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Hardoi News: आखरी सांस तक जेल में रहेगा नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी
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हरदोई। प्रेम संबंध में अपनी मर्जी से कथित प्रेमी के साथ गुजरात गई नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मनमोहन सिंह ने एससी-एसटी और दुष्कर्म का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। वहीं बहलाकर ले जाने की धाराओं में बरी किया गया है।
अरवल थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि पांच मई 2022 की शाम उसकी पुत्री समोसा लेने बाजार गई थी। इसके बाद गांव के सरोज के साथ गुजरात के बड़ोदरा गई थी। आठ मई को पुलिस ने गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज की थी। तीन दिन बाद पिता और पीड़िता के जीजा बड़ोदरा से पीड़िता को लेकर घर आए थे।
12 जून को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था। पुलिस और मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयानों में उसने बताया कि वह सरोज के साथ गुजरात गई थी। पीड़िता का 12 मई 2022 को जिला महिला अस्पताल में चिकित्सीय परीक्षण किया गया था। एक्सरे जांच में उसकी उम्र 16 साल आंकी गई। आरोपी ने चुनावी रंजिश में झूठा फंसाने का आरोप लगाया। स्कूल रिकॉर्ड में जन्मतिथि गलत दर्ज होने की भी बात कही थी।
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अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाहों को पेश किया गया। इसके साथ ही 12 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज ने सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की बालिका की सहमति कानून की नजर में मान्य नहीं है।
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अरवल थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि पांच मई 2022 की शाम उसकी पुत्री समोसा लेने बाजार गई थी। इसके बाद गांव के सरोज के साथ गुजरात के बड़ोदरा गई थी। आठ मई को पुलिस ने गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज की थी। तीन दिन बाद पिता और पीड़िता के जीजा बड़ोदरा से पीड़िता को लेकर घर आए थे।
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12 जून को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था। पुलिस और मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयानों में उसने बताया कि वह सरोज के साथ गुजरात गई थी। पीड़िता का 12 मई 2022 को जिला महिला अस्पताल में चिकित्सीय परीक्षण किया गया था। एक्सरे जांच में उसकी उम्र 16 साल आंकी गई। आरोपी ने चुनावी रंजिश में झूठा फंसाने का आरोप लगाया। स्कूल रिकॉर्ड में जन्मतिथि गलत दर्ज होने की भी बात कही थी।
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अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाहों को पेश किया गया। इसके साथ ही 12 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज ने सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की बालिका की सहमति कानून की नजर में मान्य नहीं है।