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Hapur News: सर्दी और प्रदूषण से निमोनिया की चपेट में बच्चे

Fri, 15 Nov 2024 10:10 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़ Updated Fri, 15 Nov 2024 10:10 PM IST
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neumonia and diarehea
हापुड़। तापमान में गिरावट और प्रदूषित वातावरण बच्चों में निमोनिया व एलर्जी की समस्या खड़ी कर रहा है। इनके कारण हर सप्ताह दो व्यस्क मरीज व 10 बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। निजी अस्पतालों में भी 100 से अधिक बच्चे निमोनिया व एलर्जी की समस्या वाले आ रहे हैं।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.समरेंद्र राय ने बताया कि एलर्जी के मरीजों के चेस्ट एक्स-रे स्पष्ट आ रहे। इससे माता-पिता को लगता है कि बच्चे को कोई समस्या नहीं है। जबकि चिकित्सकों का मानना है कि निमोनिया व एलर्जी में यही अंतर है। निमोनिया वाले बच्चों के चेस्ट एक्स-रे में धब्बे अलग ही दिखाई देते हैं। जबकि एलर्जी में ऐसा नहीं होता, क्योंकि यह समस्या सांस की नली से संबंधित है।
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जिला अस्पताल में निमोनिया से पीड़ित बच्चों को इंजेक्शन व एलर्जी से पीड़ित बच्चों को इनहेलर थैरेपी दी जा रही है। बाल रोग विशेषज्ञ का कहना है कि खांसी व ठंड लगकर बुखार आना, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, थकान और कमजोरी, तेजी से सांस लेना आदि निमोनिया के लक्षण हैं। एलर्जी के मामले में खांसी व सांस लेने में परेशानी ज्यादा होती है। जिला अस्पताल और सीएचसी के बच्चा वार्ड में बीमारों को भर्ती कराया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि दो से तीन दिन भर्ती रखने के बाद बच्चों को छुट्टी दे दी जाती है।
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2.5 माह से पांच साल वाले बच्चों को दिक्कत
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.योगेश गोयल ने बताया कि ओपीडी में सबसे ज्यादा केस एलर्जी के हैं। कुछ बच्चों को भर्ती भी किया गया है। ढाई माह से पांच साल तक के बच्चे एलर्जी व निमोनिया से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि लोगों में भ्रांति है कि बच्चे को हर बार सर्दियों में निमोनिया हो जाता है। जबकि यह बीमारी पूरे जीवन में एक या दो बार होती है। कई लोग एलर्जिक इनफेक्शन को निमोनिया समझ रहे हैं। अंतर समझने के लिए चेस्ट एक्स-रे कराना जरूरी हैै। इसके आधार पर उपचार दिया जाता है।

इनहेलर से घबरा रहे अभिभावक-
जिला अस्पताल और सीएचसी में एलर्जी से पीड़ित बच्चों को इनहेलर दिया जा रहा है। इससे कई अभिभावक घबरा रहे हैं। उनका कहना है कि इनहेलर बुजुर्गों व सांस के गंभीर मरीजों को दिया जा रहा है, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि एलर्जी के इनफेक्शन के मामले में इनहेलर से अच्छी कोई दवा नहीं है। यह सीधे सांस की नली पर असर करती है।

बचाव के उपाय-

* डॉक्टर की सलाह पर टीके लगवाएं

* बच्चों को लेकर घर से बाहर न निकलें

* साफ सफाई करते समय बच्चों को अलग कमरे में बैठाएं

* कपड़े साफ व गर्म पानी से धोएं

* बाहर की हवा से जितना बचाएंगे, उतना बेहतर
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