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Hapur News: वन्य जीव, पक्षियों से बढ़ाई घर की शान तो खानी पड़ेगी जेल की हवा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 02 Apr 2023 11:08 PM IST
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the pride of the house with wild animals and birds, then you will have to go to jail
हापुड़। निजी शौक के लिए कोई भी वन्य जीव या पक्षी अब पाला नहीं जा सकेगा। चाहे उसे कितनी ही सुख सुविधा के बीच क्यों न रखा जाए। बीते कुछ दिनों से अमेठी के आरिफ और उनके पालतू सारस की कोतूहल है। इस मामले में आरिफ के खिलाफ कार्रवाई भी हुई है। वन विभाग ने सभी वन्य जीव व पक्षियों के घरों में पालने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
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पुराने समय में शौक के लिए हाथी, घोड़ा, ऊंट, बिल्ली, उल्लू, भालू, बंदर, लंगूर, तीतर, कछुआ, तोता सहित कई प्रकार की सुंदर चिडिय़ा आदि पाले जाते थे। कुछ जीव व्यापार के लिए पाले जाने लगे। जिनमें हाथी, घोड़ा, ऊंट, भालू, शेर, चीता, तोता, मोर, उल्लू, आदि शामिल हैं। मगर 1972 में बने भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत इनके पालने के कुछ प्रावधान और लाइसेंस जारी करने का कानून बना। इस नियम में 2002 में संशोधन हुआ और उसके प्रावधान जटिल किए गए।
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भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के अनुसार सिर्फ दूध देने और कृषि प्रयोग वाले पशुओं को ही पाला जा सकता है। इसके अलावा किसी अन्य जीव को निजी शौक के लिए पाला नहीं जा सकता। अगर कोई पाल रहा है और उसकी शिकायत होती है तो वन विभाग कार्रवाई कर सकता है।
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जिला प्रभागीय वन अधिकारी संजय कुमार मल्ल ने कहा कि भारतीय वन्य जीव संरक्षण के अनुसार किसी भी वन्य जीव या पक्षी को पालना कानूनी अपराध है। अमेठी के सारस प्रकरण की बात करें तो, सारस उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी है, जिसे पालना नियम विरुद्ध है। इसके साथ ही सारस को बिना जोड़े के नहीं रखा जाना चाहिए। वह हमेशा जोड़े में ही रहना पसंद करता है। अगर जोड़े से अलग किया गया तो यह और बड़ा अपराध है। कोई भी वन्य जीव पाला नहीं जा सकता। कुछ जीवों को पालने पर लाइसेंस लिए जाते हैं। लेकिन जिले में किसी भी जानवर को पालने के लिए कोई लाइसेंस नहीं लिया गया है। यदि किसी ने कोई भी प्रतिबंध वन्य पशु पाल रखा है तो उसके वन विभाग को सौंप दें।
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