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Hardoi News: सीआईबी से काम और नाम को मिली पहचान, आर्थिक समृद्धि भी आई
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फोटो 21: रूबी नाज। स्रोत : स्वयं
बेहंदर। शासकीय कार्यों को पहचान बताने वाले सिटीजन इंफॉर्मेशन बोर्ड (सीआईबी) से गौसापुर की रूबी के काम को पहचान और आर्थिक समृद्धि मिली। वह दूसरी महिलाओं और परिवार के पुरुष सदस्यों को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं।
बेहंदर ब्लॉक के गौसापुर गांव निवासी रूबी नाज को उनकी मेहनत और लगन ने बड़ी पहचान और सम्मान दिलाया है। साल 2019 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर उन्होंने इंशाल्लाह स्वयं सहायता समूह का गठन किया। इसकी वह सचिव बनीं और गांव की अन्य महिलाओं को भी समूह से जोड़ा। करीब सात साल की मेहनत, लगन से आत्मनिर्भर रूबी नाज को राज्यपाल और मुख्यमंत्री सम्मानित कर चुके हैं। बताया कि करीब छह साल पहले 1,25,000 रुपये से कारोबार की शुरुआत की। अब कारोबार ऊंचाइयों पर है।
बताया कि आत्मनिर्भर बनने का जो कदम उठाया वह आज मिसाल बन गया है। पहले घर के कामों में ही व्यस्त रहती थीं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ीं और समूह बनाया। साल 2020 में तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने सीआईबी बनाने के लिए प्रेरित किया और आपूर्ति की भी व्यवस्था सुनिश्चित कराई। शुरुआती दौर में 2,25,000 रुपये से समूह की 10 महिलाओं के साथ सीआईबी बनाने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे काम बढ़ता गया। समूह की तरफ से बनाए गए सीआईबी बेहंदर के साथ कछौना, मल्लावां, माधौगंज और बिलग्राम सहित अन्य ब्लॉक व विभागों में आपूर्ति करने लगीं। चार साल में ही कारोबार ने रफ्तार पकड़ ली। समूह की सभी 10 महिलाएं अपनी मेहनत के दम पर आत्मनिर्भर बनी हैं।
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300 रुपये तक की हो जाती एक बोर्ड पर बचत
रूबी ने बताया कि मनरेगा के कार्यों पर दो तरह के सीआईबी लगवाए जाते हैं। एक सीआईबी तीन हजार और एक पांच हजार रुपये का होता है। कार्यस्थल पर कौन सा सीआईबी लगेगा यह कराए जाने वाले कार्य पर होने वाले खर्च पर निर्भर करता है। एक सीआईबी बनाने से लेकर कार्यस्थल तक पहुंचाने के बाद समूह को करीब 300 से 400 रुपये की बचत होती है।
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बेहंदर ब्लॉक के गौसापुर गांव निवासी रूबी नाज को उनकी मेहनत और लगन ने बड़ी पहचान और सम्मान दिलाया है। साल 2019 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर उन्होंने इंशाल्लाह स्वयं सहायता समूह का गठन किया। इसकी वह सचिव बनीं और गांव की अन्य महिलाओं को भी समूह से जोड़ा। करीब सात साल की मेहनत, लगन से आत्मनिर्भर रूबी नाज को राज्यपाल और मुख्यमंत्री सम्मानित कर चुके हैं। बताया कि करीब छह साल पहले 1,25,000 रुपये से कारोबार की शुरुआत की। अब कारोबार ऊंचाइयों पर है।
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बताया कि आत्मनिर्भर बनने का जो कदम उठाया वह आज मिसाल बन गया है। पहले घर के कामों में ही व्यस्त रहती थीं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ीं और समूह बनाया। साल 2020 में तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने सीआईबी बनाने के लिए प्रेरित किया और आपूर्ति की भी व्यवस्था सुनिश्चित कराई। शुरुआती दौर में 2,25,000 रुपये से समूह की 10 महिलाओं के साथ सीआईबी बनाने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे काम बढ़ता गया। समूह की तरफ से बनाए गए सीआईबी बेहंदर के साथ कछौना, मल्लावां, माधौगंज और बिलग्राम सहित अन्य ब्लॉक व विभागों में आपूर्ति करने लगीं। चार साल में ही कारोबार ने रफ्तार पकड़ ली। समूह की सभी 10 महिलाएं अपनी मेहनत के दम पर आत्मनिर्भर बनी हैं।
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300 रुपये तक की हो जाती एक बोर्ड पर बचत
रूबी ने बताया कि मनरेगा के कार्यों पर दो तरह के सीआईबी लगवाए जाते हैं। एक सीआईबी तीन हजार और एक पांच हजार रुपये का होता है। कार्यस्थल पर कौन सा सीआईबी लगेगा यह कराए जाने वाले कार्य पर होने वाले खर्च पर निर्भर करता है। एक सीआईबी बनाने से लेकर कार्यस्थल तक पहुंचाने के बाद समूह को करीब 300 से 400 रुपये की बचत होती है।