डूबा परिवार
पिहानी क्षेत्र के सलेमपुर गांव निवासी अजय कुमार पर सारे परिवार की जिम्मेदारी है। सात बीघा में गेहूं और सरसों की फसल बोई थी, जो तैयार होते होते बेमौसम बरसात का शिकार होकर पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। सारा परिवार चिंताओं में डूबा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed