{"_id":"682a27e6ce9d7122d40a75ee","slug":"stp-will-be-constructed-in-anand-vihar-and-preet-vihar-with-2475-crores-hapur-news-c-135-1-hpr1005-124564-2025-05-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hapur News: आनंद विहार व प्रीत विहार में 24.75 करोड़ से बनेगा एसटीपी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hapur News: आनंद विहार व प्रीत विहार में 24.75 करोड़ से बनेगा एसटीपी
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
हापुड़। हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण द्वारा आनंद विहार व प्रीत विहार में 24.75 करोड़ से 10 एमएलडी व पांच एमएलडी के एसटीपी का निर्माण कराया जाएगा। इससे आनंद विहार और प्रीत विहार के करीब चार हजार भवनों से हर दिन निकलने वाले सीवरेज का निस्तारण हो सकेगा। इसके लिए प्राधिकरण ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रक्रिया पूरी होते ही दो माह के अंदर निर्माण शुरू होगा। एचपीडीए जल निगम के साथ मिलकर दिल्ली रोड स्थित आनंद विहार, प्रीत विहार के सीवर के दूषित पानी को शोधित करने के लिए इन एसटीपी प्लांटों का निर्माण कराएगा। इसके लिए करीब 10 हजार वर्ग मीटर भूमि को चिह्नित किया गया है। बता दें कि हापुड़ से गुजरने वाली काली नदी में शहर के नालों का गंदा पानी गिरता है। काली नदी के माध्यम से प्रदूषण गंगा तक पहुंचता है। इस कारण गंगा के भी हालत खराब हो रहे हैं। जबकि, केंद्र और प्रदेश सरकार गंगा की सफाई के लिए लगातार प्रयासरत है।
गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट नमामि गंगे योजना के तहत एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने बड़े नालों पर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) के निर्देश दिए थे। यही कारण है कि अब प्राधिकरण भी अपने क्षेत्र के दूषित पानी को शोधित करेगा। हालांकि, पहले 18 एमएलडी के प्लांट को लगाने की तैयारी थी। यह सीवरेज अभी नालों में गिर रहा है।
विज्ञापन
-शोधित होकर खेती में होगा पानी का प्रयोग--
यहां का दूषित पानी शोधित होकर नालों में गिरने के बजाय कृषि कार्यों में प्रयोग किया जाएगा। आनंद विहार व प्रीत विहार में बनने वाले इन प्लांटों के लिए भूमि चिह्नित कर प्रस्ताव बना था। इस प्लांट की ड्राइंग, निर्माण आदि के अलावा छह माह का ट्रायल और पांच साल के लिए संचालन व मेंटिनेंस का कार्य होगा। अभी आनंद विहार और प्रीत विहार का दूषित पानी नालों और छोइये के माध्यम से काली नदी में गिर रहा है।
एचपीडीए के उपाध्यक्ष डॉ.नितिन गौड़ ने बताया कि आनंद विहार व प्रीत विहार से हर दिन निकलने वाले सीवरेज का अब समाधान होगा। प्लांट के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। निर्माण के बाद पांच साल के लिए संबंधित ठेकेदार को ही इसके संचालन का जिम्मा सौंपा जाएगा।
विज्ञापन
हापुड़। हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण द्वारा आनंद विहार व प्रीत विहार में 24.75 करोड़ से 10 एमएलडी व पांच एमएलडी के एसटीपी का निर्माण कराया जाएगा। इससे आनंद विहार और प्रीत विहार के करीब चार हजार भवनों से हर दिन निकलने वाले सीवरेज का निस्तारण हो सकेगा। इसके लिए प्राधिकरण ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रक्रिया पूरी होते ही दो माह के अंदर निर्माण शुरू होगा। एचपीडीए जल निगम के साथ मिलकर दिल्ली रोड स्थित आनंद विहार, प्रीत विहार के सीवर के दूषित पानी को शोधित करने के लिए इन एसटीपी प्लांटों का निर्माण कराएगा। इसके लिए करीब 10 हजार वर्ग मीटर भूमि को चिह्नित किया गया है। बता दें कि हापुड़ से गुजरने वाली काली नदी में शहर के नालों का गंदा पानी गिरता है। काली नदी के माध्यम से प्रदूषण गंगा तक पहुंचता है। इस कारण गंगा के भी हालत खराब हो रहे हैं। जबकि, केंद्र और प्रदेश सरकार गंगा की सफाई के लिए लगातार प्रयासरत है।
विज्ञापन
गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट नमामि गंगे योजना के तहत एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने बड़े नालों पर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) के निर्देश दिए थे। यही कारण है कि अब प्राधिकरण भी अपने क्षेत्र के दूषित पानी को शोधित करेगा। हालांकि, पहले 18 एमएलडी के प्लांट को लगाने की तैयारी थी। यह सीवरेज अभी नालों में गिर रहा है।
विज्ञापन
-शोधित होकर खेती में होगा पानी का प्रयोग
यहां का दूषित पानी शोधित होकर नालों में गिरने के बजाय कृषि कार्यों में प्रयोग किया जाएगा। आनंद विहार व प्रीत विहार में बनने वाले इन प्लांटों के लिए भूमि चिह्नित कर प्रस्ताव बना था। इस प्लांट की ड्राइंग, निर्माण आदि के अलावा छह माह का ट्रायल और पांच साल के लिए संचालन व मेंटिनेंस का कार्य होगा। अभी आनंद विहार और प्रीत विहार का दूषित पानी नालों और छोइये के माध्यम से काली नदी में गिर रहा है।
एचपीडीए के उपाध्यक्ष डॉ.नितिन गौड़ ने बताया कि आनंद विहार व प्रीत विहार से हर दिन निकलने वाले सीवरेज का अब समाधान होगा। प्लांट के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। निर्माण के बाद पांच साल के लिए संबंधित ठेकेदार को ही इसके संचालन का जिम्मा सौंपा जाएगा।