{"_id":"69627d13cb1201cc6d09bcee","slug":"possession-on-government-land-hapur-news-c-30-1-gbd1037-799968-2026-01-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hapur News: बस अड्डे की जमीन... लहलहा रही कब्जे की फसल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hapur News: बस अड्डे की जमीन... लहलहा रही कब्जे की फसल
Sat, 10 Jan 2026 09:53 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Sat, 10 Jan 2026 09:53 PM IST
विज्ञापन
गढ़मुक्तेश्वर। ब्रजघाट में जिस जमीन पर अंतरराज्यीय बस अड्डा प्रस्तावित है, वहां कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर खेती शुरू कर दी है। हैरानी की बात है कि मामला अधिकारियों के संज्ञान में नहीं है। ग्रामीणों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री व जिलाधिकारी से इसकी शिकायत की है। इस घटनाक्रम से सरकारी भूमि को लेकर तंत्र की गंभीरता और निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस संबंध में किसान विक्रांत सिंह ने मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों के अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजे हैं। इसमें उल्लेख किया है कि 350 करोड़ रुपये से बनने वाले बस अड्डे के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे 84 बीघा सरकारी जमीन चिह्नित की गई है। यह भूमि लंबे समय से उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के नाम दर्ज है।
अब तक यहां बस अड्डे का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में कुछ भूमाफिया ने जमीन पर खेती शुरू कर दी है। अब तक कब्जाधारियों को न तो नोटिस दिया गया और न भूमि खाली कराने के लिए कोई ठोस कार्रवाई ही की गई है। लोगों का कहना है कि समय रहते कब्जा नहीं हटवाया गया तो बड़े विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
विज्ञापन
-- --
दो बार हुआ टेंडर, नहीं दिखाई किसी ने रुचि
वर्ष 2019 में सरकार ने एयरपोर्ट की तर्ज पर आधुनिक आईएसबीटी (इंटर स्टेट बस टर्मिनल) के निर्माण के लिए 84 बीघा जमीन चिह्नित की थी। यहां 350 करोड़ रुपये से यात्रियों के लिए एटीएम मशीन, आरओ वाटर, प्रतीक्षालय, शौचालय, पार्किंग समेत कई अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने की योजना थी। उद्देश्य था कि यहां से देशभर के लिए रोडवेज बसों का नियमित संचालन हो सके, लेकिन योजना कागजों में ही सिमटकर रह गई। यह बस अड्डा पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर संचालित होना था। इसके लिए सरकार ने वर्ष 2023-24 में दो बार टेंडर भी जारी किया, लेकिन किसी भी व्यक्ति या संस्था ने रुचि नहीं दिखाई। इस कारण कार्य आगे नहीं बढ़ सका।
-- --
इस संबंध में जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो टीम को भेजकर जांच कराई जाएगी। सरकारी भूमि पर हो रहे कब्जे को हटवाया जाएगा।
-श्रीराम यादव, एसडीएम
-- --
इस संबंध में जानकारी नहीं है। यदि जमीन पर अवैध कब्जा कर खेती की जा रही है तो उसे कब्जामुक्त कराकर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-हेमंत मिश्रा, एआरएम, उत्तर प्रदेश परिवहन निगम
विज्ञापन
इस संबंध में किसान विक्रांत सिंह ने मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों के अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजे हैं। इसमें उल्लेख किया है कि 350 करोड़ रुपये से बनने वाले बस अड्डे के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे 84 बीघा सरकारी जमीन चिह्नित की गई है। यह भूमि लंबे समय से उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के नाम दर्ज है।
विज्ञापन
अब तक यहां बस अड्डे का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में कुछ भूमाफिया ने जमीन पर खेती शुरू कर दी है। अब तक कब्जाधारियों को न तो नोटिस दिया गया और न भूमि खाली कराने के लिए कोई ठोस कार्रवाई ही की गई है। लोगों का कहना है कि समय रहते कब्जा नहीं हटवाया गया तो बड़े विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
विज्ञापन
दो बार हुआ टेंडर, नहीं दिखाई किसी ने रुचि
वर्ष 2019 में सरकार ने एयरपोर्ट की तर्ज पर आधुनिक आईएसबीटी (इंटर स्टेट बस टर्मिनल) के निर्माण के लिए 84 बीघा जमीन चिह्नित की थी। यहां 350 करोड़ रुपये से यात्रियों के लिए एटीएम मशीन, आरओ वाटर, प्रतीक्षालय, शौचालय, पार्किंग समेत कई अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने की योजना थी। उद्देश्य था कि यहां से देशभर के लिए रोडवेज बसों का नियमित संचालन हो सके, लेकिन योजना कागजों में ही सिमटकर रह गई। यह बस अड्डा पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर संचालित होना था। इसके लिए सरकार ने वर्ष 2023-24 में दो बार टेंडर भी जारी किया, लेकिन किसी भी व्यक्ति या संस्था ने रुचि नहीं दिखाई। इस कारण कार्य आगे नहीं बढ़ सका।
इस संबंध में जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो टीम को भेजकर जांच कराई जाएगी। सरकारी भूमि पर हो रहे कब्जे को हटवाया जाएगा।
-श्रीराम यादव, एसडीएम
इस संबंध में जानकारी नहीं है। यदि जमीन पर अवैध कब्जा कर खेती की जा रही है तो उसे कब्जामुक्त कराकर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-हेमंत मिश्रा, एआरएम, उत्तर प्रदेश परिवहन निगम