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220 रुपये क्विंटल हो रही गन्ने की खरीद, 3600 रुपये हुए गुड़ के दाम
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220 रुपये क्विंटल हो रही गन्ने की खरीद, 3600 रुपये हुए गुड़ के दाम
हापुड़। चीनी मिलों के देरी से चालू होने के कारण क्रेशरों ने गन्ने के दाम घटा दिए हैं, जबकि मंडी में गुड़ अभी भी 3600 रुपये क्विंटल तक बिक रहा है। क्रेशर महज 220 रुपये तक ही गन्ना खरीद रहे हैं, जो चीनी मिलों द्वारा देय रेट से करीब 130 से 150 रुपये क्विंटल कम है। इस वर्ष गन्ने की फसल हल्की है, अब तक किसान 15 से 20 फीसदी गन्ने की क्रेशरों पर सप्लाई कर चुके हैं। ऐसे में चीनी मिलों को जहां लक्ष्य पूरा करना मुश्किल होगा, वहीं किसानों को बॉंड पूरे करने की चिंता सता रही है।
जिले में इस साल गन्ने का रकबा करीब दो फीसदी कम है, फसल में भयंकर बीमारियों के प्रकोप के चलते गन्ना कमजोर रह गया है। चीनी मिल अगले महीने चलेंगी, ऐसे में गेहूं बोने की तैयारियों में जुटे किसानों ने फसल की कटाई शुरू कर दी है। क्रेशरों पर गन्ने की भरमार है, जिसके चलते गन्ने के दाम 250 से घटाकर अब 210 से 220 रुपये/क्विंटल तक कर दिए हैं।
इतना ही नहीं जिन खेतों में रोग का अधिक प्रकोप हैं, वहां किसानों ने गन्ने की फसल को चारा केंद्रों पर सप्लाई करना शुरू कर दिया है, जहां उन्हें 250 रुपये/क्विंटल तक के दाम मिल रहे हैं। चीनी मिल जितना अधिक देरी से चलेंगी क्रेशरों को उतना ही लाभ होगा। इसका नुकसान चीनी मिलों को भी होगा। क्योंकि पेराई सत्र 2022-23 में गन्ना खरीद का लक्ष्य आसान नहीं होगा।
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41946 हेक्टेयर है गन्ने का रकबा
जिले में गन्ने का रकबा 41946 हेक्टेयर है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब दो फीसदी कम है। ऊपर से कीड़ा लगने से 20 से 30 फीसदी फसल को नुकसान हुआ है, कुल मिलाकर जिले में गन्ने की खेती इस बार कमजोर पड़ी है।
चीनी मिल देरी से शुरू होने के कारण किसानों को नुकसान
चीनी मिलों के देरी से शुरू होने के कारण ही किसानों को क्रेशरों पर अपना गन्ना कम दाम में बेचना पड़ रहा है। गेहूं बुवाई का समय आ गया है, चीनी मिलों पर गन्ना डालने के लिए रुके रहे तो गेहूं भी नहीं बो पाएंगे। पेराई सत्र को व्यवस्थित करने की जरूरत है। - जतिन चौधरी, किसान रसूलपुर --फोटो संख्या--05
कौड़ियों के भाव खरीदा जा रहा गन्ना
क्रेशरों पर किसानों का गन्ना कौड़ियों के भाव खरीदा जा रहा है। चीनी मिल भुगतान नहीं करती, पेराई सत्र भी देरी से चालू किया जाता है। जिला प्रशासन को इस पर सख्त होना चाहिए। भुगतान व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। - सरदार अमरीश माहल, प्रदेश उपाध्यक्ष, किसान एकता संघ। --फोटो संख्या--06
गन्ना भुगतान को लेकर की जा रही है सख्ती
गन्ना भुगतान को लेकर चीनी मिलों पर सख्ती की जा रही है। नोटिस लगातार जारी किए जा रहे हैं, लक्ष्य के अनुसार चीनी मिलों से भुगतान भी कराया जा रहा है। - निधि गुप्ता, डीसीओ
