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Hardoi News: रूठे युवाओं को मनाने की कोशिश शुरू
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फतेहपुर। लोकसभा चुनाव में रूठे युवाओं को मनाने के लिए सीएम ने कवायद शुरू की है। भाजपा सरकार में नौकरियों की भर्ती में कंजूसी ने भाजपा के वोट प्रतिशत में करीब तीन प्रतिशत गिरावट आई है। चुनाव परिणाम आते ही मुख्यमंत्री ने बैठक कर रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश से 80 सांसदों में प्रमुख विपक्षी दल के 37 सांसद जीते हैं, जबकि 2019 में सिर्फ पांच सांसद जीते थे। राजनीति पंडितों का मानना है कि चुनाव के कुछ दिन पहले आरओ-एआरपी और पुलिस भर्ती परीक्षा रद्द होने से युवा भाजपा से खासा नाराज हैं। नाराज युवाओं का भाजपा के विपरीत सपा को वोट करना माना जा रहा है। उनके साथ परिजनों का भी वोट गया। इसका अहसास राज्य सरकार को भी हो रहा है।
जिला अस्पताल का स्वतंत्र फीडर आठ साल से बंद है। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव सरकार के समय में जिला अस्पताल को 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए राधानगर उपकेंद्र से स्वतंत्र फीडर बनाया गया था। फीडर बंद होने के कारण अस्पताल में प्रतिदिन कई-कई घंटे बिजली कटौती हो रही है। स्वतंत्र फीडर चालू होने से अस्पताल की बिजली समस्या दूर हो जाएगी।
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नगर क्षेत्र की बेसिक शिक्षा वीरान है। शिक्षकों की कमी के कारण छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार मय हो रहा है। वर्तमान 17 विद्यालय शिक्षक विहीन हैं। 300 शिक्षकों के सापेक्ष सिर्फ 38 शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षकों की भर्ती हुई, तो नगर क्षेत्र की बेसिक शिक्षा का रूप बदल जाएगा।
जिले में 55 राजकीय विद्यालयों में 40 प्रधानाचार्य विहीन हैं। 72 वित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्यों का टोटा है। यहां के छात्र-छात्राएं पढ़ाई के नाम पर औपचारिकता निभा रहे हैं। इसी लिए राजकीय और एडेड माध्यमिक विद्यालयों की छात्र संख्या दिन प्रतिदिन घट रही है।
जिले में 50 से अधिक डॉक्टरों की कमी है। इसके अलावा एएनएम की भी भर्ती होनी है। इस वजह से कई पीएचसी और सीएचसी में स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है। जिला अस्पताल में भी ह्रदय रोग विशेषज्ञ की कमी है। वहीं मेडिकल कॉलेज में 40 प्रतिशत स्टॉफ की नियुक्ति होनी है। डॉक्टरों की तैनाती और मेडिकल कॉलेज में स्टॉफ पूरा करने की कवायद चल रही है। जल्द ही दोनों जगह भर्ती होने की उम्मीद है।
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प्रदेश से 80 सांसदों में प्रमुख विपक्षी दल के 37 सांसद जीते हैं, जबकि 2019 में सिर्फ पांच सांसद जीते थे। राजनीति पंडितों का मानना है कि चुनाव के कुछ दिन पहले आरओ-एआरपी और पुलिस भर्ती परीक्षा रद्द होने से युवा भाजपा से खासा नाराज हैं। नाराज युवाओं का भाजपा के विपरीत सपा को वोट करना माना जा रहा है। उनके साथ परिजनों का भी वोट गया। इसका अहसास राज्य सरकार को भी हो रहा है।
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जिला अस्पताल का स्वतंत्र फीडर आठ साल से बंद है। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव सरकार के समय में जिला अस्पताल को 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए राधानगर उपकेंद्र से स्वतंत्र फीडर बनाया गया था। फीडर बंद होने के कारण अस्पताल में प्रतिदिन कई-कई घंटे बिजली कटौती हो रही है। स्वतंत्र फीडर चालू होने से अस्पताल की बिजली समस्या दूर हो जाएगी।
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नगर क्षेत्र की बेसिक शिक्षा वीरान है। शिक्षकों की कमी के कारण छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार मय हो रहा है। वर्तमान 17 विद्यालय शिक्षक विहीन हैं। 300 शिक्षकों के सापेक्ष सिर्फ 38 शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षकों की भर्ती हुई, तो नगर क्षेत्र की बेसिक शिक्षा का रूप बदल जाएगा।
जिले में 55 राजकीय विद्यालयों में 40 प्रधानाचार्य विहीन हैं। 72 वित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्यों का टोटा है। यहां के छात्र-छात्राएं पढ़ाई के नाम पर औपचारिकता निभा रहे हैं। इसी लिए राजकीय और एडेड माध्यमिक विद्यालयों की छात्र संख्या दिन प्रतिदिन घट रही है।
जिले में 50 से अधिक डॉक्टरों की कमी है। इसके अलावा एएनएम की भी भर्ती होनी है। इस वजह से कई पीएचसी और सीएचसी में स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है। जिला अस्पताल में भी ह्रदय रोग विशेषज्ञ की कमी है। वहीं मेडिकल कॉलेज में 40 प्रतिशत स्टॉफ की नियुक्ति होनी है। डॉक्टरों की तैनाती और मेडिकल कॉलेज में स्टॉफ पूरा करने की कवायद चल रही है। जल्द ही दोनों जगह भर्ती होने की उम्मीद है।