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निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों ने किया धरना-प्रदर्शन
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एसई कार्यालय पर धरना देते बिजली विभाग के कर्मचारी।
- फोटो : HAPUR
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निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों ने किया धरना-प्रदर्शन
हापुड़। निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों ने बुधवार को कार्य का बहिष्कार कर एसई कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए समस्याओं के जल्द निस्तारण की मांग की। वहीं हड़ताल के चलते निगम के बिल काउंटर भी बंद रखे गए, इससे निगम को करोड़ों रुपये का राजस्व प्रभावित हुआ। बिजलीघरों की व्यवस्था भी संविदा कर्मियों के हाथों में रही। कई स्थानों पर बिजली किल्लत भी बनी रही। कार्यालयों में कामकाज प्रभावित रहा जिसके चलते उपभोक्ताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, रोडवेज कर्मियों ने भी निजीकरण के विरोध में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक राधेश्याम यादव ने कहा कि सरकार इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट 2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के स्टेंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट की कार्रवाई को अमल में लाने की तैयारी कर रही है। इसका बिजली कर्मचारी काफी समय से विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार मानने को तैयार नहीं है।
एसई कार्यालय पर आयोजित धरने में बिजली कर्मियों ने सरकार के इस फैसले को निरस्त कराने की मांग उठाई। साथ ही उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद का पुनर्गठन कराने की भी मांग की। इन मांगों को लेकर बिल काउंटर भी बंद रखे गए, ऐसे में करोड़ों रुपये का राजस्व प्रभावित हुआ। कर्मचारियों ने अपनी मांगों से संबंधित सीएम के नाम एक ज्ञापन एसई को सौंपा। इस मौके पर कृष्णपाल, पराग भारद्वाज, नितिन गुप्ता, शुभम सिंह, भूपेंद्र शर्मा, नितिन, विकास कुमार, सुमन, सौरभ कुमार, धर्मवीर, देवी प्रसाद, विजय तोमर, राजेश कुमार, अफरोज आदि मौजूद रहे। वहीं हड़ताल के चलते निगम के कार्यालयों में भी कामकाज प्रभावित रहा जिसके चलते उपभोक्ताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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रोडवेज कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर किया प्रदर्शन
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के आह्वान पर रोडवेज कर्मचारियों ने भी काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। साथ ही सात फरवरी तक निजीकरण के विरोध में सांकेतिक प्रदर्शन जारी रखने का भी एलान किया।
शाखा मंत्री हैदर अली ने कहा कि सरकार रोडवेज कर्मियों की अनदेखी करने से बाज नहीं आ रही है। निजीकरण का विरोध अंतिम सांस तक जारी रहेगा। जब तक उनकी समस्याओं का निस्तारण नहीं होगा आंदोलन जारी रखा जाएगा। सात फरवरी तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
इस मौके पर केशव सिंह सिसौदिया, जितेंद्र कुमार, निवेश, राजेंद्र लाल, राजवीर सिंह, सुरेंद्र सिंह, अजयपाल सिंह, प्रताप सिंह, अमित कुमार आदि मौजूद रहे।
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हापुड़। निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों ने बुधवार को कार्य का बहिष्कार कर एसई कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए समस्याओं के जल्द निस्तारण की मांग की। वहीं हड़ताल के चलते निगम के बिल काउंटर भी बंद रखे गए, इससे निगम को करोड़ों रुपये का राजस्व प्रभावित हुआ। बिजलीघरों की व्यवस्था भी संविदा कर्मियों के हाथों में रही। कई स्थानों पर बिजली किल्लत भी बनी रही। कार्यालयों में कामकाज प्रभावित रहा जिसके चलते उपभोक्ताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, रोडवेज कर्मियों ने भी निजीकरण के विरोध में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक राधेश्याम यादव ने कहा कि सरकार इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट 2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के स्टेंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट की कार्रवाई को अमल में लाने की तैयारी कर रही है। इसका बिजली कर्मचारी काफी समय से विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार मानने को तैयार नहीं है।
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एसई कार्यालय पर आयोजित धरने में बिजली कर्मियों ने सरकार के इस फैसले को निरस्त कराने की मांग उठाई। साथ ही उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद का पुनर्गठन कराने की भी मांग की। इन मांगों को लेकर बिल काउंटर भी बंद रखे गए, ऐसे में करोड़ों रुपये का राजस्व प्रभावित हुआ। कर्मचारियों ने अपनी मांगों से संबंधित सीएम के नाम एक ज्ञापन एसई को सौंपा। इस मौके पर कृष्णपाल, पराग भारद्वाज, नितिन गुप्ता, शुभम सिंह, भूपेंद्र शर्मा, नितिन, विकास कुमार, सुमन, सौरभ कुमार, धर्मवीर, देवी प्रसाद, विजय तोमर, राजेश कुमार, अफरोज आदि मौजूद रहे। वहीं हड़ताल के चलते निगम के कार्यालयों में भी कामकाज प्रभावित रहा जिसके चलते उपभोक्ताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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रोडवेज कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर किया प्रदर्शन
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के आह्वान पर रोडवेज कर्मचारियों ने भी काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। साथ ही सात फरवरी तक निजीकरण के विरोध में सांकेतिक प्रदर्शन जारी रखने का भी एलान किया।
शाखा मंत्री हैदर अली ने कहा कि सरकार रोडवेज कर्मियों की अनदेखी करने से बाज नहीं आ रही है। निजीकरण का विरोध अंतिम सांस तक जारी रहेगा। जब तक उनकी समस्याओं का निस्तारण नहीं होगा आंदोलन जारी रखा जाएगा। सात फरवरी तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
इस मौके पर केशव सिंह सिसौदिया, जितेंद्र कुमार, निवेश, राजेंद्र लाल, राजवीर सिंह, सुरेंद्र सिंह, अजयपाल सिंह, प्रताप सिंह, अमित कुमार आदि मौजूद रहे।