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82 फीसदी अभिभावकों के मोबाइल नंबर मिले गलत
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फोटो-14-बीएसए हेमंत राव। संवाद
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। शासन के निर्देशों पर कितनी गंभीरता से अमल होता है, इसका खुलासा शासन के मानिटरिंग सिस्टम से हुआ है। बेसिक शिक्षा विभाग के मिशन प्रेरणा के कार्यों का सत्यापन कराने के लिए जब जिले के 29395 छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के मोबाइल नंबरों पर कॉल की गई तो सिर्फ 5218 पर ही बात हो सकी। 24178 मोबाइल नंबरों में ज्यादातर गलत मिले, कुछ नॉट रिचेबल बताते रहे। बताया जाता है कि नंबरों की फीडिंग में मनमानी की गई है। अभिभावकों के सही नंबर फीड करने की बजाय अपने मन मुताबिक नंबर फीड कर दिए हैं।
कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर है। परिषदीय स्कूल तो खुले हैं पर बच्चों को स्कूल भेजने की अनुमति नहीं है। इस कारण मिशन प्रेरणा के तहत संचालित एपों पर ही पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है। व्हाट्सएप ग्रुपों पर जहां स्कूलों द्वारा शिक्षण सामग्री भेजी जा रही है, वहीं दीक्षा व रीड अलांग को भी लेकर अभिभावकों को स्मार्ट फोन पर बच्चों को पढ़ाई करवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
इस व्यवस्था की जमीनी हकीकत का पता लगाने के लिए मिशन प्रेरणा के तहत जब शासन ने आईवीआरएस कॉल के माध्यम से अभिभावकों से संपर्क करने का प्रयास किया तो 82 फीसदी मोबाइल नंबर गलत निकले। शासन की ओर से जिले को भेजी गई आख्या में बताया गया कि जिले के 3586 परिषदीय विद्यालयों में दिए गए अभिभावकों के नंबरों में से 29385 मोबाइल नंबरों पर फोन किया गया। इसमें सिर्फ 5218 नंबर पर ही बात हो सकी, जो डायल किए गए नंबरों का सिर्फ 18 फीसदी है।
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फोन पर जब 5218 अभिभावकों से रिपोर्ट कार्ड मिलने की बात पूछी गई तो 3187 अभिभावकों ने रिपोर्ट कार्ड मिलने और 2031 अभिभावकों ने अब तक रिपोर्ट कार्ड न मिलने की बात बताई। यही नहीं 1925 अभिभावकों ने शिक्षकों से समन्वय हो पाने के प्रश्न पर भी न में जवाब दिया। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने जिले के शिक्षा विभाग को आख्या भेज इस पर स्पष्टीकरण भी तलब किया है और स्थितियों में सुधार के निर्देश दिए हैं। संवाद
ग्रामीण क्षेत्र के ज्यादातर अभिभावक मोबाइल नंबर बदल देते हैं और पहले वाला नंबर बंद कर देते हैं। स्कूलों में फीड नंबर बंद हो जाने के बाद ऐसी स्थिति आती है। कई बार ऐसा होता है मोबाइल की घंटी जाती है पर लोग उठाते नहीं हैं। फिर भी मामले की जांच की जाएगी।-हेमंत राव, बीएसए।
मध्यान्ह भोजन योजना में लिया गया होगा डाटा
परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि छात्र-छात्राओं केे खातों में मध्यान्ह भोजन योजना के तहत कन्वर्जन कास्ट की राशि भेजने के लिए शासन स्तर से एक्सल शीट तैयार करवाई थी।
इसमें बच्चों के नाम के साथ अभिभावक के मोबाइल नंबर लिए गए थे। संभवत: मोबाइल नंबर शासन ने वहीं से उठाया होगा। इसके अलावा आधार फीडिंग के समय बच्चों के अभिभावकों से स्कूल स्तर पर नंबर लिए जाते हैं। कोरोना काल में व्हाट्सएप ग्रुप बनाने के लिए भी अभिभावकों के नंबर एकत्र किए गए थे।
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कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर है। परिषदीय स्कूल तो खुले हैं पर बच्चों को स्कूल भेजने की अनुमति नहीं है। इस कारण मिशन प्रेरणा के तहत संचालित एपों पर ही पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है। व्हाट्सएप ग्रुपों पर जहां स्कूलों द्वारा शिक्षण सामग्री भेजी जा रही है, वहीं दीक्षा व रीड अलांग को भी लेकर अभिभावकों को स्मार्ट फोन पर बच्चों को पढ़ाई करवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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इस व्यवस्था की जमीनी हकीकत का पता लगाने के लिए मिशन प्रेरणा के तहत जब शासन ने आईवीआरएस कॉल के माध्यम से अभिभावकों से संपर्क करने का प्रयास किया तो 82 फीसदी मोबाइल नंबर गलत निकले। शासन की ओर से जिले को भेजी गई आख्या में बताया गया कि जिले के 3586 परिषदीय विद्यालयों में दिए गए अभिभावकों के नंबरों में से 29385 मोबाइल नंबरों पर फोन किया गया। इसमें सिर्फ 5218 नंबर पर ही बात हो सकी, जो डायल किए गए नंबरों का सिर्फ 18 फीसदी है।
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फोन पर जब 5218 अभिभावकों से रिपोर्ट कार्ड मिलने की बात पूछी गई तो 3187 अभिभावकों ने रिपोर्ट कार्ड मिलने और 2031 अभिभावकों ने अब तक रिपोर्ट कार्ड न मिलने की बात बताई। यही नहीं 1925 अभिभावकों ने शिक्षकों से समन्वय हो पाने के प्रश्न पर भी न में जवाब दिया। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने जिले के शिक्षा विभाग को आख्या भेज इस पर स्पष्टीकरण भी तलब किया है और स्थितियों में सुधार के निर्देश दिए हैं। संवाद
ग्रामीण क्षेत्र के ज्यादातर अभिभावक मोबाइल नंबर बदल देते हैं और पहले वाला नंबर बंद कर देते हैं। स्कूलों में फीड नंबर बंद हो जाने के बाद ऐसी स्थिति आती है। कई बार ऐसा होता है मोबाइल की घंटी जाती है पर लोग उठाते नहीं हैं। फिर भी मामले की जांच की जाएगी।-हेमंत राव, बीएसए।
मध्यान्ह भोजन योजना में लिया गया होगा डाटा
परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि छात्र-छात्राओं केे खातों में मध्यान्ह भोजन योजना के तहत कन्वर्जन कास्ट की राशि भेजने के लिए शासन स्तर से एक्सल शीट तैयार करवाई थी।
इसमें बच्चों के नाम के साथ अभिभावक के मोबाइल नंबर लिए गए थे। संभवत: मोबाइल नंबर शासन ने वहीं से उठाया होगा। इसके अलावा आधार फीडिंग के समय बच्चों के अभिभावकों से स्कूल स्तर पर नंबर लिए जाते हैं। कोरोना काल में व्हाट्सएप ग्रुप बनाने के लिए भी अभिभावकों के नंबर एकत्र किए गए थे।