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हापुड़। चीनी मिलों के देरी से चालू होने के कारण क्रेशरों ने गन्ने के दाम घटा दिए हैं, जबकि मंडी में गुड़ अभी भी 3600 रुपये क्विंटल तक बिक रहा है। क्रेशर महज 220 रुपये तक ही गन्ना खरीद रहे हैं, जो चीनी मिलों द्वारा देय रेट से करीब 130 से 150 रुपये क्विंटल कम है। इस वर्ष गन्ने की फसल हल्की है, अब तक किसान 15 से 20 फीसदी गन्ने की क्रेशरों पर सप्लाई कर चुके हैं। ऐसे में चीनी मिलों को जहां लक्ष्य पूरा करना मुश्किल होगा, वहीं किसानों को बॉंड पूरे करने की चिंता सता रही है।
जिले में इस साल गन्ने का रकबा करीब दो फीसदी कम है, फसल में भयंकर बीमारियों के प्रकोप के चलते गन्ना कमजोर रह गया है। चीनी मिल अगले महीने चलेंगी, ऐसे में गेहूं बोने की तैयारियों में जुटे किसानों ने फसल की कटाई शुरू कर दी है। क्रेशरों पर गन्ने की भरमार है, जिसके चलते गन्ने के दाम 250 से घटाकर अब 210 से 220 रुपये/क्विंटल तक कर दिए हैं।
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इतना ही नहीं जिन खेतों में रोग का अधिक प्रकोप हैं, वहां किसानों ने गन्ने की फसल को चारा केंद्रों पर सप्लाई करना शुरू कर दिया है, जहां उन्हें 250 रुपये/क्विंटल तक के दाम मिल रहे हैं। चीनी मिल जितना अधिक देरी से चलेंगी क्रेशरों को उतना ही लाभ होगा। इसका नुकसान चीनी मिलों को भी होगा। क्योंकि पेराई सत्र 2022-23 में गन्ना खरीद का लक्ष्य आसान नहीं होगा।
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41946 हेक्टेयर है गन्ने का रकबा
जिले में गन्ने का रकबा 41946 हेक्टेयर है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब दो फीसदी कम है। ऊपर से कीड़ा लगने से 20 से 30 फीसदी फसल को नुकसान हुआ है, कुल मिलाकर जिले में गन्ने की खेती इस बार कमजोर पड़ी है।
चीनी मिल देरी से शुरू होने के कारण किसानों को नुकसान
चीनी मिलों के देरी से शुरू होने के कारण ही किसानों को क्रेशरों पर अपना गन्ना कम दाम में बेचना पड़ रहा है। गेहूं बुवाई का समय आ गया है, चीनी मिलों पर गन्ना डालने के लिए रुके रहे तो गेहूं भी नहीं बो पाएंगे। पेराई सत्र को व्यवस्थित करने की जरूरत है। - जतिन चौधरी, किसान रसूलपुर --फोटो संख्या--05
कौड़ियों के भाव खरीदा जा रहा गन्ना
क्रेशरों पर किसानों का गन्ना कौड़ियों के भाव खरीदा जा रहा है। चीनी मिल भुगतान नहीं करती, पेराई सत्र भी देरी से चालू किया जाता है। जिला प्रशासन को इस पर सख्त होना चाहिए। भुगतान व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। - सरदार अमरीश माहल, प्रदेश उपाध्यक्ष, किसान एकता संघ। --फोटो संख्या--06
गन्ना भुगतान को लेकर की जा रही है सख्ती
गन्ना भुगतान को लेकर चीनी मिलों पर सख्ती की जा रही है। नोटिस लगातार जारी किए जा रहे हैं, लक्ष्य के अनुसार चीनी मिलों से भुगतान भी कराया जा रहा है। - निधि गुप्ता, डीसीओ