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शासन ने हापुड़ के उद्यमियों को सौंपी 380 मजदूरों की लिस्ट
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शासन ने हापुड़ के उद्यमियों को सौंपी 380 मजदूरों की सूची
हापुड़। लॉकडाउन में विभिन्न प्रदेश, जिलों से हापुड़ लौटे प्रवासी मजदूरों के लिए जहां रोजी-रोटी का संकट बढ़ गया है। ऐसे में उद्यमियों को भी उन्हें काम देना मुश्किल हो रहा है। शासन ने 380 मजदूरों की लिस्ट हापुड़ के उद्यमी एसोसिएशन को दी है। उद्यमी मजदूरों को फोन भी कर रहे हैं। लेकिन उनके सामने बड़ी समस्या यह है कि कामकाज मंदा होने के चलते पुराने मजदूरों को ही वेतन देना मुश्किल हो रहा है, ऐसे में नए मजदूरों को कैसे काम पर रखा जाएगा।
हापुड़ स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सचिव अमन गुप्ता ने बताया कि शासन एक ओर यह आदेश जारी कर रहा है कि 33 फीसदी मजदूरों के साथ फैक्टरियों को चालू कराया जाए और सभी को वेतन मिले। जबकि कामकाज ठप पड़ा है। जैसे तैसे कर पुराने मजदूरों को वेतन दे रहे हैं।
ऐसे में अब सरकार की ओर से 380 मजदूरों की सूची मिली है। शासन के आदेशानुसार वह इन मजदूरों को फोन भी कर रहे हैं। लेकिन अधिकांश मजदूर फास्ट फूड बनाने, सब्जी बेचने वाले मिल रहे हैं। उनकी फैक्ट्रियों में जो कार्य होता है वह उसमें भी कुशल नहीं है। ऐसे में जहां पुराने मजदूरों को वेतन देना चुनौती बन रहा है, नए मजदूरों को कैसे काम पर रखा जा सकता है। हालात यदि सामान्य होते और कामकाज अच्छा चलता तो इन्हें रखने में कोई समस्या भी नहीं थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि शासन को जो आदेश आया है वह उसका हर संभव पालन करेंगे।
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हापुड़। लॉकडाउन में विभिन्न प्रदेश, जिलों से हापुड़ लौटे प्रवासी मजदूरों के लिए जहां रोजी-रोटी का संकट बढ़ गया है। ऐसे में उद्यमियों को भी उन्हें काम देना मुश्किल हो रहा है। शासन ने 380 मजदूरों की लिस्ट हापुड़ के उद्यमी एसोसिएशन को दी है। उद्यमी मजदूरों को फोन भी कर रहे हैं। लेकिन उनके सामने बड़ी समस्या यह है कि कामकाज मंदा होने के चलते पुराने मजदूरों को ही वेतन देना मुश्किल हो रहा है, ऐसे में नए मजदूरों को कैसे काम पर रखा जाएगा।
हापुड़ स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सचिव अमन गुप्ता ने बताया कि शासन एक ओर यह आदेश जारी कर रहा है कि 33 फीसदी मजदूरों के साथ फैक्टरियों को चालू कराया जाए और सभी को वेतन मिले। जबकि कामकाज ठप पड़ा है। जैसे तैसे कर पुराने मजदूरों को वेतन दे रहे हैं।
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ऐसे में अब सरकार की ओर से 380 मजदूरों की सूची मिली है। शासन के आदेशानुसार वह इन मजदूरों को फोन भी कर रहे हैं। लेकिन अधिकांश मजदूर फास्ट फूड बनाने, सब्जी बेचने वाले मिल रहे हैं। उनकी फैक्ट्रियों में जो कार्य होता है वह उसमें भी कुशल नहीं है। ऐसे में जहां पुराने मजदूरों को वेतन देना चुनौती बन रहा है, नए मजदूरों को कैसे काम पर रखा जा सकता है। हालात यदि सामान्य होते और कामकाज अच्छा चलता तो इन्हें रखने में कोई समस्या भी नहीं थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि शासन को जो आदेश आया है वह उसका हर संभव पालन करेंगे।
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