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Hardoi News: अजीत हत्याकांड में दोनों पक्षाें की बहस पूरी, पांच जून को फैसला
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हरदोई। करीब 17 साल पहले हुए अजीत हत्याकांड में बुधवार को बहस पूरी हो गई।
अपर जिला जज ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद फाइल सुरक्षित कर दी है और पांच जून की तिथि फैसले के लिए नियत की है। वादी पक्ष के वकील ने केस साबित करने के लिए 15 गवाह पेश किए और प्रतिवादी पक्ष के वकील ने आरोपी को बेगुनाह साबित करने के लिए चार गवाहों की गवाही कराई।
अपर जिला जज कोर्ट संख्या दो (स्पेशल एससी/एसटी एक्ट) सपना त्रिपाठी ने मुकदमे की सुनवाई की। बहस पूरी होने पर पत्रावली को सुरक्षित कर लिया है। कोतवाली शहर क्षेत्र के बहरा सौदागर पूर्वी लखनऊ रोड निवासी भगवानदीन ने 19 अप्रैल 2007 को कोतवाली शहर में पुत्र अजीत की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था इनकी बेटी कक्षा 11 व 12 में सन् 2005 व 2006 में इसी मोहल्ला निवासी राजेश शर्मा के यहां कृष्णा साइंस इंस्टीट्यूट में ट्यूशन पढ़ती थी।
राजेश शर्मा ने पुत्री से से एक बार अभद्रता की थी। इसकी शिकायत बेटी ने घर में की थी। इस पर पुत्र अजीत कुमार (मृतक) व राजेश शर्मा में फोन व आमने-सामने गाली-गलौज हुई थी। राजेश ने भविष्य में पुत्र को देख लेने की धमकी दी थी। 18 अप्रैल 2007 की रात करीब आठ बजे कोई अनजान व्यक्ति अजीत को घर से बुला ले गया था। देर रात तक जब अजीत घर नहीं आया तो, तलाश की गई। पता नहीं चला और 19 अप्रैल गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
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20 अप्रैल 2007 को अमर उजाला अखबार में एक खबर पढ़ी कि 19 अप्रैल को देहात कोतवाली क्षेत्र के कटैया गांव के पास रेलवे लाइन पर क्षत-विक्षत शव मिला है। पुलिस ने शव लावारिस होने के कारण पहचान के लिए चिकित्सालय में रखवाया दिया। कहा कि जब वह कोतवाली गए तो, कपड़े व चप्पल से अजीत के शव की शिनाख्त की। 21 अप्रैल 2007 को पत्नी के मोबाइल पर किसी अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने गाली दी और कहा कि पहले नहीं मानी, अब रो रही हो। नंबर का पता लगाने पर पुलिस ने राजेश शर्मा के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना में बस्ती जनपद के रिपुदमन त्रिपाठी का भी नाम सामने आया था। पुलिस ने दोनों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किए थे।
वादी के वकील ने कहा कि हत्या को साबित करने के लिए 15 गवाहों को पेश किया गया है। आरोपी अजीत को घर से बुलाकर बाइक पर बिठा कर ले गए थे। इसके बाद दोनों ने हत्या करके हत्या को दुर्घटना का रूप देने के लिए शव को रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया था। इसके बाद आरोपियों ने मृतक की मां को फोन कर गाली-गलौज की थी। नंबर की जांच करने पर आरोपियों का पता चला था।
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अपर जिला जज ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद फाइल सुरक्षित कर दी है और पांच जून की तिथि फैसले के लिए नियत की है। वादी पक्ष के वकील ने केस साबित करने के लिए 15 गवाह पेश किए और प्रतिवादी पक्ष के वकील ने आरोपी को बेगुनाह साबित करने के लिए चार गवाहों की गवाही कराई।
अपर जिला जज कोर्ट संख्या दो (स्पेशल एससी/एसटी एक्ट) सपना त्रिपाठी ने मुकदमे की सुनवाई की। बहस पूरी होने पर पत्रावली को सुरक्षित कर लिया है। कोतवाली शहर क्षेत्र के बहरा सौदागर पूर्वी लखनऊ रोड निवासी भगवानदीन ने 19 अप्रैल 2007 को कोतवाली शहर में पुत्र अजीत की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था इनकी बेटी कक्षा 11 व 12 में सन् 2005 व 2006 में इसी मोहल्ला निवासी राजेश शर्मा के यहां कृष्णा साइंस इंस्टीट्यूट में ट्यूशन पढ़ती थी।
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राजेश शर्मा ने पुत्री से से एक बार अभद्रता की थी। इसकी शिकायत बेटी ने घर में की थी। इस पर पुत्र अजीत कुमार (मृतक) व राजेश शर्मा में फोन व आमने-सामने गाली-गलौज हुई थी। राजेश ने भविष्य में पुत्र को देख लेने की धमकी दी थी। 18 अप्रैल 2007 की रात करीब आठ बजे कोई अनजान व्यक्ति अजीत को घर से बुला ले गया था। देर रात तक जब अजीत घर नहीं आया तो, तलाश की गई। पता नहीं चला और 19 अप्रैल गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
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20 अप्रैल 2007 को अमर उजाला अखबार में एक खबर पढ़ी कि 19 अप्रैल को देहात कोतवाली क्षेत्र के कटैया गांव के पास रेलवे लाइन पर क्षत-विक्षत शव मिला है। पुलिस ने शव लावारिस होने के कारण पहचान के लिए चिकित्सालय में रखवाया दिया। कहा कि जब वह कोतवाली गए तो, कपड़े व चप्पल से अजीत के शव की शिनाख्त की। 21 अप्रैल 2007 को पत्नी के मोबाइल पर किसी अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने गाली दी और कहा कि पहले नहीं मानी, अब रो रही हो। नंबर का पता लगाने पर पुलिस ने राजेश शर्मा के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना में बस्ती जनपद के रिपुदमन त्रिपाठी का भी नाम सामने आया था। पुलिस ने दोनों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किए थे।
वादी के वकील ने कहा कि हत्या को साबित करने के लिए 15 गवाहों को पेश किया गया है। आरोपी अजीत को घर से बुलाकर बाइक पर बिठा कर ले गए थे। इसके बाद दोनों ने हत्या करके हत्या को दुर्घटना का रूप देने के लिए शव को रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया था। इसके बाद आरोपियों ने मृतक की मां को फोन कर गाली-गलौज की थी। नंबर की जांच करने पर आरोपियों का पता चला था।