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Hapur News: 47 करोड़ से ततारपुर में काली नदी पर बनेगा एसटीपी
Tue, 01 Apr 2025 10:35 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Tue, 01 Apr 2025 10:35 PM IST
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हापुड़। गंगा की स्वच्छता के लिए ततारपुर में काली नदी पर करीब 47 करोड़ से एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाया जाएगा। छह माह बाद टेंडर को तकनीकी रूप से भी स्वीकृति मिल गई है। जल निगम ग्रामीण इस प्लांट का निर्माण कराएगा। फैक्टरी व नालों के पानी का ट्रीटमेंट कर उसे गंगा नदी में डाला जाएगा।
करीब चार हजार वर्ग मीटर भूमि का चयन करने के साथ ही उसकी सफाई भी पूरी हो गई है। अभी काली नदी हापुड़ से बुलंदशहर, अलीगढ़ होते हुए कासगंज में गंगा में जाकर गिरती है। वर्तमान में काली नदी में नालों व फैक्टरियों का पानी ततारपुर में गिरता है। इसके कारण काली नदी का पानी गंगा को भी नुकसान पहुंचाता है। गंगा की शुद्धता के लिए पानी का ट्रीटमेंट करके ही उसे गंगा में डालना जरूरी है। जमीन मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया की गई थी, जिसे छह माह बाद तकनीकी रूप से स्वीकृति के मिल चुकी है। जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता विनय रावत का कहना है कि काली नदी और गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए एसटीपी प्लांट लगाया जाएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है।
प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है नमामि गंगे--
मेरठ के गांवों से निकलकर काली नदी हापुड़ के ततारपुर पहुंचती है। ततारपुर क्षेत्र में कई फैक्टरी हैं। जिनका पानी बिना ट्रीट किए सीधा काली नदी में गिर रहा है। जबकि, नमामि गंगे प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। काली नदी के गंदे पानी के गिरने से गंगा में भी प्रदूषण बढ़ता है। इससे गंगा के भी हालात खराब होते हैं। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने बड़े नालों पर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने के पहले निर्देश दिए थे। ततारपुर में लगने वाले इस प्लांट में हर दिन छह लाख लीटर पानी का ट्रीटमेंट किया जाएगा।
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90 करोड़ से एचपीडीए लगाएगा प्लांट
जल निगम के साथ मिलकर भी आनंद विहार, प्रीत विहार के सीवर के दूषित पानी को शोधित करने के लिए एसटीपी का निर्माण कराएगा। करीब 90 करोड़ की लागत से बनने वाले इस एसटीपी की क्षमता 18 एमएलडी होगी। इसके लिए 20 हजार वर्ग मीटर भूमि मिल गई है। यह दोनों ही आवासीय कॉलोनी एचपीडीए ने बसाई थीं, लेकिन इनके सीवेज के ट्रीटमेंट भी व्यवस्था नहीं थी। प्राधिकरण अपने क्षेत्र के दूषित पानी को शोधित कर नालों में गिरने के बजाय इसे कृषि कार्यों में प्रयोग करेगा। हालांकि, अभी आनंद विहार और प्रीत विहार का दूषित पानी नालों व छोइया के माध्यम से काली नदी में गिर रहा है।
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करीब चार हजार वर्ग मीटर भूमि का चयन करने के साथ ही उसकी सफाई भी पूरी हो गई है। अभी काली नदी हापुड़ से बुलंदशहर, अलीगढ़ होते हुए कासगंज में गंगा में जाकर गिरती है। वर्तमान में काली नदी में नालों व फैक्टरियों का पानी ततारपुर में गिरता है। इसके कारण काली नदी का पानी गंगा को भी नुकसान पहुंचाता है। गंगा की शुद्धता के लिए पानी का ट्रीटमेंट करके ही उसे गंगा में डालना जरूरी है। जमीन मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया की गई थी, जिसे छह माह बाद तकनीकी रूप से स्वीकृति के मिल चुकी है। जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता विनय रावत का कहना है कि काली नदी और गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए एसटीपी प्लांट लगाया जाएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है।
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प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है नमामि गंगे
मेरठ के गांवों से निकलकर काली नदी हापुड़ के ततारपुर पहुंचती है। ततारपुर क्षेत्र में कई फैक्टरी हैं। जिनका पानी बिना ट्रीट किए सीधा काली नदी में गिर रहा है। जबकि, नमामि गंगे प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। काली नदी के गंदे पानी के गिरने से गंगा में भी प्रदूषण बढ़ता है। इससे गंगा के भी हालात खराब होते हैं। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने बड़े नालों पर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने के पहले निर्देश दिए थे। ततारपुर में लगने वाले इस प्लांट में हर दिन छह लाख लीटर पानी का ट्रीटमेंट किया जाएगा।
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90 करोड़ से एचपीडीए लगाएगा प्लांट
जल निगम के साथ मिलकर भी आनंद विहार, प्रीत विहार के सीवर के दूषित पानी को शोधित करने के लिए एसटीपी का निर्माण कराएगा। करीब 90 करोड़ की लागत से बनने वाले इस एसटीपी की क्षमता 18 एमएलडी होगी। इसके लिए 20 हजार वर्ग मीटर भूमि मिल गई है। यह दोनों ही आवासीय कॉलोनी एचपीडीए ने बसाई थीं, लेकिन इनके सीवेज के ट्रीटमेंट भी व्यवस्था नहीं थी। प्राधिकरण अपने क्षेत्र के दूषित पानी को शोधित कर नालों में गिरने के बजाय इसे कृषि कार्यों में प्रयोग करेगा। हालांकि, अभी आनंद विहार और प्रीत विहार का दूषित पानी नालों व छोइया के माध्यम से काली नदी में गिर रहा है।