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बारिश के बाद तीन हजार हेक्टेयर में लगी बंदगोभी पर ब्लाइट का खतरा
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बारिश के बाद तीन हजार हेक्टेयर में लगी बंदगोभी पर ब्लाइट का खतरा
हापुड़। झमाझम बारिश के बाद चटक धूप से जिले के तीन हजार हेक्टेयर रकबे में उगी बंदगोभी की फसल पर ब्लाइट का खतरा बढ़ गया है। वहीं, धान की फसल को भी चार दिन में भारी नुकसान हुआ है। 1331 किसान ही फसल बीमा योजना में शामिल हैं, जिनकी शिकायतें दर्ज करा दी गई हैं। कृषि अधिकारी अपने स्तर से क्षेत्र में सर्वे करा रहे हैं, वहीं, धूप खिलने के बाद मंडी में धान की आवक बढ़ी है।
किसानों ने गन्ना, धान का रकबा घटाकर इस बार बंदगोभी की फसल पर विश्वास किया था। लेकिन बेमौसम बरसात ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया है। 31 हजार रुपये/किलो की दर से बीज खरीदकर किसानों ने करीब तीन हजार हेक्टेयर रकबे में फसल उगाई थी।
महज 20 दिन में दो बार बरसात के कारण फसल तबाह हो गई है। किसानों ने खेतों से पानी निकालकर किसी तरह फसल को बचाया। लेकिन अब बरसात के बाद चटक धूप खिलने से फसल में ब्लाइट का खतरा बढ़ गया है।
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उधर, बरसात में धान की फसल भी चौपट हो गई है। जिन खेतों में धान कटी पड़ी है, उसमें अधिक नुकसान है। मंगलवार को धूप खिलने पर आढ़तियों ने भी मंडी में भीगी धान को सुखाकर पैक किया। किसानों को हुए नुकसान का आंकलन कृषि विभाग की ओर से शुरू कर दिया गया है। हालांकि जिला प्रशासन से इस संबंध में आदेश जारी होने का इंतजार है।
जिले के 1331 किसानों ने फसल बीमा योजना में आवेदन किया था। लेकिन बीमा कंपनियों की शर्तों के चलते किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है, अब कृषि विभाग ने फिर से किसानों की शिकायतें दर्ज करायी हैं। दलहन की फसलों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।
-जिले में फसलों का रकबा-
उड़द-----1357 हेक्टेयर
मूंग----68 हेक्टेयर
अरहर---1330 हेक्टेयर
धान----20239 हेक्टेयर
फसल क्षति का कराया जा रहा सर्वे
जिले में फसल क्षति का सर्वे कराया जा रहा है, किसान बीमा कंपनियों में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। टोल फ्री नंबर भी जारी किए गए हैं। - डॉ. वीबी द्विवेदी, उप कृषि निदेशक।
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हापुड़। झमाझम बारिश के बाद चटक धूप से जिले के तीन हजार हेक्टेयर रकबे में उगी बंदगोभी की फसल पर ब्लाइट का खतरा बढ़ गया है। वहीं, धान की फसल को भी चार दिन में भारी नुकसान हुआ है। 1331 किसान ही फसल बीमा योजना में शामिल हैं, जिनकी शिकायतें दर्ज करा दी गई हैं। कृषि अधिकारी अपने स्तर से क्षेत्र में सर्वे करा रहे हैं, वहीं, धूप खिलने के बाद मंडी में धान की आवक बढ़ी है।
किसानों ने गन्ना, धान का रकबा घटाकर इस बार बंदगोभी की फसल पर विश्वास किया था। लेकिन बेमौसम बरसात ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया है। 31 हजार रुपये/किलो की दर से बीज खरीदकर किसानों ने करीब तीन हजार हेक्टेयर रकबे में फसल उगाई थी।
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महज 20 दिन में दो बार बरसात के कारण फसल तबाह हो गई है। किसानों ने खेतों से पानी निकालकर किसी तरह फसल को बचाया। लेकिन अब बरसात के बाद चटक धूप खिलने से फसल में ब्लाइट का खतरा बढ़ गया है।
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उधर, बरसात में धान की फसल भी चौपट हो गई है। जिन खेतों में धान कटी पड़ी है, उसमें अधिक नुकसान है। मंगलवार को धूप खिलने पर आढ़तियों ने भी मंडी में भीगी धान को सुखाकर पैक किया। किसानों को हुए नुकसान का आंकलन कृषि विभाग की ओर से शुरू कर दिया गया है। हालांकि जिला प्रशासन से इस संबंध में आदेश जारी होने का इंतजार है।
जिले के 1331 किसानों ने फसल बीमा योजना में आवेदन किया था। लेकिन बीमा कंपनियों की शर्तों के चलते किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है, अब कृषि विभाग ने फिर से किसानों की शिकायतें दर्ज करायी हैं। दलहन की फसलों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।
-जिले में फसलों का रकबा-
उड़द-----1357 हेक्टेयर
मूंग----68 हेक्टेयर
अरहर---1330 हेक्टेयर
धान----20239 हेक्टेयर
फसल क्षति का कराया जा रहा सर्वे
जिले में फसल क्षति का सर्वे कराया जा रहा है, किसान बीमा कंपनियों में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। टोल फ्री नंबर भी जारी किए गए हैं। - डॉ. वीबी द्विवेदी, उप कृषि निदेशक।