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सम्मानित किए गए बुजुर्ग
Hardoi
Updated Wed, 02 Oct 2013 05:38 AM IST
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हरदोई। वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति की ओर से मंगलवार को आयोजित विचार गोष्ठी में विभिन्न क्षेत्र में योगदान देने वाले बुजुर्गों को सम्मानित किया गया और बुजुर्गों को आदर व सम्मान देने पर जोर दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति की ओर से परिजनों द्वारा बुजुर्गो का बहिष्कार विषय पर एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में बुजुर्ग हरगोविंद सेठी, डा. प्रेम किशोर टंडन, सुभाषिनी श्रीवास्तव को अध्यक्ष चंद्र शेखर मिश्र द्वारा शाल ,प्रतीक चिन्ह व सम्मान प्रत्र देकर सम्मानित किया गया और उनके योगदान की प्रशंसा की गई। इस मौके पर श्री मिश्र ने कहा कि समस्याओं का अंत सामाजिक न्याय, समानता, और वैयक्तिक स्वतंत्रता के सिद्धांत पर आधारित व्यवस्था से हो सकता है। परिवार तंत्र का अर्थ है परिवार, शासन या राजनीतिक तंत्र से नहीं है। समरसता के सिद्वांत पर आखिरी आदमी की परवाह आदर परिवार के हर सदस्य को करना चाहिए। मुख्य अतिथि प्रो.अखिलेश बाजपेई ने कहा कि बुजुर्गो की उपेक्षा परिवारिक एवं समाजिक ताने बाने को छिन्न भिन्न कर देगी और परिवार ,समाज में बुजुर्ग प्रताड़ना के लिये माहौल बन जायेगा, इस पर अंकुश लगना चाहिए। सीएसएन के पूर्व प्राचार्य डा. बीएस पाण्डेय ने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति और बदले समाजिक मूल्यों ने परिवार में वृद्धो की स्थित दयनीय कर दी है। इसलिए आवश्यक है कि पारिवारिक एकता के कारकों पर गहराई से विचार करे और बुजुर्गों को सुरक्षा प्रदान करे। शिव शरण सिंह चौहान ने वेदों और प्राचीन भारतीय संस्कृति के उदाहरणों के साथ वृद्धों की सेवा की महत्ता को प्रतिपादित किया। इस मौके पर समिति के संरक्षक कौशल किशोर चर्तुेवेदी, महामंत्री शिव कुमार मिश्र, उपाध्यक्ष इंद्रेश्वर नाथ गुप्ता, गिरीश चन्द्र बाजेपई, श्रीमती निर्मला मिश्रा, शीलप्रिय गुप्त, राजेन्द्र कुमार, कुमुद कुमार श्रीवास्तव, अरूण कुमार टंडन, बैरिस्टर सिंह यादव, एसएन अगिभनहोत्री, राम कुमार सीमा मिश्र ने विचार व्यक्त किये।
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अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति की ओर से परिजनों द्वारा बुजुर्गो का बहिष्कार विषय पर एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में बुजुर्ग हरगोविंद सेठी, डा. प्रेम किशोर टंडन, सुभाषिनी श्रीवास्तव को अध्यक्ष चंद्र शेखर मिश्र द्वारा शाल ,प्रतीक चिन्ह व सम्मान प्रत्र देकर सम्मानित किया गया और उनके योगदान की प्रशंसा की गई। इस मौके पर श्री मिश्र ने कहा कि समस्याओं का अंत सामाजिक न्याय, समानता, और वैयक्तिक स्वतंत्रता के सिद्धांत पर आधारित व्यवस्था से हो सकता है। परिवार तंत्र का अर्थ है परिवार, शासन या राजनीतिक तंत्र से नहीं है। समरसता के सिद्वांत पर आखिरी आदमी की परवाह आदर परिवार के हर सदस्य को करना चाहिए। मुख्य अतिथि प्रो.अखिलेश बाजपेई ने कहा कि बुजुर्गो की उपेक्षा परिवारिक एवं समाजिक ताने बाने को छिन्न भिन्न कर देगी और परिवार ,समाज में बुजुर्ग प्रताड़ना के लिये माहौल बन जायेगा, इस पर अंकुश लगना चाहिए। सीएसएन के पूर्व प्राचार्य डा. बीएस पाण्डेय ने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति और बदले समाजिक मूल्यों ने परिवार में वृद्धो की स्थित दयनीय कर दी है। इसलिए आवश्यक है कि पारिवारिक एकता के कारकों पर गहराई से विचार करे और बुजुर्गों को सुरक्षा प्रदान करे। शिव शरण सिंह चौहान ने वेदों और प्राचीन भारतीय संस्कृति के उदाहरणों के साथ वृद्धों की सेवा की महत्ता को प्रतिपादित किया। इस मौके पर समिति के संरक्षक कौशल किशोर चर्तुेवेदी, महामंत्री शिव कुमार मिश्र, उपाध्यक्ष इंद्रेश्वर नाथ गुप्ता, गिरीश चन्द्र बाजेपई, श्रीमती निर्मला मिश्रा, शीलप्रिय गुप्त, राजेन्द्र कुमार, कुमुद कुमार श्रीवास्तव, अरूण कुमार टंडन, बैरिस्टर सिंह यादव, एसएन अगिभनहोत्री, राम कुमार सीमा मिश्र ने विचार व्यक्त किये।
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