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हल्दी में मिला चॉक पाउडर तो बर्फी में मिला एल्यूमीनियम का वर्क
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हल्दी में चॉक पाउडर तो बर्फी में मिला एल्यूमीनियम का वर्क
हापुड़। दुकानों पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों में जहर मिलाकर बेचा जा रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा अप्रैल से लेकर जुलाई तक लिए गए 110 खाद्य नमूनों में से 89 नमूने जांच के बाद फेल पाए गए हैं। इनमें पनीर, दूध, तेल, मिर्च, हल्दी और मिठाईयां शामिल हैं। हल्दी में चॉक पाउडर, बर्फी में एल्युमीनियम का वर्क मिला है। लाल मिर्च में गेरू और लाल मिट्टी पाई गई है वहीं धनिये में बुरादा और सरसों के तेल में पाम ऑयल मिला है। एडीएम श्रद्धा शांडिल्यायन ने जांच में फेल मिले खाद्य पदार्थों के मुकदमों की सुनवाई करते हुए विक्रेताओं पर 19.82 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए खाद्य एव औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने जिलेभर में अप्रैल से जुलाई तक कुल 110 नमूने लिए। लैब से जब जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई तो सब हैरान रह गए। जांच रिपोर्ट में 110 में से कुल 89 नमूने फेल पाए गए। इनमें से सबसे अधिक 49 नमूने अधोमानक मिले, जबकि 23 नमूनें असुरक्षित पाए गए। इन खाद्य वस्तुओं में खतरनाक रंगों का इस्तेमाल किया गया था। जबकि 17 नमूने मिथ्याछाप पाए गए।
ऐसे में पता चलता है कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है। लोगों की खाने की थाली में खाद्य वस्तुओं के स्थान पर जहर परोसा जा रहा है। एडीएम श्रद्धा शांडिल्यायन ने जांच में फेल मिले खाद्य पदार्थों के मुकदमों की सुनवाई करते हुए विक्रेताओं पर 19.82 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
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मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी सतीश कुमार ने बताया कि जिनके नमूने फेल हुए हैं उन विक्रेताओं को नोटिस जारी कर दिया गया है। सभी पर 19.82 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। यदि तय समय पर वह अर्थदंड जमा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ आरसी जारी की जाएगी। साथ ही कार्रवाई करते हुए उनका लाइसेंस भी निरस्त किया जाएगा।
आजीवन कारावास की हो सकती है सजा
सतीश कुमार ने बताया कि नमूने फेल होने पर अगर इसकी रिपोर्ट में असुरक्षित लिखा आता है तो यह मामला सीधे न्यायालय में चलता है। इसमें जुर्माने के साथ-साथ उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है। वहीं अमानक में 5 लाख का जुर्माना और मिथ्याछाप में 3 लाख का जुर्माने का प्रावधान कानून में हैं। इनकी सुनवाई एडीएम कोर्ट में होती है।
मिलावटी खाद्य पदार्थ सेहत के लिए खतरनाक
फिजीशियन डॉ. हरिओम सिंह ने बताया कि लंबे समय तक मिलावटी सामग्री खाने से कई तरह की समस्याएं पैदा हो जाती हैं। सिंथेटिक और केमिकल रंग के सेवन से आंत्रशोध, अल्सर, त्वचा रोग बढने का खतरा बढ़ जाता है। इससे किडनी और लीवर को भी नुकसान पहुंचाता है।
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हापुड़। दुकानों पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों में जहर मिलाकर बेचा जा रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा अप्रैल से लेकर जुलाई तक लिए गए 110 खाद्य नमूनों में से 89 नमूने जांच के बाद फेल पाए गए हैं। इनमें पनीर, दूध, तेल, मिर्च, हल्दी और मिठाईयां शामिल हैं। हल्दी में चॉक पाउडर, बर्फी में एल्युमीनियम का वर्क मिला है। लाल मिर्च में गेरू और लाल मिट्टी पाई गई है वहीं धनिये में बुरादा और सरसों के तेल में पाम ऑयल मिला है। एडीएम श्रद्धा शांडिल्यायन ने जांच में फेल मिले खाद्य पदार्थों के मुकदमों की सुनवाई करते हुए विक्रेताओं पर 19.82 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए खाद्य एव औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने जिलेभर में अप्रैल से जुलाई तक कुल 110 नमूने लिए। लैब से जब जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई तो सब हैरान रह गए। जांच रिपोर्ट में 110 में से कुल 89 नमूने फेल पाए गए। इनमें से सबसे अधिक 49 नमूने अधोमानक मिले, जबकि 23 नमूनें असुरक्षित पाए गए। इन खाद्य वस्तुओं में खतरनाक रंगों का इस्तेमाल किया गया था। जबकि 17 नमूने मिथ्याछाप पाए गए।
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ऐसे में पता चलता है कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है। लोगों की खाने की थाली में खाद्य वस्तुओं के स्थान पर जहर परोसा जा रहा है। एडीएम श्रद्धा शांडिल्यायन ने जांच में फेल मिले खाद्य पदार्थों के मुकदमों की सुनवाई करते हुए विक्रेताओं पर 19.82 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
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मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी सतीश कुमार ने बताया कि जिनके नमूने फेल हुए हैं उन विक्रेताओं को नोटिस जारी कर दिया गया है। सभी पर 19.82 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। यदि तय समय पर वह अर्थदंड जमा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ आरसी जारी की जाएगी। साथ ही कार्रवाई करते हुए उनका लाइसेंस भी निरस्त किया जाएगा।
आजीवन कारावास की हो सकती है सजा
सतीश कुमार ने बताया कि नमूने फेल होने पर अगर इसकी रिपोर्ट में असुरक्षित लिखा आता है तो यह मामला सीधे न्यायालय में चलता है। इसमें जुर्माने के साथ-साथ उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है। वहीं अमानक में 5 लाख का जुर्माना और मिथ्याछाप में 3 लाख का जुर्माने का प्रावधान कानून में हैं। इनकी सुनवाई एडीएम कोर्ट में होती है।
मिलावटी खाद्य पदार्थ सेहत के लिए खतरनाक
फिजीशियन डॉ. हरिओम सिंह ने बताया कि लंबे समय तक मिलावटी सामग्री खाने से कई तरह की समस्याएं पैदा हो जाती हैं। सिंथेटिक और केमिकल रंग के सेवन से आंत्रशोध, अल्सर, त्वचा रोग बढने का खतरा बढ़ जाता है। इससे किडनी और लीवर को भी नुकसान पहुंचाता है।