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Hapur News: एमईएस के आकलन में खेल, लागत बुक की अनदेखी कर बना दिया बिल
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एमईएस के आकलन में खेल, लागत बुक की अनदेखी कर बना दिया 1.61 करोड़ का बिल
हापुड़। निर्बाध सप्लाई के लिए ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने भारतीय रक्षा प्रणाली (एमईएस) बाबूगढ़ से आकलन के आधार पर 1.61 करोड़ रुपये जमा करा लिए। यह राशि दो रसीदों के जरिए जमा कराई गई, जो आकलन से कहीं अधिक थी। जल्दबाजी में निगम के अधिकारी एक ही पत्रांक पर दो आकलन कर फंस गए। अब बढ़ाकर ली गई धनराशि को बिलों में समायोजित किया जा रहा है। बढ़ाकर ली गई धनराशि करीब 22.74 लाख रुपये है।
एमईएस बाबूगढ़ द्वारा अगस्त 2021 में निर्बाध सप्लाई के लिए आवेदन किया गया था। इस आवेदन पर ऊर्जा निगम ने आकलन किया लेकिन, पूरा आकलन ही भ्रष्टाचार की नीव पर तैयार था। लागत बुक में जो दरें होनी चाहिए थी, आकलन में उसकी तीन से चार गुना दरें ली र्गइं। जितना तार डलना भी नहीं था, उससे कहीं अधिक तार आकलन में दिखाया गया।
बता दें कि पहले आकलन में जिस लागत डाटा से उन्होंने डबल पोल की कीमत खुद ही 63230 रुपये दिखाई थी, दूसरे आकलन में उसी पोल की कीमत 71061 रुपये कर दी गई। यह कारनामा इसलिए करना पड़ा, क्योंकि सड़क खोदाई की दूरी पहले आकलन में 3192 मीटर ली गई थी। बात पकड़ में आने पर उसे घटाकर आधा करना पड़ा। ऐसे में करीब 9 लाख रुपये का अंतर बन गया।
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इससे भी बड़ा खेल आकलन में यह हुआ कि बिजली निगम की लागत बुक में 11 केवी की लाइन बनाने के लिए एचडीपीई पाइप की प्रति मीटर लागत 490.83 रुपये है, जबकि आकलन में इसकी करीब तीन गुना 1091 रुपये/मीटर की दर ली गई। यह दर 33 केवी लाइन को बनाने में ली जानी थी। इसमें भी करीब 18 लाख रुपये का खेल हुआ। अब मामला खुला तो ऊर्जा निगम ने भी माना कि एमईएस से 2274950 रुपये अधिक जमा करा लिए गए। इस राशि को अब बिलों में समायोजित कराने के आदेश पारित किए गए हैं।
-- एक ही पत्रांक पर किए गए दो आकलन--
एमईएस को निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के लिए 29 सितंबर 2020 में पहला आकलन बनाया गया, जो 16181368 रुपये का था। जबकि दूसरा आकलन 1.6181350 रुपये का बनाया गया। दोनों में अंतर सिर्फ 10 रुपये का था, इसमें पहले आकलन का पैसा ही जमा कराया गया। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही आकलन एक ही पत्रांक के हैं।
- पैसा जमा कराने के बाद किया दूसरा आकलन-
पहला आकलन बनाकर एमईएस को टीसी जारी कर दी गई। इसके सापेक्ष ही पैसा जमा कराया गया। हालांकि बाद में आकलन की अनियमितता सामने आने पर एमईएस को बिना सूचना दिए ही उतनी ही राशि का दूसरा आकलन तैयार किया गया। एक ही राशि के आकलन बनाने के लिए लागत बुक के नियमों की धज्जियां उड़ाकर सामान के मनमाने पैसे जोड़ दिए गए।
- घपले को उजागर करने वाले मुख्य बिंदु -
पहले आकलन में डबल पोल के एक जोड़े की कीमत 63230 रुपये दिखाई, दूसरे आकलन में इसी पोल की कीमत 71061 रुपये दर्शा दी गई।
पहले सिर्फ 6 डबल पोल से काम चल रहा था, दूसरे एस्टीमेट आकलन में सात पोल कर दिए गए।
11 केवी की लाइन में 33 केवी लाइन के एचडीपीई पाइप की लागत जोड़ी, इससे करीब 18 लाख का अंतर बना।
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- शासन तक पहुंची मामले की शिकायत
इस मामले में हापुड़ से ही कुछ लोगों ने मेल के जरिए शासन में शिकायत की है, जिसमें समस्त आकलन का पैसा जमा कराने संबंधी रसीद। बिलों में समायोजन संबंधी आदेश की प्रति भी लगाई है, साथ ही यह भी बताया है कि करीब इस प्रकरण में अभी 20 लाख रुपये का और खेल हुआ है।
एमईएस के आकलन में इतनी अधिक राशि बढ़ाकर जमा कराने का मामला गंभीर है। इसकी जांच कराकर, उचित कार्रवाई की जाएगी। नियमों का पालन नहीं करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी -- यूके सिंह, अधीक्षण अभियंता।
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हापुड़। निर्बाध सप्लाई के लिए ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने भारतीय रक्षा प्रणाली (एमईएस) बाबूगढ़ से आकलन के आधार पर 1.61 करोड़ रुपये जमा करा लिए। यह राशि दो रसीदों के जरिए जमा कराई गई, जो आकलन से कहीं अधिक थी। जल्दबाजी में निगम के अधिकारी एक ही पत्रांक पर दो आकलन कर फंस गए। अब बढ़ाकर ली गई धनराशि को बिलों में समायोजित किया जा रहा है। बढ़ाकर ली गई धनराशि करीब 22.74 लाख रुपये है।
एमईएस बाबूगढ़ द्वारा अगस्त 2021 में निर्बाध सप्लाई के लिए आवेदन किया गया था। इस आवेदन पर ऊर्जा निगम ने आकलन किया लेकिन, पूरा आकलन ही भ्रष्टाचार की नीव पर तैयार था। लागत बुक में जो दरें होनी चाहिए थी, आकलन में उसकी तीन से चार गुना दरें ली र्गइं। जितना तार डलना भी नहीं था, उससे कहीं अधिक तार आकलन में दिखाया गया।
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बता दें कि पहले आकलन में जिस लागत डाटा से उन्होंने डबल पोल की कीमत खुद ही 63230 रुपये दिखाई थी, दूसरे आकलन में उसी पोल की कीमत 71061 रुपये कर दी गई। यह कारनामा इसलिए करना पड़ा, क्योंकि सड़क खोदाई की दूरी पहले आकलन में 3192 मीटर ली गई थी। बात पकड़ में आने पर उसे घटाकर आधा करना पड़ा। ऐसे में करीब 9 लाख रुपये का अंतर बन गया।
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इससे भी बड़ा खेल आकलन में यह हुआ कि बिजली निगम की लागत बुक में 11 केवी की लाइन बनाने के लिए एचडीपीई पाइप की प्रति मीटर लागत 490.83 रुपये है, जबकि आकलन में इसकी करीब तीन गुना 1091 रुपये/मीटर की दर ली गई। यह दर 33 केवी लाइन को बनाने में ली जानी थी। इसमें भी करीब 18 लाख रुपये का खेल हुआ। अब मामला खुला तो ऊर्जा निगम ने भी माना कि एमईएस से 2274950 रुपये अधिक जमा करा लिए गए। इस राशि को अब बिलों में समायोजित कराने के आदेश पारित किए गए हैं।
-- एक ही पत्रांक पर किए गए दो आकलन--
एमईएस को निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के लिए 29 सितंबर 2020 में पहला आकलन बनाया गया, जो 16181368 रुपये का था। जबकि दूसरा आकलन 1.6181350 रुपये का बनाया गया। दोनों में अंतर सिर्फ 10 रुपये का था, इसमें पहले आकलन का पैसा ही जमा कराया गया। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही आकलन एक ही पत्रांक के हैं।
- पैसा जमा कराने के बाद किया दूसरा आकलन-
पहला आकलन बनाकर एमईएस को टीसी जारी कर दी गई। इसके सापेक्ष ही पैसा जमा कराया गया। हालांकि बाद में आकलन की अनियमितता सामने आने पर एमईएस को बिना सूचना दिए ही उतनी ही राशि का दूसरा आकलन तैयार किया गया। एक ही राशि के आकलन बनाने के लिए लागत बुक के नियमों की धज्जियां उड़ाकर सामान के मनमाने पैसे जोड़ दिए गए।
- घपले को उजागर करने वाले मुख्य बिंदु -
पहले आकलन में डबल पोल के एक जोड़े की कीमत 63230 रुपये दिखाई, दूसरे आकलन में इसी पोल की कीमत 71061 रुपये दर्शा दी गई।
पहले सिर्फ 6 डबल पोल से काम चल रहा था, दूसरे एस्टीमेट आकलन में सात पोल कर दिए गए।
11 केवी की लाइन में 33 केवी लाइन के एचडीपीई पाइप की लागत जोड़ी, इससे करीब 18 लाख का अंतर बना।
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- शासन तक पहुंची मामले की शिकायत
इस मामले में हापुड़ से ही कुछ लोगों ने मेल के जरिए शासन में शिकायत की है, जिसमें समस्त आकलन का पैसा जमा कराने संबंधी रसीद। बिलों में समायोजन संबंधी आदेश की प्रति भी लगाई है, साथ ही यह भी बताया है कि करीब इस प्रकरण में अभी 20 लाख रुपये का और खेल हुआ है।
एमईएस के आकलन में इतनी अधिक राशि बढ़ाकर जमा कराने का मामला गंभीर है। इसकी जांच कराकर, उचित कार्रवाई की जाएगी। नियमों का पालन नहीं करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी -- यूके सिंह, अधीक्षण अभियंता।